चिटफंड के जाल में फंसा मुंगेली का परिवार, 4 लाख गंवाने के बाद सदमे में युवक की मौत
डबल पैसे का झांसा देकर 4 लाख की ठगी, मानसिक तनाव में युवक की मौत…
- ₹4 लाख की ठगी, धमकियां और डिप्रेशन… आखिरकार चली गई जान
डबल पैसे का झांसा देकर 4 लाख की ठगी, मानसिक तनाव में युवक की मौत
पत्नी ने एसपी से लगाई गुहार, तीन लोगों पर धोखाधड़ी का आरोप; कई अन्य लोगों से भी निवेश के नाम पर रकम लेने का दावा
मुंगेली । जिले में निवेश के नाम पर कथित चिटफंड धोखाधड़ी का गंभीर मामला सामने आया है। गांधी वार्ड सदर बाजार निवासी स्वर्गीय अजय देवांगन की पत्नी सुनीता देवांगन ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर बिलासपुर निवासी ऋषि देवांगन, अरुण बंजारा तथा नीलू यादव के विरुद्ध धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज कर कठोर कार्रवाई की मांग की है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि तीनों ने निवेश पर मोटे मुनाफे और रकम दोगुनी-तिगुनी होने का लालच देकर लाखों रुपये ऐंठ लिए। पैसे वापस नहीं मिलने से अजय देवांगन गहरे मानसिक तनाव में चले गए और अंततः उनकी मृत्यु हो गई।
सुनीता देवांगन द्वारा पुलिस अधीक्षक को सौंपे गए आवेदन के अनुसार उनके पति अजय देवांगन पिछले कुछ महीनों से लगातार तनाव में रहने लगे थे। घर-परिवार के बीच भी वे सामान्य व्यवहार नहीं कर पा रहे थे। पत्नी ने बताया कि जब उन्होंने अपनी दोनों पुत्रियों के साथ बैठकर अजय देवांगन से बार-बार तनाव का कारण पूछा, तब शुरुआत में उन्होंने बात टाल दी। बाद में परिवार के दबाव और भावनात्मक आग्रह पर उन्होंने पूरी घटना बताई।
अजय देवांगन ने परिवार को बताया था कि 6 फरवरी 2026 को मुंगेली स्थित Punit Restaurant में एक विशेष बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक का आयोजन बिलासपुर अमेरी कॉलोनी निवासी ऋषि देवांगन ने किया था। बैठक में ऋषि देवांगन के साथ अरुण बंजारा भी मौजूद था। दोनों ने कथित रूप से एक निवेश कंपनी की योजनाओं का प्रचार करते हुए कहा कि कंपनी में पैसा लगाने पर हर तीन माह में रकम दोगुनी-तिगुनी हो जाएगी। निवेशकों को आकर्षित करने के लिए कई बड़े फायदे और ऊंचे रिटर्न का दावा किया गया।

बताया गया कि ऋषि देवांगन का मुंगेली में रिश्तेदारों के यहां आना-जाना लगा रहता था, जिससे स्थानीय लोगों के बीच उसका परिचय और विश्वास स्थापित था। इसी विश्वास के कारण अजय देवांगन सहित कई लोगों ने निवेश करना उचित समझा। शिकायत के अनुसार अजय देवांगन ने शुरुआत में कुछ राशि नगद दी, बाद में आरोपियों के कहने पर ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के जरिए भी रकम ट्रांसफर की गई। धीरे-धीरे निवेश की राशि बढ़कर लगभग चार लाख रुपये तक पहुंच गई।
पीड़िता के अनुसार कुछ समय बाद ऋषि देवांगन लगातार अजय देवांगन के कार्यालय पहुंचकर और अधिक निवेश करने के लिए दबाव बनाने लगा। इस दौरान अरुण बंजारा और उनकी सहयोगी बताई जा रही नीलू यादव भी साथ आने लगीं। तीनों कथित रूप से बार-बार भरोसा दिलाते रहे कि कंपनी में किसी प्रकार का जोखिम नहीं है और निवेश पूरी तरह सुरक्षित है। इन्हीं आश्वासनों के चलते अजय देवांगन ने बड़ी रकम जमा कर दी।
समय बीतने के साथ जब अजय देवांगन ने निवेश की गई राशि और रिटर्न के संबंध में जानकारी मांगनी शुरू की, तब स्थिति बदलती चली गई। आरोप है कि शुरुआत में कंपनी की स्कीम अपडेट होने, तकनीकी प्रक्रिया चलने और भुगतान जल्द मिलने जैसी बातें कहकर उन्हें टाल दिया गया। बाद में आरोपियों ने फोन उठाना तक बंद कर दिया। अजय देवांगन ने व्हाट्सएप पर कई संदेश भेजकर रकम लौटाने की मांग की, लेकिन कथित तौर पर जवाब मिला कि पैसा कंपनी में लगाया गया है, व्यक्तिगत रूप से नहीं लिया गया।
परिजनों का कहना है कि यही वह समय था जब अजय देवांगन की मानसिक स्थिति लगातार बिगड़ने लगी। आर्थिक नुकसान और सामाजिक दबाव के कारण वे भीतर ही भीतर टूटते चले गए। सबसे अधिक रकम उन्होंने ही निवेश की थी, इसलिए चिंता भी उन्हीं पर अधिक थी। उन्होंने अपने घनिष्ठ मित्र अनिल देवांगन और दुर्गेश देवांगन को भी पूरी घटना बताई थी। दोनों मित्रों ने पुष्टि की कि घटना से कुछ दिन पहले तक अजय देवांगन लगातार तनाव में थे और ऋषि देवांगन, अरुण बंजारा तथा नीलू यादव का नाम लेकर अपनी परेशानी व्यक्त कर रहे थे।
आवेदन के अनुसार 11 जून की दोपहर भोजन करते समय अचानक अजय देवांगन की तबीयत बिगड़ गई। उन्हें अत्यधिक पसीना आने लगा और कुछ ही क्षणों में वे चक्कर खाकर नीचे गिर पड़े। परिजनों ने तत्काल समाज के अध्यक्ष आनंद देवांगन को सूचना दी। उनकी मदद से अजय देवांगन को मुंगेली के एक निजी अस्पताल ले जाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने हालत गंभीर बताते हुए बिलासपुर रेफर कर दिया।
बिलासपुर में चिकित्सकीय परीक्षण के बाद डॉक्टरों ने बताया कि अत्यधिक हाई ब्लड प्रेशर के कारण दिमाग की नसों पर गंभीर प्रभाव पड़ा है और तत्काल उच्च स्तरीय उपचार की आवश्यकता है। इसके बाद परिजन बिना देर किए उन्हें रायपुर लेकर पहुंचे। वहां इलाज के दौरान 12 जून की रात अजय देवांगन की मृत्यु हो गई। चिकित्सकीय रिपोर्ट में मृत्यु का कारण हाइपरटेंशन से उत्पन्न गंभीर जटिलता बताया गया।
सुनीता Devangan ने आवेदन में स्पष्ट रूप से आरोप लगाया है कि यदि उनके पति के साथ कथित धोखाधड़ी नहीं हुई होती तो वे मानसिक तनाव, अवसाद और उच्च रक्तचाप का शिकार नहीं होते। उनका कहना है कि रकम वापस मांगने पर आरोपियों द्वारा कथित उपेक्षा, टालमटोल और कठोर व्यवहार ने उनके पति की मानसिक स्थिति को और अधिक खराब कर दिया।
मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी सामने आया है कि अजय देवांगन अकेले पीड़ित नहीं थे। शिकायत में दावा किया गया है कि मुंगेली के कई अन्य लोग भी इसी निवेश योजना के जाल में फंसे। इनमें आनंद देवांगन, विष्णु देवांगन, जगदीश देवांगन, जलेश देवांगन, सुदामा देवांगन, हीरालाल देवांगन, मीत देवांगन और घनश्याम देवांगन सहित कई नाम शामिल हैं। गवाहों के अनुसार इन सभी से भी अलग-अलग रकम ली गई।
पीड़िता ने पुलिस अधीक्षक से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर बैंक खातों के लेनदेन, व्हाट्सएप चैट, बैठक की तस्वीरों और अन्य दस्तावेजों की जांच कराई जाए। साथ ही आरोपियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई करते हुए उनके पति से कथित रूप से हड़पी गई लगभग चार लाख रुपये की राशि वापस दिलाई जाए।
पुलिस जांच पर टिकी निगाहें
यह मामला जिले में निवेश के नाम पर चल रहे कथित फर्जीवाड़े की ओर गंभीर संकेत दे रहा है। यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो कई और चौंकाने वाले खुलासे सामने आ सकते हैं। फिलहाल पूरे मामले में पुलिस जांच और प्रशासनिक कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
“मेरे पति को झूठे सपने दिखाकर आर्थिक और मानसिक रूप से तोड़ दिया गया। हमारी पूरी जमा पूंजी चली गई और मैंने अपना जीवनसाथी खो दिया। प्रशासन से मेरी केवल यही मांग है कि दोषियों को सजा मिले, ताकि किसी और परिवार के साथ ऐसा न हो।”
— सुनीता देवांगन

















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