अवैध प्लाटिंग का जाल: कार्रवाई के नाम पर दिखावा, 30 वर्षों से फलता-फूलता रहा खेल

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रजिस्ट्रियों पर रोक का दावा, पर जमीन पर नहीं दिखी सख्ती; अब टीएनसी के नाम पर प्लॉट बेचने की तैयारी

मुंगेली। मुंगेली जिले में पिछले लगभग तीन दशकों से अवैध प्लाटिंग का मुद्दा समय-समय पर सामने आता रहा है। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा लगातार होती रही है कि इतने लंबे समय तक अवैध कॉलोनियों का विस्तार प्रशासनिक तंत्र की जानकारी के बिना संभव नहीं हो सकता। हर बार जब भी अवैध प्लाटिंग का मामला सामने आया, तब अनुविभागीय अधिकारी स्तर से कार्रवाई की बात जरूर कही गई, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति में कोई बड़ा बदलाव दिखाई नहीं दिया।

जानकारों का कहना है कि कई बार प्लॉट काटने वाले गिरोहों और भू-माफियाओं पर कार्रवाई की खबरें मीडिया में प्रमुखता से आईं, लेकिन उसके बाद भी अवैध प्लाटिंग का सिलसिला जारी रहा। राजस्व टीम की कार्रवाई और पिछले एक वर्ष तक बड़ी संख्या में हुई रजिस्ट्रियों को देखते हुए भी यह सवाल उठ रहा है कि यदि वास्तव में सख्ती की गई थी तो फिर अवैध कॉलोनियों का विस्तार कैसे होता रहा।

स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन की ओर से कई बार यह कहा गया कि अवैध कॉलोनाइजरों के खिलाफ कार्रवाई की गई है और रजिस्ट्रियों पर रोक लगाई गई है। लेकिन अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर कितनी अवैध कॉलोनियों की रजिस्ट्रियां शून्य की गईं। क्या किसी कॉलोनाइजर के कार्यालय को सील किया गया या उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कराया गया? इन सवालों के जवाब तलाशने पर जमीनी हकीकत कुछ अलग ही दिखाई देती है।

बताया जाता है कि वर्षों से अवैध कॉलोनाइजरों के खिलाफ कार्रवाई की घोषणाएं तो होती रहीं, लेकिन इसके बावजूद न तो टीएनसी और न ही रेरा के नियमों के अनुरूप कॉलोनियों का विकास हो पाया। नतीजतन शहर के आसपास बड़ी संख्या में ऐसी बस्तियां विकसित हो गईं, जो किसी भी नियमानुसार स्वीकृत कॉलोनी की श्रेणी में नहीं आतीं।

स्थिति यह है कि मुंगेली नगर पालिका क्षेत्र में लगभग 75 से 80 प्रतिशत बसाहट ऐसी बताई जाती है, जो कभी न कभी अवैध प्लाटिंग के माध्यम से विकसित हुई। अब इन क्षेत्रों में रहने वाले लोग बिजली, पानी, सड़क और अन्य मूलभूत सुविधाओं की मांग कर रहे हैं, जिससे नगर पालिका पर अतिरिक्त दबाव बनता जा रहा है। हालांकि वर्तमान में नगर पालिका में सत्ता समीकरण अलग होने के कारण इन मांगों पर निर्णय लेना आसान नहीं हो पा रहा है, लेकिन अवैध कॉलोनियों में रहने वाले लोगों द्वारा सुविधाओं की मांग लगातार उठाई जा रही है।

इधर यह भी चर्चा है कि प्लॉट काटने वाले गिरोह अब नई रणनीति के तहत टीएनसी की शरण लेने की कोशिश कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि प्रशासनिक स्तर पर पहले जैसी सक्रियता नहीं होने के कारण कुछ कॉलोनाइजर अब टीएनसी से स्वीकृत कॉलोनियों के नाम पर प्लॉट बेचने की तैयारी में हैं। यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई तो फिर से बड़ी संख्या में लोगों को भ्रमित कर प्लॉट बेचने की आशंका जताई जा रही है।

स्थानीय जानकारों का मानना है कि यदि अवैध प्लाटिंग के मामलों में शुरुआती स्तर पर ही सख्ती दिखाई जाती और संबंधित विभागों को वास्तविक स्थिति से अवगत कराया जाता, तो शायद यह समस्या इतनी व्यापक नहीं बनती।

नजरी नक्शा को लेकर भी उठे सवाल
इधर मुंगेली तहसील कार्यालय की कार्यप्रणाली को लेकर भी चर्चा तेज है। बताया जा रहा है कि जहां राज्य सरकार ने कैबिनेट के निर्णय के तहत बी-1 के आधार पर रजिस्ट्री और नामांतरण की प्रक्रिया को सरल बनाने का फैसला किया है, वहीं मुंगेली में अभी भी पटवारी से नजरी नक्शा बनवाने की बाध्यता बताई जा रही है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि बिना नजरी नक्शा बनवाए रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी करना कठिन बताया जाता है, जिससे आम लोगों को अतिरिक्त आर्थिक बोझ उठाना पड़ रहा है। इस मामले में तहसील स्तर से लेकर जिला प्रशासन तक कई बार शिकायतें पहुंचने की बात भी कही जा रही है।

इन सब परिस्थितियों के बीच सवाल यह उठ रहा है कि जब राज्य स्तर पर प्रक्रियाओं को सरल बनाने के लिए स्पष्ट निर्णय लिए जा चुके हैं, तो फिर मुंगेली जिले में अलग व्यवस्था क्यों दिखाई दे रही है। अब लोगों की नजर इस बात पर टिकी है कि प्रशासन इन मामलों को लेकर क्या कदम उठाता है और अवैध प्लाटिंग से जुड़े विवादों पर किस प्रकार स्पष्टता लाता है।

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