मुआवजा भुगतान में भ्रष्टाचार का आरोप, किसानों ने अमीन-पटवारी को हटाने की उठाई मांग
मुंगेली। मनियारी बैराज अंतर्गत भू-अधिग्रहण मुआवजा भुगतान को लेकर एक बार फिर गंभीर आरोप सामने आए हैं। मुआवजा प्रक्रिया से जुड़े अमीन-पटवारी तन्नय देवांगन को हटाने की मांग को लेकर किसानों में आक्रोश व्याप्त है। किसानों ने भाजपा नेत्री डॉ सरिता भारद्वाज के नेतृत्व में एसडीएम को ज्ञापन सौंपते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।
किसानों का आरोप है कि मुआवजा भुगतान के नाम पर अमीन-पटवारी द्वारा अवैध रूप से प्रति किसान 8 प्रतिशत राशि की मांग की जा रही है। बताया गया कि जब किसान मुआवजा भुगतान की स्थिति जानने के लिए संपर्क करते हैं, तो उनसे खुलेआम कमीशन मांगा जाता है। किसानों के अनुसार, अमीन-पटवारी का कहना है कि यदि 8 प्रतिशत राशि नहीं दी गई तो मुआवजा भूल जाएं, क्योंकि अभी इस कार्य में दो साल और लगेंगे।

ज्ञापन में बताया गया कि मनियारी बैराज परियोजना के तहत किसानों की जमीन का भू-अधिग्रहण हुए करीब 12 वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन आज तक कई किसानों को उनका मुआवजा नहीं मिल पाया है। इससे किसानों की आर्थिक स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है। खेती-किसानी पर निर्भर परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि अमीन-पटवारी द्वारा ग्राम रोनकापा, पड़रिया छाप, कुकुसदा सहित अन्य गांवों के किसानों से सौदेबाजी की जा रही है। मुआवजा दिलाने के नाम पर लेन-देन की बातें सामने आने से प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। किसानों का कहना है कि यह केवल भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि उनके अधिकारों का खुला हनन है।
पूर्व पार्षद प्रत्याशी एवं किसान प्रतिनिधि रेहान रजा सहित किसान उप सरपंच रामरतन निर्मलकर,राजू ध्रुव,मधुकर साहू,रामभरोसे,परमेश्वर पोर्ते,कमल किशोर ध्रुव,कन्हैया लाल, परमेश्वर, देवचंद, निलेश, नरबद, और अन्य किसानों ने एक स्वर में मांग की है कि अमीन-पटवारी को तत्काल यहां से हटाया जाए और पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।
एसडीएम कार्यालय में ज्ञापन सौंपते समय किसानों ने प्रशासन से अपेक्षा जताई कि वर्षों से लंबित मुआवजा प्रकरण का शीघ्र निराकरण होगा और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। अब देखना यह है कि प्रशासन किसानों की शिकायतों को कितनी गंभीरता से लेता है और मणियारी बैराज मुआवजा प्रकरण में कब तक न्याय मिल पाता है।

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