सीमेकॉन (CIMECON) 2026 के प्री-कॉन्फ्रेंस वर्कशॉप एवं वैज्ञानिक सत्र का शुभारंभ

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• “हेल्दी माइन्स” भविष्य की चुनौतियों से निपटने का सामूहिक संकल्प

बिलासपुर। साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) की मेजबानी में आयोजित की जा रही कोल इंडिया मेडिकल कॉन्फ्रेंस CIMECON 2026 के अंतर्गत शुक्रवार को प्री-कॉन्फ्रेंस वर्कशॉप एवं वैज्ञानिक सत्र का विधिवत शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बिरंची दास, निदेशक (मानव संसाधन), एसईसीएल ने सत्रों का उद्घाटन किया।

अपने उद्घाटन संबोधन में बिरंची दास ने कहा कि “हेल्दी माइन्स” केवल एक थीम नहीं, बल्कि आने वाले समय की चुनौतियों का सामना करने के लिए की जा रही सामूहिक तैयारी और प्रतिबद्धता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि भविष्य में एक स्वस्थ, सक्षम और सजग कार्यबल ही किसी भी संगठन की सबसे बड़ी शक्ति होगा। इसी दृष्टिकोण से व्यावसायिक स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सशक्त करना, खदान क्षेत्रों में कार्यरत श्रमिकों की नियमित स्वास्थ्य जांच, समयबद्ध निदान तथा उन्नत चिकित्सा पद्धतियों का प्रभावी उपयोग अत्यंत आवश्यक है।

उन्होंने चिकित्सा क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और रोबोटिक्स जैसी आधुनिक तकनीकों की बढ़ती भूमिका पर भी प्रकाश डालते हुए कहा कि आने वाले वर्षों में ये तकनीकें स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सटीक, त्वरित और प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

इस अवसर पर डॉ. श्रुतिदेव मिश्रा, चिकित्सा सेवा प्रमुख, एसईसीएल, डॉ. कल्याण सरकार, चिकित्सा सेवा प्रमुख, सोहागपुर क्षेत्र, डॉ. अरिहंत जैन, उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी, आईवीएचसी (इंदिरा विहार), एसईसीएल सहित कोल इंडिया की विभिन्न अनुषंगी कंपनियों एवं देश के प्रतिष्ठित अस्पतालों से आए चिकित्सा अधिकारी उपस्थित रहे।

ऑक्यूपेशनल हेल्थ पर केंद्रित प्रथम वैज्ञानिक सत्र

कार्यक्रम के प्रथम वैज्ञानिक सत्र में ऑक्यूपेशनल हेल्थ विषय पर कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें स्पाइरोमेट्री, चेस्ट एक्स-रे, आईएलओ रेडियोग्राफ्स, न्यूमोकोनियोसिस तथा आईएमई और पीएमई से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। खदान क्षेत्रों में प्रचलित श्वसन संबंधी रोगों की पहचान, रोकथाम और प्रभावी प्रबंधन पर विशेष जोर दिया गया।



हृदय रोगों पर द्वितीय वैज्ञानिक सत्र

द्वितीय वैज्ञानिक सत्र में इस्केमिक हृदय रोग में ईसीजी की भूमिका पर केंद्रित कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें हृदय रोगों के शीघ्र निदान और उपचार में ईसीजी की उपयोगिता को व्यावहारिक उदाहरणों एवं केस-आधारित चर्चाओं के माध्यम से स्पष्ट किया गया, जिससे चिकित्सकों को व्यवहारिक मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।

डीएनबी सत्र में युवा चिकित्सकों की प्रस्तुतियाँ

दोपहर बाद आयोजित डीएनबी सत्र में युवा चिकित्सकों द्वारा जटिल चिकित्सीय विषयों पर केस प्रस्तुतियाँ दी गईं। इनमें कोयला खनिकों में हेमोप्टाइसिस के कारणों की समीक्षा, युवा वयस्कों में हाइपरट्रॉफिक ऑब्स्ट्रक्टिव कार्डियोमायोपैथी तथा हाइपरऑस्मोलर हाइपरग्लाइसेमिक नॉन-कीटोटिक अवस्था जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल रहे। प्रस्तुतियों का मूल्यांकन निर्णायक मंडल द्वारा किया गया।

उल्लेखनीय है कि सीमेकॉन 2026 में कोल इंडिया एवं उसकी सहायक कंपनियों सहित देश के विभिन्न प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों के 250 से अधिक चिकित्सक भाग ले रहे हैं। सम्मेलन का पहला दिन ज्ञानवर्धक चर्चाओं और सार्थक विमर्श के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ, जिसने आगामी सत्रों के लिए एक मजबूत आधार तैयार किया।

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