कबीरधाम में बाल विवाह उन्मूलन और बेसहारा बच्चों के संरक्षण पर विशेष जोर

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कलेक्टर गोपाल वर्मा ने अधिकारियों से कहा – समन्वित कार्ययोजना के साथ करें कार्य
रिपोर्टर✒️कमलेश सिंह
कवर्धा । कलेक्टर गोपाल वर्मा की अध्यक्षता में महिला एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत जिला बाल कल्याण एवं संरक्षण समिति तथा किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम 2015 (यथा संशोधित 2021) के तहत गठित विभिन्न समितियों की त्रैमासिक बैठक कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित की गई। बैठक में जिले को बाल विवाह मुक्त बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों तथा सड़कों पर रहने वाले, बेसहारा एवं श्रम में संलग्न बच्चों के संरक्षण व पुनर्वास को लेकर विस्तार से चर्चा की गई।बैठक में जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी ने बताया कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देशानुसार राज्य शासन द्वारा वर्ष 2028-29 तक छत्तीसगढ़ को बाल विवाह मुक्त राज्य बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके अंतर्गत वर्ष 2025-26 तक कबीरधाम जिले के कुल 40 प्रतिशत ग्राम पंचायतों एवं नगरीय निकायों को बाल विवाह मुक्त घोषित किया जाना है। इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा शिक्षा, पंचायत, नगरीय प्रशासन सहित अन्य विभागों के साथ समन्वय कर व्यापक स्तर पर जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। स्कूलों, ग्राम पंचायतों, धार्मिक स्थलों एवं सामाजिक संगठनों के माध्यम से जागरूकता कार्यक्रम, रैलियां एवं शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किए जा रहे हैं।

बैठक में सड़कों पर रहने वाले बच्चों तथा अपशिष्ट संग्रहक, भिक्षावृत्ति एवं बाल श्रम में संलग्न बच्चों का संरक्षण, सुरक्षा एवं पुनर्वास पर भी विस्तृत चर्चा की गई। जिला बाल संरक्षण इकाई द्वारा ऐसे बच्चों की पहचान कर उन्हें आवश्यक देखरेख एवं संरक्षण उपलब्ध कराने हेतु सतत प्रचार-प्रसार और अभियान संचालित किए जा रहे हैं। इसमें वे बच्चे भी शामिल हैं जो दिन में सड़कों पर रहते हैं और रात में झुग्गी-झोपड़ी बस्तियों में अपने परिवार के पास लौटते हैं, साथ ही वे बच्चे जो परिवार सहित सड़कों पर जीवन यापन कर रहे हैं।

कलेक्टर वर्मा ने बैठक में निर्देश दिए कि बेसहारा एवं देखरेख की आवश्यकता वाले बच्चों से संबंधित अभियान को जिले में और अधिक व्यापक रूप से संचालित किया जाए। उन्होंने संबंधित विभागों को समन्वय के साथ कार्य करते हुए ऐसे बच्चों को संरक्षण, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं पुनर्वास की मुख्यधारा से जोड़ने पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि बाल विवाह उन्मूलन और बच्चों के संरक्षण के बिना समग्र सामाजिक विकास संभव नहीं है, इसलिए इन दोनों विषयों पर सतत और प्रभावी कार्रवाई आवश्यक है।

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