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प्राथमिक शालाओं का फंड बंद, प्रधान पाठक परेशान

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नए शैक्षणिक सत्र से पहले वित्तीय संकट गहराया, विद्यालय संचालन पर पड़ सकता है असर

रायपुर । प्रदेश में 16 जून, मंगलवार से नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 की शुरुआत होने जा रही है। एक ओर शिक्षा विभाग बच्चों के स्वागत, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और विद्यालयों में बेहतर वातावरण बनाने की तैयारी में जुटा है, वहीं दूसरी ओर विलय (मर्ज) की गई प्राथमिक शालाओं में शाला संचालन फंड बंद होने से प्रधान पाठकों और शिक्षकों की चिंताएं बढ़ गई हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, पिछले शैक्षणिक सत्र की तरह इस वर्ष भी अनेक प्राथमिक विद्यालयों को नियमित संचालन के लिए आवश्यक वित्तीय सहायता उपलब्ध नहीं हो सकी है।

विद्यालय संचालन की बुनियादी जरूरतें प्रभावित

प्राथमिक विद्यालय शिक्षा व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी माने जाते हैं। बच्चों के शैक्षणिक जीवन की शुरुआत इन्हीं विद्यालयों से होती है। ऐसे में विद्यालयों की साफ-सफाई, आवश्यक मरम्मत, रंग-रोगन, स्टेशनरी सामग्री की खरीद, कार्यालयीन कार्यों के लिए दस्तावेजों की फोटोकॉपी, अभिलेख संधारण और अन्य दैनिक आवश्यकताओं के लिए शाला संचालन फंड की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है।

सूत्रों के अनुसार, फंड बंद होने से प्रधान पाठकों को विद्यालय संचालन के लिए कई आवश्यक खर्च स्वयं वहन करने पड़ रहे हैं या फिर कार्यों को टालना पड़ रहा है। इसका सीधा प्रभाव विद्यालयों की व्यवस्थाओं पर पड़ सकता है।

पिछले सत्र में भी बनी रही थी समस्या

जानकारों का कहना है कि शैक्षणिक सत्र 2025-26 में भी अनेक मर्ज प्राथमिक शालाओं को पर्याप्त संचालन राशि नहीं मिल पाई थी। इसके कारण विद्यालयों में कई प्रशासनिक और शैक्षणिक गतिविधियों के संचालन में कठिनाइयां सामने आई थीं। कई प्रधान पाठकों ने विभागीय स्तर पर अपनी समस्या रखी थी, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है।

प्रधान पाठकों के सामने बढ़ी जिम्मेदारी

विद्यालयों में प्रवेश उत्सव, बच्चों के स्वागत कार्यक्रम, शाला परिसर की साफ-सफाई और अन्य व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी प्रधान पाठकों पर रहती है। नए सत्र की शुरुआत से पहले विद्यालयों को व्यवस्थित करने के लिए संसाधनों की आवश्यकता होती है, लेकिन फंड के अभाव में यह कार्य प्रभावित हो सकते हैं।

शिक्षकों का मानना है कि सरकार शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए लगातार नई योजनाएं लागू कर रही है, लेकिन यदि प्राथमिक स्तर की संस्थाओं को आवश्यक आर्थिक संसाधन नहीं मिलेंगे तो योजनाओं का प्रभाव जमीनी स्तर पर सीमित रह सकता है।

गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए आर्थिक मजबूती जरूरी

शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि मजबूत शिक्षा व्यवस्था की शुरुआत प्राथमिक विद्यालयों से होती है। यदि शुरुआती स्तर पर विद्यालयों को पर्याप्त संसाधन और वित्तीय सहायता नहीं मिलेगी तो बच्चों के लिए बेहतर शिक्षण वातावरण तैयार करना चुनौतीपूर्ण हो जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित विद्यालयों के लिए शाला संचालन फंड और भी अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है।

शिक्षा विभाग से जल्द निर्णय की अपेक्षा

शिक्षक संगठनों और प्रधान पाठकों को उम्मीद है कि नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ ही शासन और शिक्षा विभाग इस विषय पर गंभीरता से विचार करेगा। यदि समय रहते शाला संचालन फंड जारी किया जाता है तो विद्यालयों की व्यवस्थाएं सुचारू रूप से संचालित हो सकेंगी और बच्चों की शिक्षा प्रभावित नहीं होगी।

समय पर फंड जारी होना आवश्यक

शिक्षा जगत से जुड़े लोगों का कहना है कि राज्य सरकार द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे सुधारों को सफल बनाने के लिए प्राथमिक विद्यालयों को आर्थिक रूप से सक्षम बनाना आवश्यक है। विलय की गई प्राथमिक शालाओं के लिए शाला संचालन फंड शीघ्र जारी किया जाना चाहिए, ताकि नए सत्र में विद्यालयों के संचालन, शैक्षणिक गतिविधियों और बच्चों की पढ़ाई पर किसी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

अब निगाहें शिक्षा विभाग और शासन के निर्णय पर टिकी हैं कि मर्ज प्राथमिक शालाओं के लिए संचालन राशि कब तक जारी की जाती है और विद्यालयों को इस वित्तीय संकट से राहत मिल पाती है या नहीं।

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