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साइबर ठगी के म्यूल अकाउंट नेटवर्क पर बेमेतरा पुलिस का बड़ा प्रहार, मास्टरमाइंड सहित कई आरोपियों पर शिकंजा

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बेमेतरा। साइबर अपराधों के बढ़ते मामलों के बीच बेमेतरा पुलिस ने ऑनलाइन ठगी में प्रयुक्त होने वाले म्यूल अकाउंट नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए एक महत्वपूर्ण आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि साइबर ठगी से प्राप्त रकम को विभिन्न बैंक खातों के माध्यम से खपाने और ट्रांसफर करने का संगठित नेटवर्क सक्रिय था। मामले में पहले गिरफ्तार किए जा चुके आरोपियों के अलावा अब एक अन्य आरोपी को भी गिरफ्तार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया गया है। पुलिस का दावा है कि यह कार्रवाई साइबर ठगों की आर्थिक गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

पुलिस उप महानिरीक्षक रामकृष्ण साहू (आईपीएस) के निर्देशन तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक हरीश कुमार यादव, एसडीओपी बेमेतरा भूषण एक्का एवं एसडीओपी बेरला विनय कुमार के मार्गदर्शन में जिले में साइबर अपराधियों और उनके सहयोगियों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। इसी अभियान के तहत थाना सिटी कोतवाली बेमेतरा पुलिस ने म्यूल अकाउंट के माध्यम से साइबर ठगी की रकम के लेन-देन का खुलासा किया।

क्या होता है म्यूल अकाउंट?

पुलिस अधिकारियों के अनुसार म्यूल अकाउंट ऐसे बैंक खाते होते हैं जिनका उपयोग साइबर अपराधी अपनी पहचान छिपाने और ठगी की रकम को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने के लिए करते हैं। इसके लिए लोगों को कमीशन, नौकरी या लोन दिलाने का झांसा देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाए जाते हैं। बाद में इन्हीं खातों में साइबर ठगी से प्राप्त रकम जमा कर उसे विभिन्न माध्यमों से निकाल लिया जाता है।

बैंक खाते की जांच में सामने आया मामला

पुलिस को विश्वस्त सूत्रों से सूचना मिली थी कि इंडियन बैंक शाखा बेमेतरा का एक खाता साइबर ठगी की रकम के लेन-देन में इस्तेमाल किया जा रहा है। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने बैंक प्रबंधन से संपर्क कर खाते की जानकारी प्राप्त की। जांच में पता चला कि संबंधित खाता ग्राम मुरता निवासी धर्मराज साहू के नाम पर संचालित है।

बैंक स्टेटमेंट की जांच में यह सामने आया कि खाते में लाखों रुपये का लेन-देन हुआ है। खाते में जमा और निकासी की राशि का विश्लेषण करने पर एक संदिग्ध ट्रांजेक्शन भी सामने आया, जिसके बाद पुलिस ने पूरे मामले की गहन जांच शुरू कर दी।

लोन दिलाने के नाम पर खुलवाए गए खाते

विवेचना के दौरान धर्मराज साहू से पूछताछ की गई। उसने बताया कि गांव के कुछ लोगों ने उसे लोन दिलाने का भरोसा देकर अलग-अलग बैंकों में खाते खुलवाए थे। खाते खुलवाने के बाद बैंक पासबुक, एटीएम कार्ड और मोबाइल सिम अपने कब्जे में रख लिए गए और उन्हीं खातों का उपयोग संदिग्ध लेन-देन के लिए किया गया।

जांच में यह भी सामने आया कि खातों में आने वाली रकम वास्तव में साइबर धोखाधड़ी से प्राप्त राशि थी, जिसे विभिन्न खातों के माध्यम से आगे ट्रांसफर किया जाता था। पुलिस ने इस मामले में पहले ही धर्मराज साहू, संतोष कुमार साहू और एक अन्य आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया था।

कमीशन के बदले खुलवाए जाते थे बैंक खाते

पुलिस जांच आगे बढ़ी तो एक संगठित नेटवर्क का खुलासा हुआ। जांच में पता चला कि कुछ लोग ग्रामीण और कम जानकारी रखने वाले व्यक्तियों को कमीशन का लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाते थे। इसके बाद खाते से जुड़े सभी दस्तावेज अपने पास रखकर साइबर ठगी की रकम का लेन-देन करते थे।

पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपी सैंकी दरड़ा इस नेटवर्क की महत्वपूर्ण कड़ी था। वह विभिन्न लोगों के बैंक खाते खुलवाकर उनके दस्तावेज और एटीएम कार्ड अपने कब्जे में लेता था तथा उन खातों में साइबर अपराध से प्राप्त रकम ट्रांसफर कराता था।

केंद्रीय जेल से लाकर की गई गिरफ्तारी

जांच में पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद पुलिस ने आरोपी सैंकी दरड़ा (38 वर्ष) निवासी साई विस्टा कॉलोनी, महावीर नगर, न्यू राजेंद्र नगर, रायपुर के खिलाफ कार्रवाई की। आरोपी पहले से केंद्रीय जेल रायपुर में निरुद्ध था। पुलिस ने न्यायालय से प्रोडक्शन वारंट प्राप्त कर उसे जेल से बेमेतरा लाया और पूछताछ के बाद मामले में विधिवत गिरफ्तार कर लिया।

13 जून 2026 को आरोपी को न्यायालय में प्रस्तुत किया गया, जहां से उसे न्यायिक प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई के लिए भेजा गया।

पासबुक, एटीएम और मोबाइल जब्त

मामले की जांच के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और उपकरण बरामद किए हैं। जब्त सामग्री में 5 बैंक पासबुक, 2 चेकबुक, 8 एटीएम कार्ड और 2 मोबाइल फोन शामिल हैं। पुलिस इन सभी दस्तावेजों और डिजिटल उपकरणों की जांच कर रही है ताकि साइबर ठगी के नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की पहचान की जा सके।

अन्य आरोपियों की तलाश जारी

पुलिस का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और इसमें कई अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आने की संभावना है। बैंक खातों के लेन-देन, मोबाइल डेटा और अन्य तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण किया जा रहा है। जांच पूरी होने के बाद और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

साइबर अपराध के खिलाफ लगातार अभियान

बेमेतरा पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी व्यक्ति को अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, पासबुक या मोबाइल सिम किराए पर न दें और न ही किसी के कहने पर खाते खुलवाकर उसके दस्तावेज किसी अन्य को सौंपें। पुलिस ने कहा कि ऐसे मामलों में खाते का उपयोग अवैध गतिविधियों के लिए होने पर खाता धारक भी कानूनी कार्रवाई के दायरे में आ सकता है।

पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि साइबर ठगी के नेटवर्क को तोड़ने और अपराधियों तक पहुंचने के लिए केवल ठगों की गिरफ्तारी ही नहीं, बल्कि उनके आर्थिक तंत्र को भी ध्वस्त करना आवश्यक है। इसी उद्देश्य से जिले में म्यूल अकाउंट संचालकों और उनके सहयोगियों के खिलाफ विशेष अभियान जारी रहेगा।

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