मुंगेली जिले में व्यावसायिक शिक्षा में गड़बड़ी का खुलासा, केंद्र सरकार की उच्च स्तरीय जांच के संकेत

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मुंगेली । मुंगेली जिले में व्यावसायिक शिक्षा के नाम पर सामने आई गंभीर गड़बड़ियों का मामला अब राज्य की सीमाओं से निकलकर केंद्र सरकार तक पहुंच गया है। समाचार माध्यमों में प्रसारित स्टोरी के बाद शिक्षा जगत में हड़कंप मच गया है। इस खुलासे में शासन द्वारा व्यावसायिक शिक्षा के लिए जारी की गई लगभग दो-दो लाख रुपये की राशि के कथित दुरुपयोग और बच्चों के स्वावलंबन के उद्देश्य से शुरू की गई केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना को पलीता लगाए जाने के आरोप सामने आए हैं।

सूत्रों के अनुसार, इस पूरे मामले को और ने गंभीरता से लेते हुए संज्ञान में लिया है। बताया जा रहा है कि योजना के क्रियान्वयन को लेकर प्रशासन की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। लापरवाही और कथित कुत्सित प्रयासों के कारण केंद्र सरकार की मंशा पर प्रश्नचिन्ह लगने की बात कही जा रही है।

सूत्रों का कहना है कि जिस जिम्मेदारी को शासन-प्रशासन को निभाना चाहिए था, उसकी लड़ाई आज मुंगेली के शासकीय स्कूलों के छात्र स्वयं लड़ने को मजबूर हैं। मीडिया के माध्यम से कई बार संबंधित अधिकारियों को सचेत किया गया और बच्चों की आवाज को मंच मिला, लेकिन इसके बावजूद अधिकारियों द्वारा लगातार शिकायतों की अनदेखी की गई। यहां तक कि दिए गए लिखित आवेदनों को भी दरकिनार कर दिया गया, जिससे अधिकारियों के रवैये और शासन की नीयत पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

बताया जा रहा है कि व्यावसायिक शिक्षा को निजी व्यवसायीकरण तक सीमित कर दिया गया और यह केवल खरीद-फरोख्त का माध्यम बनकर रह गई। इस संबंध में लगातार शिकायतें मिलने के बाद केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपनाया है और उच्च स्तरीय जांच के संकेत दिए हैं। यदि जांच में यह सामने आता है कि केंद्र सरकार द्वारा जारी गाइडलाइन के अनुसार कार्य नहीं हुआ है, तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों पर कठोर कार्रवाई तय मानी जा रही है।

फिलहाल पूरे मामले पर शिक्षा विभाग से लेकर प्रशासनिक महकमे में हलचल तेज है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि मुंगेली प्रशासन और राज्य सरकार इस गंभीर प्रकरण में आगे क्या ठोस कदम उठाती है और बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों पर कब तक कार्रवाई होती है।

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