फर्जी नौकरी और मेडिकल डिग्री रैकेट का बड़ा खुलासा, 2.34 करोड़ की ठगी में मास्टरमाइंड गिरफ्तार

0
IMG-20260408-WA0968

रायपुर। राजधानी रायपुर में नौकरी दिलाने और फर्जी मेडिकल डिग्री बनाने के नाम पर करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का पुलिस ने बड़ा पर्दाफाश किया है। मामले में अब तक 6 आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने मुख्य मास्टरमाइंड सुनील प्रताप को नई दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया है। इस कार्रवाई के बाद पूरे नेटवर्क के कई अहम खुलासे सामने आए हैं।

नौकरी और डिग्री के नाम पर सुनियोजित ठगी

प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्रार्थी संजय निराला ने 17 फरवरी 2026 को थाना सिविल लाइन में शिकायत दर्ज कराई थी कि कुछ लोगों ने पोस्ट ऑफिस में नौकरी लगाने और फर्जी शैक्षणिक प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने के नाम पर उनसे और उनके परिचितों से कुल 2 करोड़ 34 लाख रुपये की ठगी की है। शिकायत के आधार पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू की।

पहले 6 आरोपी गिरफ्तार, पूछताछ में खुला राज

जांच के दौरान पुलिस ने पहले भुनेश्वर बंजारे, नरेश मनहर, हीरा दिवाकर, राकेश रात्रे, साक्षी सिंह और अंकित तिवारी को गिरफ्तार किया था। इनसे पूछताछ और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर गिरोह के अन्य सदस्यों की जानकारी मिली। विशेष रूप से साक्षी सिंह से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस को दिल्ली में सक्रिय मास्टरमाइंड सुनील प्रताप के बारे में सुराग मिला।

NTPC World Environment Day

दिल्ली से दबोचा गया मास्टरमाइंड

पुलिस टीम ने दिल्ली में दबिश देकर सुनील प्रताप को गिरफ्तार किया। आरोपी के पास से एक मोबाइल फोन और कई फर्जी दस्तावेज बरामद किए गए हैं। पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि वह इस पूरे नेटवर्क का संचालन कर रहा था और विभिन्न राज्यों के लोगों को निशाना बनाकर ठगी को अंजाम दे रहा था।

फर्जी मेडिकल डिग्रियों का बड़ा नेटवर्क

जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि आरोपी डी.वाई. पाटिल विद्यापीठ, पुणे के नाम पर फर्जी एमबीबीएस और बीएएमएस डिग्रियां तैयार कर रहा था। अब तक करीब 30 से अधिक लोगों के लिए इस तरह की फर्जी डिग्रियां तैयार की जा चुकी हैं। इन डिग्रियों का उपयोग नौकरी और अन्य लाभ प्राप्त करने के लिए किया जाता था।

बेरोजगार युवाओं को बनाया निशाना

पुलिस के अनुसार, गिरोह खासतौर पर बेरोजगार युवाओं को निशाना बनाता था। उन्हें सरकारी नौकरी दिलाने का लालच देकर बड़ी रकम वसूली जाती थी। साथ ही, फर्जी डिग्री देकर उन्हें भरोसा दिलाया जाता था कि उनकी नौकरी सुनिश्चित हो जाएगी।

संगठित गिरोह, कई राज्यों में फैला नेटवर्क

यह गिरोह अंतरराज्यीय स्तर पर सक्रिय था और विभिन्न राज्यों में अपने एजेंटों के माध्यम से लोगों को फंसाता था। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश कर रही है और पूरे मामले की गहराई से जांच जारी है।

पुलिस का बयान

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह एक संगठित और सुनियोजित ठगी का मामला है, जिसमें तकनीक और फर्जी दस्तावेजों का बड़े पैमाने पर उपयोग किया गया। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है और जल्द ही इस गिरोह से जुड़े अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया जाएगा।

इस कार्रवाई के बाद पुलिस ने लोगों से अपील की है कि नौकरी या डिग्री के नाम पर किसी भी प्रकार के लालच में न आएं और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Advertisement Carousel

Latest News

error: Content is protected !!