ऑनलाइन गेमिंग की लत ने छात्र को बनाया फरार, कोटा पुलिस ने नागपुर से किया सकुशल बरामद
बिलासपुर/कोटा। थाना कोटा क्षेत्र अंतर्गत डॉ. सी.वी. रमन विश्वविद्यालय के बॉयज हॉस्टल से लापता हुए छात्र को पुलिस ने कड़ी मेहनत और तकनीकी जांच के आधार पर नागपुर से सकुशल बरामद कर लिया है। यह मामला गुम इंसान क्रमांक 29/2026 के तहत दर्ज किया गया था, जिसकी जांच में पुलिस को कई राज्यों तक भटकना पड़ा, तब जाकर सफलता हाथ लगी।
पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार, रोहित कुमार (20 वर्ष), निवासी महावीर कॉलोनी संगम चौक, गया (बिहार), वर्तमान में कोटा स्थित विश्वविद्यालय के छात्रावास में रहकर बी.फार्मेसी चौथे सेमेस्टर की पढ़ाई कर रहा था। दिनांक 6 मार्च 2026 को वह अचानक हॉस्टल से बिना किसी को सूचना दिए लापता हो गया। छात्र के गायब होने से परिजनों और प्रबंधन में हड़कंप मच गया। अगले दिन 7 मार्च को राजा मिश्रा द्वारा थाना कोटा में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर पुलिस ने तत्काल जांच शुरू की। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ग्रामीण एवं अनुविभागीय अधिकारी पुलिस के मार्गदर्शन में टीम गठित कर छात्र की तलाश शुरू की गई। पुलिस ने छात्र के सहपाठियों, हॉस्टल के अन्य विद्यार्थियों से पूछताछ की और उसके मोबाइल की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) तथा बैंक खाते के लेन-देन की जानकारी खंगाली। इसके साथ ही आसपास के सीसीटीवी फुटेज भी खंगाले गए।
तलाश के दौरान पुलिस टीम ने कोटा सहित आसपास के बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और संभावित ठिकानों पर जांच की। इतना ही नहीं, छात्र की खोज में पुलिस टीम दमोह, मथुरा और वृंदावन जैसे शहरों तक पहुंची, लेकिन वहां भी कोई ठोस सुराग नहीं मिला। लगातार प्रयासों के बाद 25 अप्रैल 2026 को तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर यह जानकारी मिली कि रोहित कुमार नागपुर में मौजूद है।
सूचना मिलते ही पुलिस टीम तत्काल नागपुर रवाना हुई और 26 अप्रैल को छात्र को सकुशल बरामद कर लिया गया। उसे कोटा लाकर पूछताछ की गई, जिसमें चौंकाने वाला खुलासा हुआ। रोहित ने बताया कि वह ऑनलाइन गेमिंग की लत में बुरी तरह फंस गया था और उसने कई लोगों से उधार लेकर गेम में पैसे लगाए थे। कर्ज बढ़ने के कारण वह मानसिक दबाव में था और इस बात को अपने पिता को बताने से डर रहा था। इसी डर के चलते उसने हॉस्टल से भागने की योजना बनाई और बिना बताए निकल गया।
पुलिस ने आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद छात्र को उसके परिजनों के सुपुर्द कर दिया है। इस पूरे मामले में थाना कोटा पुलिस और साइबर सेल की सक्रियता सराहनीय रही। कार्रवाई में निरीक्षक नरेश चौहान, उप निरीक्षक गोपाल खांडेकर, आरक्षक धर्मेंद्र साहू, अनिल साहू, जलेश्वर साहू एवं साइबर सेल के आरक्षक प्रशांत राठौर की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
यह घटना युवाओं में बढ़ती ऑनलाइन गेमिंग की लत और उससे जुड़े खतरों की गंभीर तस्वीर सामने लाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि अभिभावकों को बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखने के साथ ही उन्हें सही मार्गदर्शन देना बेहद जरूरी है, ताकि वे इस तरह के जाल में फंसने से बच सकें।

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