रायपुर : अंबिकापुर की साहित्यिक धरोहर ‘उद्गार’ फिर आई प्रकाश में
1965 की दुर्लभ हस्तलिखित पाण्डुलिपि का संरक्षण शुरू
लक्षणधारी मिश्र की अनूठी पहल का जीवंत दस्तावेज
राष्ट्रीय पाण्डुलिपि सर्वेक्षण अभियान के तहत जियो-टैगिंग
भारत सरकार की राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण से सुरक्षित हो रही है अमूल्य विरासत
रायपुर । छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर से एक महत्वपूर्ण साहित्यिक खोज सामने आई है, जहां वर्ष 1965 में प्रकाशित हस्तलिखित मासिक पत्रिका ‘उद्गार’ के चार दुर्लभ अंक प्राप्त हुए हैं। गोधनपुर क्षेत्र में पूर्व प्राचार्य श्री दिवाकर शर्मा के पास सुरक्षित यह पाण्डुलिपि न केवल उस दौर की साहित्यिक चेतना को दर्शाती है, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा की समृद्ध विरासत का भी प्रमाण है। ‘उद्गार’ जैसी दुर्लभ पाण्डुलिपियों का संरक्षण न केवल अतीत को सहेजने का प्रयास है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम भी सिद्ध होगा।
यह पत्रिका नगर के ख्यातिलब्ध साहित्यकार स्वर्गीय लक्षणधारी मिश्र द्वारा प्रारंभ की गई थी, जिसका प्रथम अंक मई 1965 में प्रकाशित हुआ था। उस समय ‘उद्गार’ एक अभिनव साहित्यिक प्रयोग के रूप में सामने आई, जिसमें लेख, कविताएं, कहानियां, गीत और कुंडलियां जैसी विविध विधाओं को स्थान दिया गया।
राष्ट्रीय स्तर पर संचालित पाण्डुलिपि सर्वेक्षण अभियान के अंतर्गत इन पाण्डुलिपियों का जियो-टैगिंग कार्य सर्वेयर अनूप बड़ा द्वारा किया गया है। यह प्रक्रिया न केवल इन दुर्लभ दस्तावेजों की पहचान सुनिश्चित करती है, बल्कि भविष्य में उनके संरक्षण और शोध के लिए भी मार्ग प्रशस्त करती है। विशेष बात यह है कि लगभग 50 पृष्ठों की इस हस्तलिखित पत्रिका के मई, जुलाई, अगस्त और अक्टूबर 1965 के अंक ही वर्तमान में उपलब्ध हैं। प्रत्येक पृष्ठ को आकर्षक चित्रों से सजाया गया है, जो इसे एक कलात्मक दस्तावेज भी बनाता है। हालांकि समय के प्रभाव से कई स्थानों पर स्याही धुंधली पड़ चुकी है और कागज भी क्षतिग्रस्त होने लगा है। ऐसी स्थिति में दिवाकर शर्मा द्वारा इन पाण्डुलिपियों के संरक्षण के लिए सराहनीय प्रयास किए जा रहे हैं। वे न केवल मूल प्रति को सुरक्षित रखने का प्रयास कर रहे हैं, बल्कि इसकी सामग्री को पुनः हस्तलिखित रूप में संरक्षित करने का कार्य भी कर रहे हैं, ताकि यह धरोहर आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुंच सके।
मासिक पत्रिका ‘उद्गार’ का संपादन स्वर्गीय लक्षणधारी मिश्र एवं मो. यासीन द्वारा किया गया था, जबकि प्रसिद्ध कवि स्वर्गीय अनिरुद्ध नीरव ने इसे सुंदर सुलेख में लिपिबद्ध किया था। इसके अतिरिक्त केशव प्रसाद शर्मा, श्याम सुंदर बेचैन, शिवपूजन प्रसाद, देवनारायण सिंह, जनार्दन प्रसाद पाण्डेय एवं प्रो. ईश्वर दत्त द्विवेदी जैसे प्रतिष्ठित साहित्यकारों का इसमें उल्लेखनीय योगदान रहा है।
पत्रिका ‘उद्गार’ की सबसे अनूठी विशेषता यह थी कि इसकी केवल एक ही हस्तलिखित प्रति तैयार की जाती थी, जिसे पाठकों के बीच क्रमशः साझा किया जाता था। इतना ही नहीं, पाठक और आलोचक उसी प्रति के खाली स्थानों पर अपने विचार भी अंकित करते थे, जिससे यह पत्रिका एक जीवंत संवाद का माध्यम बन जाती थी। भारत सरकार द्वारा संचालित पाण्डुलिपि सर्वेक्षण अभियान भारतीय सांस्कृतिक और साहित्यिक धरोहर को संरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

The News Related To The News Engaged In The www.apnachhattisgarh.com Web Portal Is Related To The News Correspondents The Editor Does Not Necessarily Agree With These Reports The Correspondent Himself Will Be Responsible For The News.
