उद्योगों में रोजगार आंकड़ों पर सवाल: सरकार बोली– नियमों के तहत ही दिया जाता है अनुदान
ध्यानाकर्षण सूचना पर जवाब; कहा– उद्योग नीति का पालन, स्थानीय युवाओं को रोजगार देना अनिवार्य
रायपुर । विधानसभा में ध्यानाकर्षण सूचना क्रमांक 128 के तहत प्रदेश में स्थापित कारखानों में उद्योग नीति के उल्लंघन और रोजगार आंकड़ों में कथित गड़बड़ी का मुद्दा उठाया गया। इस पर सरकार ने विस्तृत जवाब देते हुए कहा कि प्रदेश में उद्योग नीति के प्रावधानों के अनुसार ही उद्योगों को प्रोत्साहन दिया जाता है और रोजगार से जुड़े नियमों का पालन कराया जाता है।
सरकार की ओर से बताया गया कि उद्योगों को पूंजी निवेश अनुदान, ब्याज अनुदान और भूमि किराया (भू-भाटक) में छूट जैसी कई प्रोत्साहन योजनाएं दी जाती हैं। इसके बदले उद्योगों को अपने कारखानों में स्थानीय लोगों को रोजगार देने की शर्त का पालन करना होता है।
क्या है उद्योग नीति का प्रावधान
विधानसभा में दी गई जानकारी के अनुसार—
- जिन उद्योगों को स्थायी पूंजी निवेश के आधार पर प्रोत्साहन दिया जाता है, उन्हें स्थानीय युवाओं को रोजगार देना अनिवार्य होता है।
- उद्योगों को स्थानीय श्रमिकों को न्यूनतम 5% रोजगार देना होता है।
- यह शर्त उद्योग स्थापना के 6 वर्षों तक लागू रहती है।
- उद्योग विभाग द्वारा समय-समय पर इसकी जांच और निरीक्षण किया जाता है।
रोजगार के आंकड़ों को लेकर उठे सवाल
ध्यानाकर्षण सूचना में यह मुद्दा उठाया गया कि कुछ उद्योग रोजगार के आंकड़े बढ़ाकर प्रस्तुत करते हैं और उसी आधार पर अनुदान प्राप्त कर लेते हैं।
सरकार ने कहा कि अनुदान देने से पहले उद्योगों द्वारा दी गई जानकारी का दस्तावेजों और रिपोर्ट के आधार पर सत्यापन किया जाता है। इसके अलावा विभागीय अधिकारी समय-समय पर निरीक्षण भी करते हैं।
सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी
सरकार ने बताया कि उद्योगों में श्रमिकों की सुरक्षा और स्वास्थ्य की निगरानी के लिए औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग काम करता है।
प्रदेश के कई प्रमुख औद्योगिक जिलों में इस विभाग के कार्यालय संचालित हैं।
प्रमुख औद्योगिक जिले
- रायपुर
- दुर्ग
- बिलासपुर
- रायगढ़
- कोरबा
- राजनांदगांव
इन जिलों में कारखानों की सुरक्षा, स्वास्थ्य मानकों और श्रम नियमों के पालन की निगरानी की जाती है।
फैक्ट फाइल
- ध्यानाकर्षण सूचना क्रमांक : 128
- मुद्दा : कारखानों में उद्योग नीति का उल्लंघन
- स्थानीय रोजगार अनिवार्यता : कम से कम 5%
- लागू अवधि : उद्योग स्थापना के 6 वर्ष तक
- निगरानी विभाग : औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग
विभागीय टीप
विभाग ने अपने स्पष्टीकरण में कहा कि यह कहना सही नहीं है कि प्रदेश में स्थापित कारखानों में उद्योग नीति का पालन नहीं हो रहा है। उद्योगों को दिए जाने वाले अनुदान की नियमित जांच, निरीक्षण और दस्तावेजी सत्यापन किया जाता है।
यदि किसी उद्योग द्वारा नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो उसके खिलाफ विधिक कार्रवाई भी की जाती है।
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