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‘वनवासी’ शब्द के प्रयोग पर आदिवासी समाज ने जताई आपत्ति, राष्ट्रपति और मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन।

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रिपोर्टर ✒️ सुचित कुमार मरावी

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज युवा प्रकोष्ठ, बिलासपुर ने आदिवासी समाज की पहचान, संस्कृति और सम्मान से जुड़े मुद्दे को लेकर कलेक्टर के माध्यम से राष्ट्रपति एवं मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में सार्वजनिक मंचों पर आदिवासी समुदाय के लिए “वनवासी” शब्द के प्रयोग पर आपत्ति दर्ज कराते हुए भविष्य में ऐसे शब्दों के उपयोग पर रोक लगाने की मांग की गई है।

समाज के प्रतिनिधियों द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया है कि 24 मई 2026 को नई दिल्ली में आयोजित जनजातीय सांस्कृतिक समागम कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah द्वारा आदिवासी समाज को संबोधित करते हुए “वनवासी” शब्द का प्रयोग किया गया। समाज का कहना है कि इस शब्द के उपयोग से आदिवासी समुदाय की भावनाएं आहत हुई हैं।

ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि आदिवासी समाज अपनी विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान, परंपराओं, रीति-रिवाजों और ऐतिहासिक विरासत के साथ स्वयं को “आदिवासी” के रूप में पहचानता है। समाज के अनुसार “वनवासी” शब्द उनकी सामाजिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक अस्मिता का उचित प्रतिनिधित्व नहीं करता।

पहचान और सम्मान का विषय बताया

युवा प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष लवकुमार सिदार ने कहा कि यह केवल शब्दों का नहीं बल्कि समाज की पहचान और सम्मान का विषय है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज अपनी परंपराओं और गौरवशाली इतिहास के प्रति सजग है तथा उसकी भावनाओं का सम्मान किया जाना आवश्यक है।

उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया कि इस विषय को गंभीरता से लिया जाए और संबंधित स्तर पर आवश्यक संवाद एवं कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, जिससे समाज में सम्मान, विश्वास और सौहार्द का वातावरण बना रहे।

समाज के पदाधिकारी रहे मौजूद

ज्ञापन सौंपने के दौरान प्रदेश मीडिया प्रभारी राजेंद्र पोर्ते, बब्लू मरकाम, दिलीप ध्रुव, मुकेश मरावी, विजय सिदार, लखेश्वर मरावी, संजय मरावी, दीपक मरकाम, अशोक मरकाम, शुभम मरावी, अमृत ध्रुव, राजू ध्रुव सहित समाज के अनेक पदाधिकारी एवं विभिन्न ब्लॉकों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में उपस्थित समाजजनों ने आदिवासी समाज की पहचान, संस्कृति और अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट होकर आवाज उठाने की बात कही।

राष्ट्रपति और मुख्यमंत्री को भी भेजी गई प्रतिलिपि

समाज द्वारा सौंपे गए ज्ञापन की प्रतिलिपि Droupadi Murmu तथा Vishnu Deo Sai को भी प्रेषित की गई है।

समाज के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि आदिवासी समुदाय की अस्मिता, सांस्कृतिक पहचान और संवैधानिक अधिकारों से जुड़े विषयों पर किसी भी प्रकार की अनदेखी स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि समाज लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से अपनी बात रखता रहेगा तथा अपनी पहचान और सम्मान की रक्षा के लिए निरंतर प्रयास करता रहेगा।

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