रायपुर रीजन में 92 किसानों व स्व-सहायता समूहों को 71.49 करोड़ रुपए का कृषि ऋण स्वीकृत
सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के मेगा कृषि ऋण आउटरीच कार्यक्रम में किसानों और महिला समूहों को मिली बड़ी वित्तीय सहायता
रायपुर । किसानों और महिला स्व-सहायता समूहों को कृषि एवं आजीविका गतिविधियों से जोड़ने के लिए संस्थागत ऋण की उपलब्धता बढ़ाने की दिशा में सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया द्वारा महत्वपूर्ण पहल की गई है। धमतरी में आयोजित मेगा कृषि ऋण आउटरीच कार्यक्रम के दौरान बैंक के रायपुर रीजन ने 92 किसान हितग्राहियों और महिला स्व-सहायता समूहों के लिए कुल 71.49 करोड़ रुपये के कृषि ऋण स्वीकृत किए।
कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को सुलभ, पारदर्शी और समयबद्ध संस्थागत ऋण उपलब्ध कराना था, ताकि वे खेती-किसानी के साथ कृषि से जुड़ी अन्य गतिविधियों का विस्तार कर सकें। इस वृहद कार्यक्रम में धमतरी और आसपास के क्षेत्रों से करीब 100 किसान प्रतिनिधियों, महिला स्व-सहायता समूहों की सदस्यों और बैंक अधिकारियों ने भाग लिया।

कृषि और आजीविका गतिविधियों को मिलेगा बढ़ावा
स्वीकृत ऋण राशि से किसानों को कृषि यंत्रीकरण, सिंचाई, पशुपालन, डेयरी, मत्स्य पालन और अन्य संबद्ध गतिविधियों के विस्तार में वित्तीय सहायता मिलेगी। समय पर संस्थागत ऋण उपलब्ध होने से किसानों को खेती की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पूंजी की कमी का सामना कम करना पड़ेगा।

कृषि क्षेत्र में मशीनरी, सिंचाई साधन, पशुधन और अन्य संसाधनों में निवेश बढ़ने से उत्पादन क्षमता में वृद्धि की संभावना है। वहीं महिला स्व-सहायता समूहों के लिए ऋण सुविधा आजीविका गतिविधियों को विस्तार देने और आय के नए साधन विकसित करने में सहायक होगी।
साहूकारी व्यवस्था से मुक्ति और आर्थिक सशक्तिकरण
बैंक अधिकारियों ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों और छोटे उद्यमियों को औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ना इस पहल का प्रमुख उद्देश्य है। संस्थागत ऋण की पहुंच बढ़ने से किसानों की गैर-संस्थागत साहूकारों पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।
किसानों को औपचारिक बैंकिंग प्रणाली से जोड़ने के साथ उन्हें वित्तीय अनुशासन और बैंकिंग सुविधाओं का लाभ लेने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इससे ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत होने और आजीविका के साधनों का विस्तार होने की संभावना बढ़ेगी।
समय पर मिला ऋण कृषि अर्थव्यवस्था का आधार
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बैंक के महाप्रबंधक रोहित कुमार ने कहा कि कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। किसानों को समय पर वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना कृषि क्षेत्र की मजबूती के लिए आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि बैंक का उद्देश्य केवल ऋण उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि किसानों को उनकी जरूरत के अनुरूप सही वित्तीय उत्पाद, आधुनिक तकनीक और उचित मार्गदर्शन उपलब्ध कराना भी है। किसानों और बैंक के बीच पारदर्शी संवाद ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
किसानों से सीधे संवाद, समस्याओं पर हुई चर्चा
मेगा आउटरीच कार्यक्रम के दौरान बैंक अधिकारियों और किसानों के बीच सीधे संवाद का सत्र भी आयोजित किया गया। किसानों ने बैंकिंग सेवाओं, ऋण प्रक्रिया और अपनी आवश्यकताओं से जुड़े अनुभव अधिकारियों के सामने रखे।
बैंक अधिकारियों ने किसानों को ऋण पात्रता, आवश्यक दस्तावेजों और आवेदन प्रक्रिया की जानकारी दी। साथ ही बैंकिंग प्रक्रिया को अधिक सरल, पारदर्शी और किसान हितैषी बनाने का भरोसा दिलाया।
महिला स्व-सहायता समूहों को भी मिला संबल
कार्यक्रम में महिला स्व-सहायता समूहों की भागीदारी ने वित्तीय समावेशन और महिला आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में भी महत्वपूर्ण संदेश दिया। संस्थागत ऋण के माध्यम से समूह अपनी आजीविका गतिविधियों को बढ़ा सकते हैं और आय के स्थायी साधन विकसित कर सकते हैं।
महिलाओं को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ने और उन्हें आर्थिक गतिविधियों के लिए वित्तीय सहयोग उपलब्ध कराने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था में उनकी भागीदारी और मजबूत होगी।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई गति
धमतरी में आयोजित यह मेगा कृषि ऋण आउटरीच कार्यक्रम किसानों, महिला स्व-सहायता समूहों और बैंकिंग संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय की दिशा में महत्वपूर्ण पहल रहा। 92 हितग्राहियों के लिए 71.49 करोड़ रुपये के ऋण की स्वीकृति से कृषि, पशुपालन, डेयरी, मत्स्य पालन, सिंचाई और अन्य आजीविका गतिविधियों को वित्तीय आधार मिलेगा।
संस्थागत ऋण की आसान और समयबद्ध उपलब्धता किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत करने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देगी। बैंक और किसानों के बीच सीधे संवाद की ऐसी पहल आने वाले समय में कृषि एवं ग्रामीण आजीविका को नई गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

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