वनांचल में मातृत्व सुरक्षा की नई पहल, आसान हुई ममता की राह
• सोनोग्राफी शिविरों से 976 गर्भवती महिलाओं को मिला लाभ
• दुर्गम पहाड़ों में पहुंच रही आधुनिक स्वास्थ्य सुविधा
रिपोर्टर✒️कमलेश सिंह
कवर्धा । छत्तीसगढ़ के वनांचल और दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाली गर्भवती महिलाओं के लिए कभी सोनोग्राफी जैसी आधुनिक जांच के लिए शहर की लंबी और थकाऊ यात्रा एक बड़ी चुनौती थी। लेकिन आज कबीरधाम जिले के सुदूर इलाकों में ममता की राह आसान हो रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की मंशा के अनुरूप, स्वास्थ्य विभाग की इस पहल ने सुरक्षित मातृत्व की दिशा में एक नई कहानी लिख रही है। समय पर सोनोग्राफी जांच और विशेषज्ञों के परामर्श की सुविधा मिलने से गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य की बेहतर निगरानी संभव हो रही है।
पिछले दो वर्षों में जिले के दुर्गम क्षेत्रों में विशेष स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन कर 976 गर्भवती महिलाओं की सोनोग्राफी जांच की गई है। यह केवल एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि उन 976 परिवारों की मुस्कान है जिन्हें अब अपने घर के पास ही विशेषज्ञ सुविधा मिल रही है। यह सुविधा न केवल मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य की नियमित निगरानी को संभव बना रही है, बल्कि सुरक्षित प्रसव की दिशा में एक बड़ा और सकारात्मक बदलाव लेकर आई है।
ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों में अक्सर जानकारी और संसाधनों की कमी के कारण महिलाएं समय पर सोनोग्राफी नहीं करा पाती थीं, जिससे गर्भ में पल रहे बच्चे के विकास की सही जानकारी नहीं मिल पाती थी। शासन की इस विशेष पहल के तहत प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में शिविर लगाए जा रहे हैं, जिससे किसी भी संभावित खतरे की पहचान समय रहते संभव हो पा रही है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र स. लोहरा में सर्वाधिक 203 महिलाओं की जांच की गई। वहीं, दुर्गम क्षेत्रों में स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र रेंगाखार में तीन चरणों में शिविर आयोजित कर 325 महिलाओं को लाभान्वित किया गया।
भौगोलिक दृष्टि से कठिन और दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र होने के बावजूद प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तरेगांव जंगल में 146 महिलाओं की सोनोग्राफी जांच की गई। इसके अतिरिक्त सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पिपरिया में 144, बोड़ला में 92 और चिल्फी जैसे सुदूर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में 66 गर्भवती महिलाओं ने इस आधुनिक सुविधा का लाभ उठाया। स्थानीय स्तर पर इन जांच सुविधाओं की उपलब्धता से अब माताओं में स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति भरोसा बढ़ा है। समय पर जांच और विशेषज्ञों के परामर्श से अब वनांचल की माताओं को इलाज के लिए शहरों की लंबी यात्रा नहीं करनी पड़ रही है, जिससे मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को नियंत्रित करने में एक मजबूत आधार तैयार हुआ है।


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