मुंगेली में बढ़ती गर्मी के साथ जार वाले पानी का कारोबार तेज, शुद्धता पर उठ रहे सवाल

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मुंगेली। मार्च महीने की शुरुआत के साथ ही जिले में गर्मी ने धीरे-धीरे दस्तक देना शुरू कर दिया है। तापमान में लगातार बढ़ोतरी के साथ लोगों की प्यास भी बढ़ने लगी है और ऐसे में शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक पैकेज्ड पानी की मांग तेजी से बढ़ती नजर आ रही है। घरों, दुकानों, कार्यालयों, शादी-समारोहों और विभिन्न आयोजनों में 20 लीटर के जार वाले पानी का उपयोग इन दिनों आम हो गया है।

हालांकि बढ़ती मांग के साथ-साथ जार वाले पानी की शुद्धता और गुणवत्ता को लेकर भी कई सवाल खड़े होने लगे हैं। कई उपभोक्ताओं का कहना है कि बाजार में बड़ी संख्या में ऐसे छोटे प्लांट और स्थानीय सप्लायर सक्रिय हैं, जो बिना निर्धारित मानकों का पालन किए पानी की आपूर्ति कर रहे हैं। ऐसे में लोगों के स्वास्थ्य पर खतरा मंडराने की आशंका भी बढ़ गई है।

बढ़ती गर्मी के साथ बढ़ा पैकेज्ड पानी का कारोबार

मार्च के पहले सप्ताह से ही तापमान में धीरे-धीरे इजाफा होने लगा है। गर्मी बढ़ते ही लोगों को ठंडे और साफ पानी की जरूरत ज्यादा महसूस होने लगती है। इसी कारण शहर के अधिकांश घरों और संस्थानों में 20 लीटर के जार वाले पानी की खपत बढ़ गई है।

स्थानीय बाजार में कई कंपनियों और निजी प्लांटों द्वारा जार में पानी की सप्लाई की जा रही है। कई स्थानों पर डिब्बाबंद पानी और छोटे पाउच भी बिक रहे हैं, लेकिन सबसे ज्यादा मांग 20 लीटर के जार की देखी जा रही है। दुकानदारों का कहना है कि गर्मी बढ़ने के साथ-साथ आने वाले दिनों में इसकी मांग और बढ़ सकती है।

बिना मानकों के सप्लाई की आशंका

बढ़ती मांग के बीच यह भी चर्चा है कि कुछ पानी सप्लायर गुणवत्ता के निर्धारित नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। कई बार ऐसे मामले सामने आए हैं जहां बिना पर्याप्त फिल्टरिंग और शुद्धिकरण के ही पानी जार में भरकर बाजार में भेज दिया जाता है।

स्थानीय स्तर पर संचालित कुछ छोटे प्लांटों में स्वच्छता और गुणवत्ता नियंत्रण को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं। यदि ऐसे पानी का सेवन लगातार किया जाए तो यह लोगों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।

दूषित पानी से बीमारियों का खतरा

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यदि पैकेज्ड पानी को सही प्रक्रिया से तैयार नहीं किया जाए तो उसमें बैक्टीरिया और अन्य हानिकारक तत्व पनप सकते हैं। दूषित पानी पीने से पेट दर्द, उल्टी-दस्त, संक्रमण और अन्य जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

विशेषज्ञों के अनुसार पानी को फिल्टर, आरओ और अन्य शुद्धिकरण प्रक्रियाओं से गुजरने के बाद ही जार में भरना चाहिए। इसके अलावा जार की नियमित धुलाई और सैनिटाइजेशन भी जरूरी है।

जार की सफाई और सीलिंग भी महत्वपूर्ण

पानी के जार अक्सर बार-बार उपयोग में लाए जाते हैं। यदि इन्हें सही तरीके से साफ नहीं किया जाए तो उनमें बैक्टीरिया पनपने की संभावना बनी रहती है। यही कारण है कि पानी भरने से पहले जार को अच्छी तरह धोना और सैनिटाइज करना आवश्यक माना जाता है।

इसके साथ ही जार को ठीक तरीके से सील करना भी जरूरी है, ताकि बाहर की धूल-मिट्टी या अन्य गंदगी पानी में न पहुंच सके।

नियमों के पालन पर उठते सवाल

पैकेज्ड पेयजल का कारोबार करने के लिए संबंधित विभाग से अनुमति और गुणवत्ता प्रमाणन आवश्यक होता है। लेकिन जानकारों का कहना है कि कई छोटे स्तर के सप्लायर इन नियमों का पूरी तरह पालन नहीं करते।

ऐसे में उपभोक्ताओं के बीच पानी की गुणवत्ता को लेकर असमंजस की स्थिति बनी रहती है। लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन द्वारा समय-समय पर जांच और निगरानी की जाए तो इस तरह की लापरवाही पर रोक लगाई जा सकती है।

उपभोक्ताओं को भी रहना होगा सतर्क

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने उपभोक्ताओं को भी सावधानी बरतने की सलाह दी है। पानी खरीदते समय जार की सील, उसकी साफ-सफाई, ब्रांड और निर्माण तिथि की जांच जरूर करनी चाहिए। यदि जार गंदा, टूटा-फूटा या बिना सील का हो तो उसका उपयोग करने से बचना चाहिए।

सुरक्षित पेयजल सुनिश्चित करना जरूरी

गर्मी के मौसम में स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल का उपयोग बेहद आवश्यक है। ऐसे में प्रशासन, पानी विक्रेताओं और उपभोक्ताओं – तीनों की जिम्मेदारी बनती है कि पानी की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाए।

यदि समय रहते इस दिशा में सख्ती और जागरूकता नहीं बढ़ाई गई तो बढ़ती गर्मी के बीच लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना एक बड़ी चुनौती बन सकता है।

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