बघेल का ‘दलीय लोकतंत्र’ पर ज्ञान देना ‘नौ सौ चूहे खाकर बिल्ली हज को चली’ जैसा : अखिलेश सोनी

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रायपुर। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश महामंत्री अखिलेश सोनी ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा भाजपा के आंतरिक लोकतंत्र पर दिए गए अनर्गल बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे हास्यास्पद और दिवालिया सोच करार दिया है। श्री सोनी ने कहा कि जिस पार्टी का इतिहास ही तानाशाही और एक परिवार की गुलामी का रहा हो, उसके नेता को विश्व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक दल पर उंगली उठाने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।

भाजपा ​प्रदेश महामंत्री श्री सोनी ने कहा कि भाजपा वह संगठन है जहाँ एक चायवाले का बेटा प्रधानमंत्री और एक बूथ का कार्यकर्ता अपनी योग्यता से मुख्यमंत्री के पद तक पहुँचता है। इसके विपरीत, कांग्रेस में प्रतिभा की नहीं, बल्कि ’10 जनपथ’ की परिक्रमा करने वालों की पूछ-परख होती है। क्या बघेल बताएंगे कि कांग्रेस में राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव कितनी पारदर्शिता से होता है? मौजूदा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की नियति तो यह है कि पार्टी से जुड़े मुद्दों को “कांग्रेस आलाकमान” पर छोड़ने के लिए विवश हैं! संसद में खुद खड़गे यह कह चुके हैं कि आज वह जो कुछ हैं, सोनिया गांधी की कृपा से हैं। श्री सोनी ने कहा कि डिक्टेटरशिप क्या होती है, यह छत्तीसगढ़ की जनता ने पिछले पाँच वर्षों में बघेल सरकार के दौरान देखा है। अपने ही मंत्रियों की बात न सुनना, विरोध करने वाले कार्यकर्ताओं को हाशिए पर धकेलना और प्रशासन का दुरुपयोग कर विपक्ष की आवाज दबाना— यह बघेल की कार्यशैली रही है। आज सत्ता से बाहर होकर लोकतंत्र पर ज्ञान बाँटकर बघेल राजनीतिक पाखण्ड का प्रदर्शन कर रहे हैं। बघेल अब ‘सौ चूहे खाकर बिल्ली हज को चली’ की कहावत को चरितार्थ कर रहे हैं।

भाजपा प्रदेश महामंत्री श्री सोनी ने तंज कसते हुए कहा कि बघेल को भाजपा की चिंता छोड़कर अपनी पार्टी के भीतर मची सिर-फुटौवल पर ध्यान देना चाहिए। कांग्रेस में आज जो भगदड़ मची है और बड़े नेता पार्टी छोड़ रहे हैं, वह बघेल और उनकी मंडली की तानाशाही का ही परिणाम है। छत्तीसगढ़ की जनता ने विधानसभा चुनाव में बघेल की ‘डिक्टेटरशिप’ को नकार कर भाजपा के ‘सुशासन’ और ‘लोकतांत्रिक मूल्यों’ पर मुहर लगा दी है। श्री सोनी ने कहा कि हार की हताशा में वे इस तरह के अनर्गल प्रलाप कर रहे हैं ताकि मीडिया में बने रहें। भाजपा एक कैडर आधारित अनुशासित पार्टी है, जहाँ सामूहिक निर्णय लिए जाते हैं, न कि किसी एक परिवार के दरबार में हाजिरी लगाई जाती है।

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