पचपेड़ी स्वास्थ्य केंद्र की बाउंड्री वॉल निर्माण में खुलकर हो रहा भ्रष्टाचार, गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल
रिपोर्टर ✒️ रूपचंद रॉय
मस्तूरी/बिलासपुर। बिलासपुर जिले के मस्तूरी तहसील अंतर्गत स्थित पचपेड़ी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में निर्माणाधीन बाउंड्री वॉल को लेकर गंभीर अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए हैं। स्थानीय ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि निर्माण कार्य में निर्धारित मानकों की अनदेखी कर घटिया सामग्री का उपयोग किया जा रहा है, जिससे सरकारी धन की खुलेआम बर्बादी हो रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि स्वास्थ्य केंद्र की सुरक्षा और परिसर की व्यवस्था को बेहतर बनाने के उद्देश्य से बाउंड्री वॉल का निर्माण कराया जा रहा है, लेकिन निर्माण एजेंसी द्वारा गुणवत्ता संबंधी नियमों को दरकिनार कर कार्य किया जा रहा है। आरोप है कि निर्माण में उपयोग की जा रही ईंटें कमजोर हैं, सीमेंट की मात्रा मानक के अनुरूप नहीं है तथा रेत की गुणवत्ता भी बेहद खराब है।
निर्माण पूरा होने से पहले दिखने लगी खामियां
स्थानीय लोगों के अनुसार अभी निर्माण कार्य पूरी तरह समाप्त भी नहीं हुआ है, लेकिन कई स्थानों पर दीवार में दरारें दिखाई देने लगी हैं। कुछ हिस्सों में प्लास्टर उखड़ने और दीवार की मजबूती कमजोर होने की शिकायतें भी सामने आई हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते गुणवत्ता की जांच नहीं कराई गई तो भविष्य में दीवार के गिरने की आशंका बनी रहेगी, जिससे अस्पताल आने वाले मरीजों, परिजनों और कर्मचारियों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।
अधिकारियों की भूमिका पर उठ रहे सवाल
ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि निर्माण कार्य में हो रही कथित अनियमितताओं की जानकारी संबंधित विभागीय अधिकारियों को होने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। इससे अधिकारियों और ठेकेदार के बीच मिलीभगत की आशंका जताई जा रही है। लोगों का कहना है कि यदि नियमित निरीक्षण और गुणवत्ता परीक्षण किया जाता तो ऐसी स्थिति उत्पन्न नहीं होती।
जनता में नाराजगी, उच्च स्तरीय जांच की मांग
निर्माण कार्य को लेकर क्षेत्र के लोगों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि पूरे निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कराई जाए तथा गुणवत्ता मानकों की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाए। साथ ही दोषी पाए जाने वाले ठेकेदार और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार और लापरवाही के कारण विकास कार्यों की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है, जिसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ता है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो वे जनआंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।
जांच के बाद ही सामने आएगी सच्चाई
हालांकि निर्माण कार्य में अनियमितताओं के आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। मामले में संबंधित विभाग और निर्माण एजेंसी का पक्ष सामने आना अभी बाकी है। तकनीकी जांच और विभागीय परीक्षण के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि निर्माण कार्य में वास्तव में गुणवत्ता संबंधी मानकों का पालन किया गया है या नहीं।

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