अमरकंटक के श्री कल्याण सेवा आश्रम में ध्वजा साहिब का भव्य पूजन ,

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वैशाख पूर्णिमा पर परंपरागत बदली गई धर्म ध्वजा

संवाददाता – श्रवण कुमार उपाध्याय

अमरकंटक – मां नर्मदा जी की उद्गम स्थली/पवित्र नगरी अमरकंटक स्थित श्री कल्याण सेवा आश्रम में वैशाख पूर्णिमा के शुभ पावन अवसर पर धर्म ध्वजा साहिब का विशेष पूजन एवं अभिषेक अत्यंत श्रद्धा , भक्ति और वैदिक विधि-विधान के साथ सम्पन्न किया गया । आश्रम में प्रातःकाल से ही परिसर अंदर भक्ति का दिव्य वातावरण व्याप्त हो रहा था । इसी बीच ठीक प्रातः 9:00 बजे संत-महात्माओं एवं विद्वान पंडितों , आचार्यों के सानिध्य में वैदिक मंत्रोच्चारण के मध्य ध्वजा साहेब जी का पूजन-अभिषेक प्रारंभ किया गया जिसमें उपस्थित श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभूति से सराबोर कर दिया ।

उल्लेखनीय है कि उदासीन संप्रदाय की इस प्रमुख तपस्थली श्री कल्याण सेवा आश्रम में धर्म ध्वजा साहेब पूजन की यह प्राचीन परंपरा वर्ष में दो बार विधिपूर्वक संपन्न की जाती है—प्रथम शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर तथा द्वितीय वैशाख पूर्णिमा के पावन अवसर पर । इस विशिष्ट अनुष्ठान में पूजन-अभिषेक के उपरांत पुरानी धर्म ध्वजा को श्रद्धापूर्वक उतारकर नवीन वस्त्र एवं नई ध्वजा स्थापित की जाती है जो नवचेतना , आस्था एवं आध्यात्मिक ऊर्जा के संचार का प्रतीक मानी जाती है ।

आश्रम के प्रबंधन्यासी स्वामी हिमाद्री मुनि जी महाराज ने इस अवसर पर अपने उद्बोधन में कहा कि उदासीन संप्रदाय में ध्वजा पूजन का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है । यह केवल धार्मिक अनुष्ठान भर नहीं अपितु सनातन परंपराओं के संरक्षण , संवर्धन और सतत प्रवाह का सशक्त माध्यम है । उन्होंने कहा कि ध्वजा परिवर्तन की यह परंपरा आश्रम की आध्यात्मिक गरिमा को अक्षुण्ण बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है ।

श्री कल्याण सेवा आश्रम में इस भव्य एवं गरिमामयी आयोजन में स्वामी हरस्वरूप जी महाराज , स्वामी शांतानंद जी महाराज , स्वामी धर्मानंद जी महाराज , स्वामी नर्मदानंद जी महाराज , स्वामी रामानंद जी महाराज , स्वामी धुनि दास जी महाराज , स्वामी रामानंद जी महाराज तथा स्वामी अमित दादा सहित अनेक संत-महात्मा , भक्तगण अपनी गरिमामयी उपस्थिति से कार्यक्रम की शोभा बढ़ाते रहे । वहीं विद्वान आचार्य पंडित मुकेश पाठक , पंडित संदीप जोशी एवं पंडित सुनील दुबे ने विधि-विधानपूर्वक सम्पूर्ण पूजन संपन्न कराया ।

वैशाख पूर्णिमा के इस पुण्य अवसर पर आश्रम परिसर में विशाल भंडारे का भी आयोजन किया गया जिसमें संत-महात्माओं सहित सैकड़ों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ अर्जित किया । भंडारे में सेवा , समर्पण एवं सद्भाव की अनुपम झलक देखने को मिली ।

सम्पूर्ण कार्यक्रम के दौरान आश्रम परिसर में आस्था , श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्वितीय संगम दृष्टिगोचर हुआ । बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं ने इस दिव्य अनुष्ठान के साक्षी बनकर धर्मलाभ प्राप्त किया तथा वातावरण “हरि नाम” और वैदिक मंत्रों की गूंज से गुंजायमान रहा ।

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