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जनचौपाल से बदली जिंदगी: पहाड़ी कोरवा दिव्यांग मंगरू राम को मिला आत्मनिर्भरता का सहारा

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दूरस्थ वनांचल तक पहुंची शासन की मदद

रायपुर । शासन की योजनाएं जब संवेदनशील प्रशासनिक पहल के साथ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचती हैं, तब उनका वास्तविक प्रभाव दिखाई देता है। बलरामपुर जिले के दूरस्थ वनांचल क्षेत्र में रहने वाले विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा समुदाय के दिव्यांग हितग्राही मंगरू राम की कहानी इसी सकारात्मक बदलाव की मिसाल बनकर उभरी है।

विकासखंड कुसमी की ग्राम पंचायत जिगनियां के आश्रित ग्राम सुपढाका में आयोजित पहाड़ी कोरवा जनजाति चौपाल के दौरान 60 प्रतिशत दिव्यांग  मंगरू राम की समस्या प्रशासन के संज्ञान में आई। लंबे समय से चलने-फिरने में असमर्थता के कारण उन्हें दैनिक कार्यों और आवागमन के लिए दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता था। दूरस्थ क्षेत्र में रहने के कारण उनकी समस्या वर्षों से अनसुलझी बनी हुई थी।

चौपाल के दौरान बलरामपुर कलेक्टर श्रीमती चंदन संजय त्रिपाठी ने ग्रामीणों की समस्याएं सुनते हुए  मंगरू राम की स्थिति की जानकारी प्राप्त की। मामले की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने तत्काल समाज कल्याण विभाग को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। निर्देश के अनुरूप विभाग द्वारा त्वरित पहल करते हुए  मंगरू राम को ट्रायसाइकिल उपलब्ध कराई गई, जिसे ग्राम पंचायत की सरपंच श्रीमती मानमती ने उन्हें सौंपा।

ट्रायसाइकिल मिलने के बाद  मंगरू राम के जीवन में बड़ा बदलाव आया है। अब उन्हें एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाने के लिए दूसरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। दैनिक जरूरतों के कार्य भी वे अधिक सहजता और आत्मसम्मान के साथ कर सकेंगे। उनके लिए यह ट्रायसाइकिल केवल एक साधन नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और सम्मानजनक जीवन की नई राह बन गई है।

मंगरू राम ने भावुक होकर बताया कि पहले छोटी-छोटी जरूरतों के लिए भी उन्हें दूसरों का सहारा लेना पड़ता था, लेकिन अब वे स्वयं अपने कार्य कर सकेंगे। उन्होंने इस सहायता के लिए राज्य शासन के प्रति आभार व्यक्त किया।

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