NDPS विवेचना पर रेंज स्तरीय ऑनलाइन कार्यशाला, तकनीकी त्रुटियों पर कड़ा फोकस—अभियोजन मजबूत बनाने की पहल
बिलासपुर । मादक पदार्थों से जुड़े मामलों में विवेचना की गुणवत्ता सुधारने और अभियोजन को मजबूत बनाने के उद्देश्य से बिलासपुर रेंज स्तर पर एक दिवसीय ऑनलाइन कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। यह कार्यशाला राम गोपाल गर्ग, पुलिस महानिरीक्षक बिलासपुर रेंज के निर्देशन में आयोजित की गई, जिसमें रेंज के सभी जिलों से करीब 100 पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारी जुड़े।
कार्यशाला का आयोजन पुलिस महानिरीक्षक कार्यालय के मीटिंग हॉल से किया गया, जहां वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक स्तर से लेकर विवेचक अधिकारियों तक की सक्रिय भागीदारी रही, जिससे यह प्रशिक्षण व्यापक और प्रभावी बना।
विवेचना में छोटी चूक, बड़े केस पर भारी—आईजी गर्ग
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आईजी राम गोपाल गर्ग ने कहा कि NDPS प्रकरणों में विवेचना के दौरान की गई छोटी-छोटी प्रक्रियात्मक त्रुटियां भी अभियोजन को कमजोर कर देती हैं। कई मामलों में देखा गया है कि तकनीकी कमियों के कारण आरोपी न्यायालय से दोषमुक्त हो जाते हैं, जबकि अपराध स्पष्ट होता है।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि विवेचना के प्रत्येक चरण में विधि सम्मत प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित करें और आधुनिक तकनीकों का अधिकाधिक उपयोग करें।
विशेषज्ञ का मार्गदर्शन: हर प्रक्रिया का पालन अनिवार्य
कार्यशाला के मुख्य वक्ता सेवानिवृत्त संयुक्त संचालक अभियोजन माखनलाल पाण्डेय ने NDPS एक्ट के तहत विवेचना की बारीकियों को विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि—
- तलाशी और जप्ती के दौरान संबंधित धाराओं का अक्षरशः पालन किया जाना चाहिए
- जब्त मादक पदार्थों का मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रमाणीकरण अनिवार्य है
- फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी जैसे साक्ष्य केस को मजबूत बनाते हैं
- वर्ष 2022 के नए नियमों के अनुसार सैंपलिंग (नमूनाकरण) किया जाना आवश्यक है
उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि विवेचक केवल जप्ती तक सीमित रह जाता है, तो यह अधूरी जांच मानी जाएगी। मादक पदार्थ के स्रोत (Source) और गंतव्य (Destination) तक की पूरी श्रृंखला को जोड़ना जरूरी है, तभी ड्रग नेटवर्क को प्रभावी ढंग से ध्वस्त किया जा सकता है।
डॉक्यूमेंटेशन और चार्जशीट पर विशेष जोर
कार्यशाला में दस्तावेजीकरण की सटीकता पर भी विशेष बल दिया गया। पंचनामा, नोटिस और जप्ती मेमो तैयार करते समय स्वतंत्र गवाहों की उपस्थिति और समय का सही उल्लेख बेहद महत्वपूर्ण बताया गया।
साथ ही निर्देश दिए गए कि चार्जशीट न्यायालय में प्रस्तुत करने से पहले वरिष्ठ अधिकारियों एवं अभियोजन शाखा द्वारा परीक्षण किया जाए, ताकि किसी प्रकार की कमी न रह जाए।
डिजिटल तकनीक का उपयोग बढ़ाने पर बल
आधुनिक अपराधों को देखते हुए डिजिटल साक्ष्यों के महत्व को भी रेखांकित किया गया। अधिकारियों को बताया गया कि पारंपरिक पुलिसिंग के साथ-साथ तकनीकी संसाधनों और डिजिटल टूल्स का समुचित उपयोग विवेचना को और अधिक मजबूत बना सकता है।
प्रश्नोत्तर सत्र में मिला व्यावहारिक समाधान
कार्यक्रम के अंत में आयोजित प्रश्नोत्तर सत्र में अधिकारियों ने अपने अनुभव साझा किए और विवेचना के दौरान आने वाली व्यावहारिक समस्याओं को रखा। विशेषज्ञों द्वारा इन समस्याओं का समाधान किया गया, जिससे प्रशिक्षण और अधिक उपयोगी साबित हुआ।
सम्मान और समापन
कार्यशाला के सफल आयोजन के लिए आईजी राम गोपाल गर्ग ने प्रशिक्षक माखनलाल पाण्डेय को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम का समापन उप पुलिस अधीक्षक स्तर के अधिकारी द्वारा किया गया।
उद्देश्य स्पष्ट—दोषियों को सजा, त्रुटियों पर रोक
इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य NDPS प्रकरणों में विवेचना के दौरान होने वाली तकनीकी एवं प्रक्रियात्मक त्रुटियों को दूर करना है, ताकि आरोपी इन कमियों का फायदा उठाकर न्यायालय से बच न सकें।
पुलिस विभाग को उम्मीद है कि इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रमों से विवेचना की गुणवत्ता में सुधार आएगा और मादक पदार्थों के खिलाफ चल रही मुहिम को और मजबूती मिलेगी।

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