पटना के लोकभवन में ऐतिहासिक क्षण, सम्राट चौधरी ने ली मुख्यमंत्री पद की शपथ

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बिहार को मिला 24वां मुख्यमंत्री, पहली बार भाजपा नेता के हाथों में सत्ता की कमान

पटना । बिहार की राजनीति में बुधवार सुबह एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया, जब सम्राट चौधरी ने राज्य के 24वें मुख्यमंत्री के रूप में पद एवं गोपनीयता की शपथ ली। राजधानी पटना स्थित लोकभवन में आयोजित समारोह में राज्यपाल सैय्यद अता हसनैन ने उन्हें शपथ दिलाई।

करीब 75 वर्षों के इतिहास में यह पहला अवसर है, जब भारतीय जनता पार्टी का कोई नेता बिहार का मुख्यमंत्री बना है। इस घटनाक्रम को राज्य की राजनीति में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।


दो उपमुख्यमंत्री भी शपथ ग्रहण में शामिल

मुख्यमंत्री के साथ ही विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली। दोनों नेता जनता दल (यूनाइटेड) कोटे से सरकार में शामिल हुए हैं।

हालांकि, नई एनडीए सरकार के गठन के बावजूद मंत्रिमंडल का विस्तार अभी बाकी है। फिलहाल केवल तीन नेताओं ने शपथ ली है और कैबिनेट में 33 मंत्री पद रिक्त हैं, जिन्हें जल्द भरा जाना है।


शपथ ग्रहण समारोह में जुटीं बड़ी हस्तियां

इस महत्वपूर्ण मौके पर कई प्रमुख राजनीतिक हस्तियां उपस्थित रहीं। इनमें भाजपा के वरिष्ठ नेता जेपी नड्डा, चिराग पासवान और जीतन राम मांझी सहित अन्य नेता शामिल हुए।


नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद बदलाव

इससे पहले लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे नीतीश कुमार ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद सत्ता परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त हुआ।


संघर्ष से शिखर तक का सफर

सम्राट चौधरी का राजनीतिक सफर करीब 26 साल पहले विधायक बनने से शुरू हुआ। महज 9 वर्ष पूर्व भाजपा में शामिल होने वाले चौधरी ने अपनी आक्रामक शैली और संगठनात्मक क्षमता के बल पर तेजी से पहचान बनाई।

वे वर्ष 2024 में उपमुख्यमंत्री बने और 2025 में भाजपा की प्रचंड जीत के बाद दोबारा इस पद की जिम्मेदारी संभाली। अब मुख्यमंत्री के रूप में उनकी भूमिका और भी अहम हो गई है।


नई जिम्मेदारियां, बड़ी चुनौतियां

मुख्यमंत्री बनने के साथ ही सम्राट चौधरी के सामने राज्य प्रशासन को सुचारू रूप से संचालित करने के साथ-साथ एनडीए गठबंधन को एकजुट बनाए रखने की चुनौती होगी।

बिहार में जनसंघ और भाजपा लंबे समय से सक्रिय रहे हैं, लेकिन अब तक मुख्यमंत्री पद सहयोगी दलों के पास ही रहा। ऐसे में भाजपा के नेतृत्व में सरकार का गठन राज्य की राजनीति में एक निर्णायक मोड़ माना जा रहा है।

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