समान नागरिक संहिता (UCC): क्या यह वास्तव में देश की प्राथमिकता है?
रिपोर्टर ✒️ रूपचंद रॉय
लेखक: महफूज़ खान | जनहित
भारत एक विविधताओं से भरा देश है। यहां अलग-अलग धर्म, भाषाएं, संस्कृतियां और परंपराएं सदियों से साथ-साथ विकसित हुई हैं। ऐसे देश में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code – UCC) का मुद्दा समय-समय पर उठाया जाता रहा है। इसे कुछ लोग राष्ट्रीय एकता का माध्यम बताते हैं, जबकि कुछ लोग इसे अनावश्यक और व्यावहारिक समस्याओं को बढ़ाने वाला कदम मानते हैं।
सबसे पहले यह समझना आवश्यक है कि भारत में पहले से ही अधिकांश कानून सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू होते हैं। भारतीय दंड संहिता (BNS), नागरिक प्रक्रिया, आपराधिक प्रक्रिया, साक्ष्य कानून, संपत्ति कानून, अनुबंध कानून, कर कानून और संविधान के तहत मिलने वाले मौलिक अधिकार सभी नागरिकों के लिए समान हैं। किसी अपराध की जांच धर्म देखकर नहीं होती और न ही किसी व्यक्ति को न्याय धर्म के आधार पर दिया जाता है।

ऐसे में प्रश्न उठता है कि जब देश में पहले से ही अधिकांश मामलों में समान कानून लागू हैं, तब UCC की वास्तविक आवश्यकता क्या है?
आज भारत की अदालतों में करोड़ों मामले लंबित हैं। न्याय मिलने में वर्षों लग जाते हैं। आम नागरिक की सबसे बड़ी समस्या यह नहीं है कि उसके लिए अलग-अलग व्यक्तिगत कानून हैं, बल्कि यह है कि उसे समय पर न्याय नहीं मिलता। यदि न्याय व्यवस्था पहले से ही भारी दबाव में है, तो एक नए व्यापक कानूनी ढांचे को लागू करने से प्रारंभिक वर्षों में मुकदमों और व्याख्याओं की संख्या और बढ़ सकती है।
संविधान का अनुच्छेद 25 प्रत्येक नागरिक को अपने धर्म का पालन, आचरण और प्रचार करने की स्वतंत्रता देता है। वहीं अनुच्छेद 26 धार्मिक संस्थाओं को अपने धार्मिक मामलों के प्रबंधन का अधिकार देता है। इसलिए UCC पर चर्चा करते समय धार्मिक स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकारों को भी ध्यान में रखना आवश्यक है।
यह भी विचारणीय है कि क्या वर्तमान समय में देश की सबसे बड़ी प्राथमिकता UCC है, या फिर बेरोजगारी, शिक्षा, स्वास्थ्य, न्यायिक सुधार, किसानों की समस्याएं, महंगाई और बुनियादी सुविधाएं अधिक महत्वपूर्ण मुद्दे हैं?
लोकतंत्र में किसी भी कानून पर चर्चा होना स्वाभाविक है। लेकिन किसी भी बड़े कानूनी परिवर्तन से पहले व्यापक जनसंवाद, सभी समुदायों की भागीदारी, विधि विशेषज्ञों की राय और उसके व्यावहारिक प्रभावों का गंभीर अध्ययन आवश्यक है।
कानून का उद्देश्य समाज को जोड़ना होना चाहिए, बांटना नहीं। न्याय व्यवस्था को मजबूत करना, लंबित मामलों को कम करना और सभी नागरिकों को समय पर न्याय दिलाना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
सवाल UCC के पक्ष या विपक्ष का नहीं है। सवाल यह है कि क्या यह देश की वर्तमान प्राथमिकताओं और वास्तविक समस्याओं का समाधान है?
— महफूज़ खान | जनहित

The News Related To The News Engaged In The www.apnachhattisgarh.com Web Portal Is Related To The News Correspondents The Editor Does Not Necessarily Agree With These Reports The Correspondent Himself Will Be Responsible For The News.
