स्क्रैप बेचकर रेलवे ने कमाए 6,813 करोड़ से अधिक, लक्ष्य से कहीं आगे निकली कमाई

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नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने रविवार को जानकारी दी कि भारतीय रेलवे ने वित्त वर्ष 2025–26 में कबाड़ (स्क्रैप) बेचकर 6,813.86 करोड़ रुपए की रिकॉर्ड कमाई की है। यह आंकड़ा निर्धारित 6,000 करोड़ रुपए के लक्ष्य से काफी अधिक है, जो रेलवे की मजबूत वित्तीय रणनीति को दर्शाता है।

रेलवे द्वारा स्क्रैप मॉनिटाइजेशन के क्षेत्र में लगातार बेहतर प्रदर्शन किया जा रहा है। इससे पहले वित्त वर्ष 2024–25 में भी रेलवे ने 5,400 करोड़ रुपए के लक्ष्य के मुकाबले 6,641.78 करोड़ रुपए की आय अर्जित की थी। लगातार मिल रही इस सफलता से स्पष्ट है कि रेलवे अपने डिपो, यार्ड और वर्कशॉप में पड़े अनुपयोगी व पुराने संसाधनों का प्रभावी उपयोग कर रहा है।

अधिकारियों के अनुसार, इस पहल से रेलवे की आर्थिक स्थिति को मजबूती मिल रही है। साथ ही, पुराने कबाड़ के निपटान से रेलवे परिसरों में जगह खाली हो रही है और रीसाइक्लिंग के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिल रहा है। पारदर्शी प्रक्रिया के जरिए स्क्रैप निस्तारण से कार्यप्रणाली में भी सुधार आया है।

नॉन-फेयर रेवेन्यू में भी तेजी
स्क्रैप से कमाई के साथ-साथ टिकट के अलावा होने वाली आय (नॉन-फेयर रेवेन्यू) भी रेलवे की वित्तीय स्थिति को मजबूत कर रही है। स्टेशन विकास, विज्ञापन और रेलवे संपत्तियों के व्यावसायिक उपयोग से होने वाली आय में पिछले पांच वर्षों में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है।

वित्त वर्ष 2021–22 में यह आय लगभग 290 करोड़ रुपए थी, जो 2025–26 में बढ़कर 777.76 करोड़ रुपए तक पहुंच गई है। इस प्रकार करीब 168 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

सरकार का कहना है कि इस अतिरिक्त आय का उपयोग रेलवे के आधुनिकीकरण और यात्रियों की सुविधाओं को बेहतर बनाने में किया जा रहा है। इसमें स्टेशन सुविधाओं का उन्नयन, स्वच्छता, डिजिटल सेवाओं का विस्तार और सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करना शामिल है। खास बात यह है कि ये सुधार बिना यात्री किराया बढ़ाए किए जा रहे हैं।

स्टेशनों पर प्रीमियम ब्रांडेड दुकानों की शुरुआत
नॉन-फेयर रेवेन्यू बढ़ाने के उद्देश्य से रेलवे ने स्टेशनों पर प्रीमियम ब्रांडेड दुकानों की शुरुआत भी की है। इसके तहत सिंगल-ब्रांड आउटलेट्स के लिए कंपनियों को ठेके दिए गए हैं और अब तक 22 प्रीमियम ब्रांड्स को स्थान आवंटित किया जा चुका है।

इन पहलों से जहां यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिल रही हैं, वहीं रेलवे की आय के नए स्रोत भी विकसित हो रहे हैं, जिससे भविष्य में और अधिक सुधार की संभावनाएं मजबूत हुई हैं।

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