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प्रदेश की समृद्ध परंपरा और ज्ञान विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने में सहायक ज्ञान भारतम

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प्राचीन ताड़पत्र पांडुलिपियों का अनमोल खजाना उजागर
कांकेर जिले के कोलर में मिली विरासत की अमूल्य धरोहर
रायपुर । ज्ञान भारतम् राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान के अंतर्गत छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले से एक अत्यंत महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। अंतागढ़ विकासखंड के ग्राम कोलर में सर्वेक्षण दल को प्राचीन और दुर्लभ पांडुलिपियों का अमूल्य संग्रह प्राप्त हुआ है, जो क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक और धार्मिक परंपरा का सजीव प्रमाण है। यह खोज न केवल कांकेर जिले बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है, जो प्रदेश की समृद्ध परंपरा और ज्ञान विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने में सहायक सिद्ध होगी।
          अंतागढ़ विकासखंड के ग्राम कोलर के देहारीपारा में स्वतंत्रता सेनानी चिटु देहारी के यहां ताड़पत्र में सुरक्षित कुल 7 महत्वपूर्ण दस्तावेज मिले हैं। इन पांडुलिपियों में नामरत्न गीता, लक्ष्मी पुराण, देवी भागवत, कृपा सिंधु, कॉग बोली, पांजी संगनेष्ठी तथा भागवत पुराण जैसी धार्मिक एवं साहित्यिक कृतियां शामिल हैं। इन ग्रंथों का संरक्षण ताड़पत्र पर किया जाना न केवल प्राचीन ज्ञान परंपरा को दर्शाता है, बल्कि उस समय की लेखन कला और संरक्षण तकनीक को भी उजागर करता है।
        इसी क्रम में कुशल राम देहारी एवं मंगल राम देहारी के यहां से लरिया भाषा में लिखी गई कुल 5 पांडुलिपियां प्राप्त हुई हैं। इनमें गणेश पुराण, कलंकी कथा, नामरत्ना, ज्योतिषी एवं मृगणी स्तुति जैसी रचनाएं शामिल हैं, जो स्थानीय भाषा और संस्कृति के संरक्षण की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।
        इन पांडुलिपियों का अध्ययन क्षेत्रीय इतिहास, धार्मिक आस्था और लोक परंपराओं को समझने में सहायक सिद्ध होगा। साथ ही यह खोज छत्तीसगढ़ के आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों में छिपी अमूल्य ज्ञान संपदा की ओर भी संकेत करती है। प्रशासन ने इस उपलब्धि को सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम बताया है। साथ ही आम नागरिकों से अपील की है कि यदि उनके पास भी किसी प्रकार की प्राचीन पांडुलिपि या दस्तावेज सुरक्षित हैं, तो वे ज्ञान भारतम ऐप के माध्यम से उसे सूचीबद्ध कराने में सहयोग करें, ताकि इस अमूल्य विरासत को संरक्षित कर आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाया जा सके।

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