देवगांव सरपंच का बड़ा आरोप—CEO पर मनमानी, अवैध कार्रवाई और मानसिक प्रताड़ना का आरोप

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कलेक्टर से निष्पक्ष जांच की मांग, भुगतान रोकने और फर्जी प्रक्रिया अपनाने का आरोप; 15वें वित्त के कार्यों पर विवाद

मुंगेली । जिले के ग्राम पंचायत देवगांव के सरपंच योगेश पटेल ने जनपद पंचायत मुंगेली के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) पर गंभीर आरोप लगाते हुए कलेक्टर को विस्तृत लिखित शिकायत सौंपी है। शिकायत में सरपंच ने आरोप लगाया है कि उनके विरुद्ध अवैध कार्रवाई की जा रही है, प्रशासनिक अधिकारों का दुरुपयोग हो रहा है और उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है।


क्या है पूरा मामला

सरपंच योगेश पटेल के अनुसार, पिछले एक माह से मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा ग्राम पंचायत देवगांव के कार्यों में अनावश्यक हस्तक्षेप किया जा रहा है। आरोप है कि पंचायत के विकास कार्यों के भुगतान पर रोक लगा दी गई है, जिससे गांव के विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं।

सरपंच का कहना है कि पंचायत सचिव और उनसे फर्जी तरीके से भुगतान कराने का दबाव बनाया जा रहा है, जबकि आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने के बाद ही भुगतान संभव है।


15वें वित्त आयोग के कार्यों पर विवाद

शिकायत में बताया गया है कि 15वें वित्त आयोग के तहत पंचायत में किए गए कई कार्यों का मूल्यांकन और सत्यापन पहले ही हो चुका है। इसके बावजूद—

  • भुगतान रोका गया है
  • कुछ कार्यों को अवैध बताकर कार्रवाई की जा रही है
  • वहीं उन्हीं कार्यों के लिए अलग पत्र में भुगतान करने के निर्देश दिए जा रहे हैं

इससे प्रशासनिक प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं।


किन कार्यों को लेकर विवाद

शिकायत पत्र में जिन कार्यों का उल्लेख है, वे इस प्रकार हैं—

  1. वार्ड क्रमांक 02 में बोर सफाई कार्य (छेदी पटेल के घर के पास)
  2. वार्ड 06, 08 एवं 13 में पाइप पुलिया निर्माण
  3. वार्ड 12 में नाली एवं चेंबर निर्माण (धनश्याम पटेल के घर के पास)
  4. वार्ड 13 में बोर खनन एवं पावर पंप स्थापना (अनुज पटेल के घर के पास)

सरपंच का कहना है कि इन कार्यों का सत्यापन हो चुका है, फिर भी इन्हें लेकर विरोधाभासी आदेश जारी किए जा रहे हैं।


पूर्व सरपंच के कार्यों को लेकर भी विवाद

शिकायत में उल्लेख है कि पूर्व सरपंच कलेश्वरी पटेल के कार्यों के भुगतान को लेकर भी भ्रम की स्थिति बनाई जा रही है।

एक ओर उन्हीं कार्यों के भुगतान के निर्देश दिए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उन्हीं कार्यों को वर्तमान सरपंच का बताकर कार्रवाई की जा रही है। इससे पूरे मामले में मिलीभगत और लेन-देन की आशंका जताई गई है।


फर्जी हस्ताक्षर और नोटिस का आरोप

सरपंच ने आरोप लगाया है कि—

  • तकनीकी सत्यापन के नाम पर फर्जी हस्ताक्षर किए जा रहे हैं
  • राशि आहरण के लिए दबाव बनाया जा रहा है
  • उन्हें और पंचायत सचिव को कारण बताओ नोटिस जारी कर मानसिक दबाव डाला जा रहा है

विकास कार्य ठप होने का दावा

सरपंच का कहना है कि इस पूरे विवाद के कारण पंचायत के सभी विकास कार्य प्रभावित हो गए हैं। गांव में निर्माण और भुगतान से जुड़े कार्य रुक गए हैं, जिससे आम जनता को परेशानी हो रही है।


कलेक्टर से की यह मांग

सरपंच योगेश पटेल ने कलेक्टर मुंगेली से मांग की है कि—

  • पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए
  • प्रशासनिक दुरुपयोग की जांच हो
  • दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए
  • पंचायत के लंबित भुगतान जल्द जारी किए जाएं

दस्तावेज भी किए संलग्न

शिकायत के साथ सरपंच ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज संलग्न किए हैं, जिनमें—

  • पत्र क्रमांक 4281 (20.02.2026)
  • पत्र क्रमांक 4704 (02.03.2026)
  • कारण बताओ नोटिस और उसके जवाब
  • अन्य संबंधित अभिलेख

यह मामला पंचायत स्तर पर प्रशासनिक हस्तक्षेप, वित्तीय पारदर्शिता और अधिकारों के दुरुपयोग जैसे गंभीर मुद्दों को उजागर करता है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह स्थानीय प्रशासनिक व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर सकता है।

अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस शिकायत पर क्या कार्रवाई करता है और क्या पंचायत स्तर पर चल रहा विवाद सुलझ पाता है या नहीं।


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