देश के नये सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत को आज महामहिम राष्ट्रपति ने दिलाई शपथ


अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट
नई दिल्ली । जस्टिस सूर्यकांत ने भारत के तिरपनवें मुख्य न्यायाधीश के तौर पर शपथ ले ली है , महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें राष्ट्रपति भवन में भारत के नये मुख्य न्यायाधीश पद की शपथ दिलाई। वे सुप्रीम कोर्ट के मुखिया के पद पर पहुंचने वाले हरियाणा के पहले न्यायाधीश हैं जो वकालत के क्षेत्र से अपने केरियर की शुरूआत कर देश के सर्वोच्च न्यायिक पद तक पहुंचे हैं। इन्होंने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में कई महत्वपूर्ण फैसले दिये थे , वहीं सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में भी इनका कार्यकाल कई ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण फैसलों के लिये जाना जाता है। यह शपथ समारोह ऐतिहासिक रहा , क्योंकि जस्टिस सूर्यकांत के शपथ ग्रहण समारोह में सात देशों के न्यायाधीश शामिल हुये थे। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी , केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह , रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह , वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल , लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला , भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा , पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद , पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ , पूर्व मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई समेत कई गणमान्य मौजूद रहे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जस्टिस सूर्यकांत को भारत के प्रधान न्यायाधीश के पद पर पहुंचने की बधाई दी।
सीजेआई सूर्यकांत का पूरा सफर –
सीजेआई सूर्यकांत का जन्म 10 फरवरी 1962 को हरियाणा के एक मिडिल क्लास परिवार में हुआ था। इन्होंने हिसार के सरकारी स्कूल में पढ़ाई की और वर्ष 1981 में हिसार के गवर्नमेंट पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज से ग्रेजुएशन की। इन्होंने वर्ष 1984 में रोहतक के महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय से लॉ की डिग्री हासिल करने के बाद इन्होंने वर्ष वर्ष 1985 में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में प्रैक्टिस शुरू की और वर्ष 2011 में कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से मास्टर्स की डिग्री हासिल की। ये कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से लॉ मास्टर्स में “प्रथम श्रेणी में प्रथम” स्थान प्राप्त करने का गौरव भी रखते हैं। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में इन्होंने कई तरह के संवैधानिक – सर्विस और सिविल मामलों को सम्हाला , जिसमें यूनिवर्सिटी , बोर्ड , कॉर्पोरेशन , बैंक और यहां तक कि खुद हाईकोर्ट को भी रिप्रेजेंट किया। जुलाई 2000 में सूर्यकांत को हरियाणा का सबसे कम उम्र का एडवोकेट जनरल बनाया गया। इसके बाद वर्ष 2001 में उन्हें सीनियर एडवोकेट बनाया गया और 09 जनवरी 2004 को पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट का परमानेंट जज बनाया गया। इन्होंने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में प्रैक्टिस की और कई महत्वपूर्ण फैसलों से जुड़ी बेंच का हिस्सा रहे हैं। जस्टिस सूर्यकांत ने अक्टूबर 2018 से 24 मई 2019 को सुप्रीम कोर्ट में अपनी पदोन्नति तक हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के तौर पर काम किया। नवंबर 2024 से वे सुप्रीम कोर्ट लीगल सर्विसेज कमेटी के चेयरमैन के तौर पर काम कर रहे थे , जस्टिस सूर्यकांत कई अहम फैसलों में सुप्रीम कोर्ट की बेंच का हिस्सा रह चुके हैं। ये अनुच्छेद 370 को निरस्त करने , अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और नागरिकता के अधिकारों से संबंधित अपने फैसलों के लिये जाने जाते हैं। ये उस बेंच के हिस्सा थे जिसने औपनिवेशिक युग के राजद्रोह कानून पर रोक लगा दी थी और निर्देश दिया था कि जब तक सरकार इसकी समीक्षा नहीं करती , तब तक इसके तहत कोई नई एफआईआर दर्ज नहीं की जायेगी। ये उस बेंच के भी हिस्सा थे जिसने राज्य विधानसभा द्वारा पारित विधेयकों से निपटने में राज्यपाल और राष्ट्रपति की शक्तियों के संबंध में राष्ट्रपति की सलाहकार याचिका पर सुनवाई की थी। इस फैसले का सभी राज्यों पर व्यापक प्रभाव पड़ने की उम्मीद है। इन्होंने चुनाव आयोग को एसआईआर के दौरान निकाले गये पैंसठ लाख वोटरों की सूची जारी करने का आदेश दिया था। सोमवार 24 नवंबर 2025 को उन्हें देश के मुख्य न्यायाधीश के तौर पर शपथ दिलाई गई। इनका कार्यकाल 09 फरवरी 2027 तक लगभग पंद्रह महीने का होगा।

The News Related To The News Engaged In The https://apnachhattisgarh.com Web Portal Is Related To The News Correspondents The Editor Does Not Necessarily Agree With These Reports The Correspondent Himself Will Be Responsible For The News.




