ग्राम हरदीकला में प्रक्षेत्र दिवस आयोजित, 65 किसानों ने सीखी उन्नत खेती की तकनीक

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रिपोर्टर ✒️ रूपचंद रॉय
कृषि वैज्ञानिकों ने गेहूं की उन्नत किस्म, कीट-रोग प्रबंधन व नैनो उर्वरक के उपयोग की दी जानकारी

बिलासपुर। कृषि विज्ञान केंद्र, हरदीकला टोना (विकासखंड–बिल्हा) में किसानों को उन्नत कृषि तकनीकों की जानकारी देने के उद्देश्य से प्रक्षेत्र दिवस का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में क्षेत्र के 65 किसानों ने भाग लेकर वैज्ञानिकों से आधुनिक खेती की तकनीकों की जानकारी प्राप्त की।

कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र बिलासपुर के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. गीत शर्मा ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर किसान कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने उन्नत बीज, संतुलित उर्वरक प्रबंधन तथा वैज्ञानिक पद्धति से खेती करने के महत्व पर प्रकाश डाला।

सरपंच सरिता साहू ने कहा कि गांव में गेहूं का अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन लिया गया है, जो किसानों के लिए काफी लाभकारी साबित हो रहा है।

इस अवसर पर डॉ. शिल्पा कौशिक ने किसानों को गेहूं की उन्नत किस्म पूसा तेजस सहित अन्य प्रजातियों, उचित बीज दर, संतुलित पोषण प्रबंधन तथा फसल उत्पादन बढ़ाने की वैज्ञानिक तकनीकों के बारे में जानकारी दी।
पौध रोग विशेषज्ञ जयंत साहू ने गेहूं फसल में लगने वाले प्रमुख रोगों की पहचान, उनके लक्षण और समन्वित रोग प्रबंधन के उपाय बताए।
वहीं कीट विशेषज्ञ डॉ. एकता ताम्रकार ने फसलों में लगने वाले प्रमुख कीटों की पहचान तथा समन्वित कीट प्रबंधन के माध्यम से उनके नियंत्रण के उपायों की जानकारी दी।

कृषि प्रसंस्करण एवं खाद्य अभियांत्रिकी इंजीनियर पंकज मिंज ने किसानों को आधुनिक कृषि यंत्रों, जल प्रबंधन तकनीकों तथा कृषि यंत्रीकरण के लाभों से अवगत कराया।

कार्यक्रम में आर.एस. गौतम, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी (विकासखंड–बिल्हा) भी उपस्थित रहे। उन्होंने किसानों को शासन की विभिन्न कृषि योजनाओं की जानकारी देते हुए उनका अधिक से अधिक लाभ लेने के लिए प्रेरित किया।

इस दौरान आर.के.एस. राठौर, राज्य विपणन प्रबंधक इफको छत्तीसगढ़ ने किसानों को नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के उपयोग व उनके लाभों के बारे में बताया। वहीं नवीन कुमार तिवारी, उप क्षेत्रीय प्रबंधक इफको ने कहा कि नैनो उर्वरकों के उपयोग से उर्वरक की दक्षता बढ़ती है, लागत कम होती है और पर्यावरण पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

कार्यक्रम के दौरान किसानों को खेत में लगाए गए गेहूं की उन्नत किस्म पूसा तेजस के प्रदर्शन प्लॉट का अवलोकन भी कराया गया, जिससे उन्हें नई तकनीकों को व्यवहारिक रूप से समझने का अवसर मिला। इस अवसर पर आर.के.एस. राठौर, जयंत कौशिक एवं भानु कौशिक (एसएफए, इफको बिलासपुर) का भी सराहनीय योगदान रहा। अंत में सभी कृषकों का आभार व्यक्त किया गया।

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