डॉ. सीवी रमन विश्वविद्यालय और आईसीएसएस के बीच एमओयू
रिपोर्टर ✒️ सूचित कुमार मरावी
• शिक्षा, शोध और सनातन संस्कृति के संरक्षण को मिलेगी नई दिशा
करगीकला। उच्च शिक्षा और सांस्कृतिक संरक्षण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए डॉ. सीवी रमन विश्वविद्यालय और आईसीएसएस के बीच शैक्षणिक सहयोग को सुदृढ़ करने हेतु एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इस एमओयू का उद्देश्य अकादमिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करना, सनातन परंपरा एवं संस्कृति के संरक्षण व संवर्धन, शोध एवं नवाचार में सहयोग तथा प्रशिक्षण और आदान–प्रदान कार्यक्रमों को बढ़ावा देना है।
इस समझौते के अंतर्गत दोनों संस्थान मिलकर शैक्षणिक एवं शोध परियोजनाओं पर कार्य करेंगे। साथ ही सेमिनार, वर्कशॉप, प्रशिक्षण कार्यक्रम, कर्मचारी–विद्यार्थी एवं प्रशिक्षु आदान–प्रदान तथा बेस्ट प्रैक्टिस साझा करने जैसे विषयों पर संयुक्त पहल की जाएगी।
शिक्षा और संस्कृति के समन्वय पर जोर
एमओयू कार्यक्रम में आईसीएसएस भारत प्रमुख संदीप कवीश्वर ने कहा कि यह समझौता शिक्षा और संस्कृति के समन्वय का सशक्त माध्यम बनेगा। आईसीएसएस भारतीय सनातन परंपरा के संरक्षण और वैश्विक स्तर पर उसके प्रसार के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। इस साझेदारी से विद्यार्थियों को व्यावहारिक और शोध आधारित नए अवसर मिलेंगे।
आईसीएसएस के सचिव अमर जीव लोचन ने कहा कि डॉ. सीवी रमन विश्वविद्यालय आईसीएसएस के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा और विश्वविद्यालय इस दिशा में सराहनीय कार्य कर रहा है।
अकादमिक गुणवत्ता को मिलेगी नई गति
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रदीप कुमार घोष ने कहा कि विश्वविद्यालय नवाचार और शोध को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयासरत है। यह एमओयू अकादमिक गुणवत्ता और संस्थागत सहयोग को नई दिशा देगा, जिससे विद्यार्थियों और शोधार्थियों को राष्ट्रीय स्तर पर सीखने और आगे बढ़ने के अवसर प्राप्त होंगे।
कुलसचिव अरविंद कुमार तिवारी ने कहा कि यह समझौता प्रशासनिक और शैक्षणिक समन्वय को मजबूत करेगा। डॉ. सीवी रमन विश्वविद्यालय लोक कला, संस्कृति, साहित्य और भाषा को वैश्विक मंच पर स्थापित करने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है और यह पहल शैक्षणिक उत्कृष्टता को और सुदृढ़ करेगी।
शोध और ग्रामीण प्रौद्योगिकी में सहयोग
आईसीएसएस समन्वयक रामकृष्ण प्रधान ने कहा कि अकादमिक संवाद और शोध सहयोग समय की आवश्यकता है। इस एमओयू से दोनों संस्थानों के बीच ज्ञान और संसाधनों का आदान–प्रदान बढ़ेगा।
ग्रामीण प्रौद्योगिकी विभाग के प्रमुख अनुपम तिवारी ने कहा कि ग्रामीण प्रौद्योगिकी और परंपरागत ज्ञान के क्षेत्र में यह सहयोग नई संभावनाओं के द्वार खोलेगा। प्रशिक्षण और एक्सचेंज कार्यक्रमों से विद्यार्थियों को व्यावहारिक अनुभव प्राप्त होगा।
इस एमओयू के माध्यम से दोनों संस्थान शिक्षा, शोध और संस्कृति के क्षेत्र में मिलकर कार्य करते हुए राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान को और मजबूत करेंगे।

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