एसएनजी कॉलेज में DMF फंड के कामों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप, 18 माह बाद भी कार्रवाई नहीं
मुंगेली। जिले के प्रतिष्ठित एसएनजी कॉलेज में जिला खनिज संस्थान न्यास (DMF) मद से कराए गए निर्माण कार्यों में भारी अनियमितता और भ्रष्टाचार के आरोप सामने आने के बाद भी अब तक ठोस कार्रवाई नहीं होना प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। हैरानी की बात यह है कि शिकायत के डेढ़ वर्ष बीत जाने के बाद भी मामला केवल पत्राचार तक सीमित रह गया है।
कलेक्टर के निर्देश भी बेअसर, PWD की कार्यशैली पर सवाल
जानकारी के अनुसार मुंगेली निवासी अधिवक्ता स्वतंत्र तिवारी द्वारा 17 सितंबर 2024 को कलेक्टर से शिकायत कर कॉलेज में हुए निर्माण कार्यों की जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की गई थी। इसके बाद कलेक्टर कार्यालय से लोक निर्माण विभाग (PWD) को तीन बार जांच के निर्देश दिए गए, लेकिन अब तक विभाग की ओर से कोई ठोस रिपोर्ट सामने नहीं आई है। इससे विभागीय निष्क्रियता या दबाव की आशंका भी जताई जा रही है।
करीब 30 लाख के कार्यों में अनियमितता का आरोप
एसएनजी कॉलेज परिसर में DMF फंड से लगभग 14.90 लाख रुपए की लागत से जीर्णोद्धार कार्य, 13 लाख रुपए की लागत से चैनलिंग फेंसिंग और गार्डन निर्माण कराया गया था। इसके अलावा करीब 5 लाख रुपए की लागत से ओपन जिम भी स्थापित किया गया। लेकिन कार्य पूर्ण होते ही कुछ ही महीनों में निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे।
बताया जा रहा है कि चबूतरों की टाइल्स उखड़ने लगीं, चेकर ब्लॉक्स टूट गए और कई संरचनाएं जर्जर स्थिति में पहुंच गईं। इसके बावजूद संबंधित अधिकारियों द्वारा उपयोगिता और गुणवत्ता प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया, जो संदेह को और गहरा करता है।
जिम्मेदारों की भूमिका पर उठे सवाल
निर्माण कार्यों में अनियमितता के बावजूद प्रमाण पत्र जारी करना कई अधिकारियों की भूमिका पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है। इसमें ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के अनुविभागीय अधिकारी, जनपद पंचायत के उपयंत्री तथा ग्राम पंचायत लिलवाकापा के सरपंच-सचिव के हस्ताक्षर भी शामिल बताए जा रहे हैं।
जांच के नाम पर सिर्फ पत्राचार
कलेक्टर कार्यालय द्वारा 26 सितंबर 2024, 2 जनवरी 2025 और 22 जुलाई 2025 को PWD को जांच के लिए पत्र भेजे गए, लेकिन विभाग की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई या जांच रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई है। इससे यह सवाल उठ रहा है कि आखिर जांच में देरी क्यों हो रही है? क्या मामला दबाने का प्रयास किया जा रहा है या जिम्मेदारों को संरक्षण मिल रहा है?
पहले भ्रष्टाचार, अब फिर 50 लाख का नया कार्य
एक ओर पुराने कार्यों में भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच लंबित है, वहीं दूसरी ओर उपमुख्यमंत्री द्वारा कॉलेज के मरम्मत एवं रंगरोगन के लिए 50 लाख रुपए की नई राशि स्वीकृत की गई है। ऐसे में यह आशंका जताई जा रही है कि यदि पुराने मामलों की जांच नहीं हुई, तो नए कार्यों में भी पारदर्शिता पर सवाल उठ सकते हैं।
जनता और छात्रों में आक्रोश
इस पूरे मामले को लेकर छात्रों और शहरवासियों में भारी नाराजगी है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते दोषियों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो यह भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने जैसा होगा। साथ ही उन्होंने मांग की है कि दोषी अधिकारियों से राशि की रिकवरी कर उसी से गुणवत्तापूर्ण कार्य दोबारा कराया जाए।
प्रशासन की चुप्पी से बढ़ा अविश्वास
यह मामला केवल एक कॉलेज तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र की जवाबदेही और पारदर्शिता से जुड़ा हुआ है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर कब तक मौन रहता है और कब दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाती है।

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