आबकारी वाहन हादसे पर उठे गंभीर सवाल, बीमा और दस्तावेजों की जांच की मांग तेज
लोरमी हादसे में नाबालिग की मौत के बाद विभागीय वाहन की वैधानिक स्थिति पर घिरा प्रशासन
मुंगेली/लोरमी। लोरमी क्षेत्र में आबकारी विभाग की कार्रवाई के दौरान हुए सड़क हादसे ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हादसे में एक 12 वर्षीय नाबालिग की मौत और दो अन्य बच्चों के घायल होने के बाद अब दुर्घटनाग्रस्त वाहन के बीमा, दस्तावेजों और वैधानिक स्थिति को लेकर स्थानीय स्तर पर सवाल उठने लगे हैं। मामले में निष्पक्ष जांच और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग तेज हो गई है।
जानकारी के अनुसार Excise Department Chhattisgarh की टीम अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई कर लौट रही थी। इसी दौरान बैगाकापा के पास विभागीय वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे में 12 वर्षीय अंकित यादव की मौत हो गई, जबकि दो अन्य नाबालिग बच्चे घायल हो गए। घटना के बाद जिला प्रशासन ने जांच के निर्देश दिए हैं।
बीमा को लेकर उठे सवाल
घटना के बाद अब वाहन के बीमा को लेकर गंभीर आरोप सामने आ रहे हैं। सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि जिस वाहन से दुर्घटना हुई, उसका बीमा हादसे के समय समाप्त हो चुका था। आरोप यह भी है कि दुर्घटना के बाद वाहन का बीमा कराया गया। हालांकि इन आरोपों की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

दूसरी गाड़ी के दस्तावेज उपयोग करने का आरोप
मामले में एक और चौंकाने वाला आरोप सामने आया है। कुछ लोगों का कहना है कि बीमा प्रक्रिया के दौरान समान मॉडल की दूसरी गाड़ी पर CG 10 AV 4328 नंबर अंकित कर दस्तावेज तैयार किए गए। यदि यह आरोप सही साबित होता है तो मामला केवल लापरवाही का नहीं बल्कि गंभीर अनियमितता का भी हो सकता है।
सरकारी या अटैच वाहन? बना बड़ा सवाल
दुर्घटनाग्रस्त वाहन की वैधानिक स्थिति भी जांच के दायरे में है। परिवहन नियमों के अनुसार सरकारी वाहनों के लिए निर्धारित नंबर श्रृंखला होती है, जबकि विभागीय कार्य में लगाए गए निजी या अटैच वाहनों के लिए भी स्पष्ट नियम और दस्तावेज अनिवार्य हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि कोई निजी वाहन सरकारी कार्य में उपयोग किया जा रहा था, तो उसके परमिट, फिटनेस, बीमा और पंजीयन की विस्तृत जांच आवश्यक है।
अधिकारियों की चुप्पी से बढ़ा संदेह
सूत्रों के अनुसार जब संबंधित अधिकारियों से वाहन के दस्तावेज, वेंडर और वैध कागजातों के संबंध में जानकारी मांगी गई, तो स्पष्ट जवाब नहीं मिल सका। इससे मामले को लेकर संदेह और गहरा गया है।
जिलेभर के विभागीय वाहनों की जांच की मांग
क्षेत्र के नागरिकों ने मांग की है कि केवल इस एक मामले की जांच पर्याप्त नहीं होगी। जिले के विभिन्न विभागों में संचालित सभी सरकारी और अटैच वाहनों की व्यापक जांच की जानी चाहिए। लोगों का सुझाव है कि यातायात पुलिस और Transport Department Chhattisgarh कलेक्टोरेट परिसर में विशेष शिविर लगाकर बीमा, फिटनेस, परमिट, पंजीयन समेत सभी दस्तावेजों की जांच करें और नियम उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई करें।
जांच रिपोर्ट पर टिकी निगाहें
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि नाबालिग की मौत के बाद सामने आए इन गंभीर आरोपों की निष्पक्ष जांच होगी या नहीं। क्या वाहन के दस्तावेजों और बीमा से जुड़े तथ्यों की स्वतंत्र जांच कर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होगी, या मामला समय के साथ ठंडे बस्ते में चला जाएगा? इसका जवाब अब आने वाली जांच रिपोर्ट ही दे पाएगी।

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