प्रशासनिक निर्देश बेअसर, मुंगेली में फिर तेज आवाज में बजने लगे डीजे

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शादी सीजन में देर रात तक ध्वनि प्रदूषण से लोग परेशान, नियमों के सख्ती से पालन की मांग

मुंगेली। नगर सहित आसपास के ग्रामीण अंचलों में ध्वनि प्रदूषण और कोलाहल नियंत्रण को लेकर प्रशासन द्वारा जारी निर्देश अब बेअसर होते नजर आ रहे हैं। कुछ समय तक नियमों का पालन करने के बाद डीजे संचालक फिर से अपनी मनमानी पर उतर आए हैं। शादी-विवाह के सीजन में शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक देर रात तक तेज आवाज में डीजे बजाए जा रहे हैं, जिससे आम लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

दरअसल, प्रशासन ने कुछ समय पहले ध्वनि प्रदूषण और कोलाहल नियंत्रण को लेकर सख्त निर्देश जारी किए थे। आदेश के तहत निर्धारित समय सीमा के बाद तेज आवाज में डीजे और साउंड सिस्टम बजाने पर प्रतिबंध लगाया गया था। इसके अलावा डीजे संचालकों को ध्वनि स्तर निर्धारित सीमा में रखने और अनुमति लेकर ही साउंड सिस्टम का उपयोग करने की हिदायत दी गई थी। शुरुआती दिनों में पुलिस और प्रशासन की सख्ती के कारण इन आदेशों का पालन होता भी दिखाई दिया, लेकिन अब हालात फिर पहले जैसे हो गए हैं।

शादी समारोह और बारात में तेज आवाज का चलन

नगर के कई वार्डों के साथ-साथ ग्रामीण अंचलों में इन दिनों शादी समारोह और बारात के दौरान डीजे का चलन तेजी से बढ़ गया है। बारात निकलते समय डीजे संचालक तेज बेस और उच्च ध्वनि स्तर के साथ संगीत बजा रहे हैं। कई जगहों पर देर रात तक डीजे बजने की शिकायतें सामने आ रही हैं। इससे आसपास रहने वाले लोगों को रात भर शोर-शराबे का सामना करना पड़ रहा है।

बुजुर्गों, बच्चों और विद्यार्थियों को हो रही परेशानी

देर रात तक चलने वाले डीजे से आसपास रहने वाले बुजुर्गों, छोटे बच्चों और मरीजों को विशेष रूप से परेशानी हो रही है। वहीं बोर्ड परीक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है। कई लोगों ने बताया कि तेज ध्वनि के कारण रात में आराम करना भी मुश्किल हो जाता है।

ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण के लिए बने हैं स्पष्ट नियम

ध्वनि प्रदूषण (विनियमन एवं नियंत्रण) नियम 2000 के तहत रात्रि 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर और डीजे बजाने पर प्रतिबंध है। केवल विशेष परिस्थितियों में प्रशासन से अनुमति लेने पर सीमित समय के लिए छूट दी जा सकती है।
नियमों के अनुसार आवासीय क्षेत्रों में दिन के समय अधिकतम 55 डेसिबल और रात में 45 डेसिबल तक ही ध्वनि स्तर की अनुमति है। इसके अलावा अस्पताल, शैक्षणिक संस्थान और न्यायालय के 100 मीटर के दायरे को साइलेंस जोन घोषित किया गया है, जहां तेज ध्वनि वाले उपकरणों का उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित रहता है।

नियम तोड़ने वालों पर हो सकती है सख्त कार्रवाई

ध्वनि प्रदूषण के नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ पुलिस द्वारा भारतीय दंड संहिता की धारा 188 के तहत कार्रवाई की जा सकती है। इसके अलावा डीजे उपकरण जब्त करने, जुर्माना लगाने और आयोजन की अनुमति रद्द करने का भी प्रावधान है। बार-बार नियमों का उल्लंघन करने पर संबंधित संचालक के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।

स्थानीय लोगों ने की प्रशासन से कार्रवाई की मांग

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि प्रशासन समय-समय पर सख्ती नहीं करेगा तो डीजे संचालकों की मनमानी लगातार बढ़ती जाएगी। लोगों ने मांग की है कि रात में गश्त बढ़ाई जाए और नियमों का उल्लंघन करने वाले डीजे संचालकों पर तत्काल कार्रवाई की जाए।

लोगों का कहना है कि शादी और सामाजिक कार्यक्रमों में खुशियां मनाना जरूरी है, लेकिन इसके साथ ही ध्वनि प्रदूषण के नियमों का पालन करना भी उतना ही आवश्यक है। नागरिकों ने प्रशासन से अपेक्षा जताई है कि कोलाहल नियंत्रण के नियमों को सख्ती से लागू कर लोगों को ध्वनि प्रदूषण से राहत दिलाई जाए।

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