जिला अस्पताल कवर्धा में तीन जटिल स्त्री रोग का सफल ऑपरेशन, महिलाओं को मिली नई जिंदगी

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विशेषज्ञ चिकित्सकों ने गंभीर एनीमिया और स्त्री रोगों से पीड़ित मरीजों का किया सफल उपचार
रिपोर्टर✒️कमलेश सिंह
कवर्धा । जिला अस्पताल कवर्धा में गंभीर एनीमिया और जटिल स्त्री रोगों से पीड़ित तीन महिलाओं की सफल ऑपरेशन कर चिकित्सकों ने उन्हें नई जिंदगी दी। तीनों मरीज अत्यधिक मासिक धर्म के कारण गंभीर एनीमिया (रक्ताल्पता) से पीड़ित थीं। ऑपरेशन से पहले उनकी स्थिति को देखते हुए रक्त चढ़ाया गया, जिसके बाद विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने सफलतापूर्वक शल्यक्रियाएं कीं।

पहला मामला 45 वर्षीय महिला का था, जो पिछले छह माह से अत्यधिक मासिक धर्म के कारण गंभीर एनीमिया से पीड़ित थी। अस्पताल में भर्ती करने के बाद मरीज को तीन यूनिट रक्त चढ़ाया गया। जांच में एंडोमेट्रियल हाइपरप्लासिया की पुष्टि होने पर डॉ. निहारिका सिंह ने सफल ऑपरेशन की। दूसरा मामला 50 वर्षीय महिला का था, जो लंबे समय से अत्यधिक मासिक धर्म के कारण गंभीर रक्ताल्पता से ग्रसित थी। मरीज को भर्ती कर तीन यूनिट रक्त चढ़ाया गया। जांच के दौरान गर्भाशय में लगभग 20 सेंटीमीटर आकार और 1.2 किलोग्राम वजन की विशाल रसौली पाई गई। इस जटिल ऑपरेशन को डॉ. मंजूषा यादव ने सफलतापूर्वक संपन्न किया।

तीसरा मामला 50 वर्षीय महिला का था, जो पिछले एक वर्ष से अत्यधिक मासिक धर्म, पेट में बढ़ती गांठ और गंभीर एनीमिया से परेशान थी। भर्ती के बाद आवश्यक रक्त चढ़ाया गया। जांच में लियोमायोमा और एडेनोमायोसिस की पुष्टि होने पर डॉ. निहारिका सिंह ने सफलतापूर्वक हिस्टेरेक्टॉमी की। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार तीनों मरीजों की ऑपरेशन सफल रही हैं। वर्तमान में उन्हें चिकित्सकीय निगरानी में भर्ती रखकर आवश्यक उपचार और देखभाल दी जा रही है तथा उनकी स्थिति स्थिर एवं संतोषजनक है। इन सफल ऑपरेशन में स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की टीम के साथ एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ. मुकेश वालेचा तथा ऑपरेशन थिएटर स्टाफ की समन्वित और महत्वपूर्ण भूमिका रही।

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समय पर जांच से बच सकती हैं गंभीर जटिलताएं

चिकित्सकों ने महिलाओं से अपील की है कि यदि मासिक धर्म सामान्य से अधिक हो, लंबे समय तक रक्तस्राव बना रहे, अत्यधिक कमजोरी, चक्कर आना, हीमोग्लोबिन की कमी या पेट में गांठ जैसी समस्या महसूस हो तो इसे सामान्य समझकर नजरअंदाज न करें। समय पर स्त्री रोग विशेषज्ञ से परामर्श और नियमित जांच कराने से एंडोमेट्रियल हाइपरप्लासिया, गर्भाशय की रसौली लियोमायोमा और एडेनोमायोसिस जैसी बीमारियों का प्रारंभिक अवस्था में ही निदान और उपचार संभव है, जिससे गंभीर एनीमिया और अन्य जटिलताओं से बचा जा सकता है।

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