मदिरा दुकानों के आबंटन पर उठे सवाल, सरकार ने नियमों का दिया हवाला

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ध्यानाकर्षण सूचना पर आबकारी विभाग का स्पष्ट वक्तव्य

छत्तीसगढ़ विधान सभा में माननीय द्वारा प्रदेश में मदिरा दुकानों एवं उनसे जुड़े अहातों के आबंटन को लेकर ध्यानाकर्षण सूचना प्रस्तुत की गई। सूचना में आरोप लगाया गया कि प्रदेश में मदिरा दुकानों के लिए स्थान चयन के स्पष्ट मापदण्ड नहीं अपनाए जा रहे हैं, जिसके चलते शहरों के रिहायशी इलाकों, अत्यधिक व्यस्त मार्गों, धार्मिक स्थलों के मार्गों एवं विद्यालयों जैसे संवेदनशील क्षेत्रों के समीप मदिरा दुकानों और अहातों का आबंटन कर दिया गया है।

ध्यानाकर्षण में यह भी कहा गया कि यदि समय के साथ इन दुकानों के आसपास घनी आबादी, धार्मिक स्थल अथवा शैक्षणिक संस्थान का निर्माण हो जाता है और आमजन दुकान के विस्थापन की मांग करते हैं, तो शासन द्वारा कोई प्रभावी कार्यवाही नहीं की जाती। परिणामस्वरूप आम नागरिकों में शासन और प्रशासन के प्रति रोष एवं आक्रोश की स्थिति बन रही है।


सरकार का पक्ष : आरोपों से किया इंकार

इस संबंध में सरकार एवं आबकारी विभाग की ओर से प्रस्तुत वक्तव्य में उक्त आरोपों को सिरे से खारिज किया गया। विभाग ने स्पष्ट किया कि यह कहना सही नहीं है कि प्रदेश में मदिरा दुकानों एवं अहातों का आबंटन बिना किसी मापदण्ड के किया गया है। राज्य की समस्त मदिरा दुकानें एवं उनसे संबंधित अहाते छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम, 1915 के अंतर्गत बनाए गए नियमों तथा सामान्य शर्तों के अनुरूप ही स्थापित हैं।

वक्तव्य में आगे कहा गया कि यह आरोप भी तथ्यहीन है कि आसपास घनी आबादी, धार्मिक स्थल या विद्यालय बन जाने के बाद भी शासन द्वारा कोई कार्यवाही नहीं की जाती। विभाग के अनुसार, किसी भी मदिरा दुकान अथवा अहाते की यदि नियम-विपरीत स्थिति के संबंध में आवेदन प्राप्त होता है, तो उसका परीक्षण कर विधिवत जांच की जाती है और जांच में नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होने पर स्थानांतरण की कार्यवाही की जाती है।


आमजन में रोष के दावे को भी नकारा

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि आम जनता में शासन अथवा प्रशासन के प्रति व्यापक रोष और आक्रोश व्याप्त होने का दावा भी सही नहीं है। विभाग का कहना है कि नियमानुसार कार्यवाही एवं शिकायतों के निराकरण की प्रक्रिया सतत रूप से जारी है और जनहित को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिए जाते हैं।


निष्कर्षतः, मदिरा दुकानों के आबंटन को लेकर जहां एक ओर जनप्रतिनिधि ने जनभावनाओं से जुड़ा प्रश्न उठाया, वहीं सरकार ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सभी दुकानें कानून के दायरे में संचालित हैं और नियमों के उल्लंघन की स्थिति में आवश्यक कार्यवाही की जाती है।

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