‘बिहान’ से सुकमा की महिलाओं को मिली आत्मनिर्भरता की नई राह

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कोंटा की 14 महिला स्व-सहायता समूहों को मिला 39.50 लाख रुपये का बैंक लिंकेज ऋण

रायपुर । छत्तीसगढ़ सरकार की ‘बिहान’ योजना ग्रामीण महिलाओं के जीवन में आर्थिक बदलाव का प्रभावी माध्यम बन रही है। स्व-सहायता समूहों के जरिए महिलाओं को संगठित कर उन्हें बचत, बैंकिंग, कौशल विकास और स्वरोजगार से जोड़ा जा रहा है। इससे महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत होने के साथ अपने परिवार की जरूरतों को पूरा करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

दक्षिण बस्तर के सुकमा जिले के दूरस्थ वनांचल क्षेत्र में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ महिलाओं के जीवन में आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रहा है। कलेक्टर अमित कुमार के निर्देशन और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी मुकुंद ठाकुर के मार्गदर्शन में जनपद पंचायत कोंटा की 14 महिला स्व-सहायता समूहों को कुल 39.50 लाख रुपये का बैंक लिंकेज ऋण प्रदान किया गया है। यह ऋण महिला समूहों के लिए केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि आजीविका को विस्तार देने और परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने का महत्वपूर्ण अवसर है।

छोटे कारोबार को मिलेगा बड़ा सहारा

बैंक लिंकेज ऋण मिलने के बाद महिला स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं में उत्साह और आत्मविश्वास बढ़ा है। ऋण की राशि का उपयोग महिलाएं कृषि, पशुपालन, सिलाई और स्थानीय स्तर पर संचालित छोटे व्यवसायों को बढ़ाने में करेंगी।

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इन गतिविधियों के विस्तार से महिलाओं के लिए आय के अतिरिक्त साधन विकसित होंगे। नियमित आमदनी बढ़ने से वे परिवार की दैनिक जरूरतों, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य खर्चों में आर्थिक सहयोग कर सकेंगी। साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार की संभावनाएं भी मजबूत होंगी।

बच्चों की पढ़ाई और परिवार के भविष्य को मिलेगी मजबूती

स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं का कहना है कि आजीविका के साधन मजबूत होने से वे अपने बच्चों की पढ़ाई और परिवार की जरूरतों को बेहतर तरीके से पूरा कर सकेंगी। आर्थिक आत्मनिर्भरता से महिलाओं के निर्णय लेने की क्षमता भी बढ़ रही है।

‘बिहान’ के माध्यम से महिलाएं नियमित बचत, समूह संचालन, बैंकिंग गतिविधियों और सामूहिक आर्थिक निर्णयों से जुड़ रही हैं। इससे उनमें वित्तीय समझ विकसित होने के साथ भविष्य के लिए बेहतर आर्थिक योजना बनाने की क्षमता भी बढ़ रही है।

बैंकिंग और वित्तीय अनुशासन की सीख

ऋण वितरण के दौरान प्रशासन और बैंक अधिकारियों ने महिला समूहों से संवाद किया। उन्हें ऋण की राशि का उपयोग ऐसी गतिविधियों में करने की सलाह दी गई, जिनसे नियमित आय में वृद्धि हो सके। साथ ही ऋण की किश्त समय पर जमा करने, नियमित बचत करने और वित्तीय अनुशासन बनाए रखने के संबंध में भी जानकारी दी गई।

बैंकिंग व्यवस्था से लगातार जुड़े रहने से महिलाओं की वित्तीय समझ और बैंकिंग संस्थाओं के प्रति विश्वास मजबूत होगा। इससे भविष्य में समूहों को आवश्यकता के अनुसार अन्य वित्तीय सुविधाओं का लाभ लेने में भी मदद मिल सकती है।

‘बिहान’ बन रहा बदलाव का माध्यम

सुकमा जैसे वनांचल जिले में ‘बिहान’ ग्रामीण महिलाओं को संगठित कर उन्हें आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने का काम कर रहा है। योजना के माध्यम से महिलाओं को बचत, बैंक लिंकेज, स्वरोजगार और आजीविका के विभिन्न अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

अब महिलाएं केवल घरेलू जिम्मेदारियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि समूह की सामूहिक शक्ति के माध्यम से आर्थिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी निभा रही हैं। इससे उनके भीतर आत्मविश्वास बढ़ रहा है और परिवार के आर्थिक निर्णयों में उनकी भूमिका मजबूत हो रही है।

प्रशासन और बैंक के समन्वय से बढ़ी महिलाओं की ताकत

इस पहल में जनपद पंचायत कोंटा के विकास विस्तार अधिकारी गोपाल नेताम, छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक कोंटा के शाखा प्रबंधक रामाकृष्णा, प्रभारी बीपीएम अरविंद कुमार, संकुल समन्वयक रुकमणी कर्मा और आरती बघेल सहित संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

प्रशासन और बैंक के समन्वित प्रयास से महिला स्व-सहायता समूहों को समय पर ऋण सुविधा उपलब्ध हो सकी। इससे समूहों की आर्थिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने और ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण सहयोग मिला है।

आर्थिक आत्मनिर्भरता से बदल रही गांवों की तस्वीर

सुकमा जिले की इन महिला स्व-सहायता समूहों की पहल यह दर्शाती है कि सरकारी योजनाओं, बैंकिंग सहयोग और उचित मार्गदर्शन का प्रभावी समन्वय ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत कर सकता है। महिलाओं को जब पूंजी, प्रशिक्षण और समूह की ताकत मिलती है तो वे न केवल अपनी आय बढ़ाने में सक्षम होती हैं, बल्कि परिवार के साथ-साथ गांव की आर्थिक गतिविधियों को भी गति देती हैं।

‘बिहान’ के माध्यम से सुकमा के वनांचल क्षेत्रों में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का यह प्रयास आर्थिक सशक्तिकरण के साथ उनके सामाजिक आत्मविश्वास को भी नई दिशा दे रहा है। 14 महिला स्व-सहायता समूहों को मिला 39.50 लाख रुपये का बैंक लिंकेज ऋण आने वाले समय में उनकी आजीविका को विस्तार देने और परिवारों के आर्थिक भविष्य को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

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