तोखन साहू की पहल से छत्तीसगढ़ में मत्स्यपालन विकास को मिलेगी नई गति
PMMSY के तहत 956.86 करोड़ की परियोजनाएं स्वीकृत, केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने दी जानकारी
नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ में मत्स्यपालन एवं जलकृषि क्षेत्र के विकास को लेकर केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तथा बिलासपुर सांसद तोखन साहू की पहल को महत्वपूर्ण सफलता मिली है। केंद्रीय पंचायती राज एवं मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह ‘ललन सिंह’ ने पत्र के माध्यम से साहू को इसकी जानकारी दी है।

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के अंतर्गत छत्तीसगढ़ में वित्तीय वर्ष 2020-21 से 2025-26 के दौरान कुल 956.86 करोड़ रुपये के परिव्यय वाली परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान की गई है। इसमें 321.01 करोड़ रुपये का केंद्रीय अंश शामिल है तथा राज्य को अब तक 297.36 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता जारी की जा चुकी है।

इन परियोजनाओं में एकीकृत एक्वा पार्क, फिन फिश एवं शेल फिश हैचरी, तालाब निर्माण, ऑर्नामेंटल फिशरी इकाइयां, जलाशय केज कल्चर, आरएएस, बायोफ्लॉक इकाइयां, फिश फीड मिल, मत्स्य मूल्य संवर्धन इकाइयां और फिश ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाएं शामिल हैं। इन परियोजनाओं के माध्यम से प्रदेश में आधुनिक तकनीक के उपयोग के साथ मत्स्य उत्पादन को बढ़ाने और मत्स्यपालन से जुड़े लोगों के लिए बेहतर अवसर तैयार करने की दिशा में काम किया जा रहा है।
844 करोड़ की परियोजनाओं के लिए साहू ने की थी पहल
गौरतलब है कि तोखन साहू ने 30 जनवरी 2026 को केंद्र सरकार के समक्ष 844 करोड़ रुपये की मात्स्यिकी विकास परियोजनाओं पर विचार करने का अनुरोध किया था। उन्होंने छत्तीसगढ़ में मत्स्यपालन और जलकृषि क्षेत्र की संभावनाओं को देखते हुए आवश्यक परियोजनाओं को गति देने की आवश्यकता पर जोर दिया था।
इसके बाद मंत्रालय ने 16 जून 2026 को प्रस्ताव को छत्तीसगढ़ सरकार के मत्स्यपालन विभाग को PMMSY के दिशा-निर्देशों के तहत परीक्षण एवं आवश्यक कार्रवाई के लिए अग्रेषित किया। केंद्र स्तर पर प्रस्ताव पर हुई कार्रवाई के बाद प्रदेश में मत्स्यपालन क्षेत्र से जुड़ी विभिन्न परियोजनाओं को स्वीकृति मिली है।
मत्स्य उत्पादन और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा
स्वीकृत परियोजनाओं से छत्तीसगढ़ में मत्स्य उत्पादन बढ़ाने के साथ आधुनिक जलकृषि तकनीकों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। एकीकृत एक्वा पार्क, हैचरी, बायोफ्लॉक, आरएएस और केज कल्चर जैसी आधुनिक व्यवस्थाओं के विस्तार से मत्स्यपालकों को नई तकनीक अपनाने के अवसर मिलेंगे।
वहीं फिश फीड मिल, मूल्य संवर्धन इकाइयों और फिश ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास से उत्पादन के साथ-साथ भंडारण, प्रसंस्करण और बाजार तक पहुंच की व्यवस्था भी मजबूत होने की संभावना है। इससे मत्स्यपालकों की आय बढ़ाने और क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा करने में मदद मिलेगी।
छत्तीसगढ़ में जल संसाधनों और मत्स्यपालन की संभावनाओं को देखते हुए इन परियोजनाओं को क्षेत्र के आर्थिक विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। केंद्र और राज्य स्तर पर योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से मत्स्यपालन एवं जलकृषि क्षेत्र को नई गति मिलने की उम्मीद है।

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