भगवान की श्वांस और भक्तों का विश्वास है गीता – योगेश तिवारी।

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अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट
रायपुर । गीता पूरे विश्व में सनातन धर्म का अलौकिक ग्रंथ है , जो समस्त वेद वेदांत उपनिषदों का सार सर्वस्व है। क्रांतिकारी समाज के निर्माण में गीता परम प्रेरणा दायी सत्य , न्याय, नीति के लिये संघर्ष की प्रेरणा देती हैं। इस महान महिमा मय गीता शास्त्र के श्रवण मनन , चिंतन के द्वारा पुरुषार्थ चतुष्टय की प्राप्ति संभव है। जीवन में धर्म , अर्थ , काम , मोक्ष चारों पुरुषार्थों को वास्तविक रूप में धारण करना हो तो गीता शास्त्र का प्रतिदिन अध्ययन करे। युवा पीढ़ी को सत्यनिष्ठा , कर्तव्य परायण , धर्मनिष्ठ , संघर्षशील , सेवा परायण , राष्ट्रभक्त बनाने के लिये गीता परम उपयोगी है , जो मानव मात्र के लिये कल्याणकारी है।
                                उक्त बातें विश्व की सबसे बड़ी गो सेवा संगठन के छत्तीसगढ़ प्रदेश सचिव योगेश तिवारी ने आज मोक्षदा एकादशी के पावन अवसर पर गो भक्तों को संबोधित करते हुये कही। आज संगठन द्वारा गीता जयंती महोत्सव उल्लास पूर्वक मनाया गया। इस पुनीत अवसर पर पूजा , आराधना , गीता पाठ के पश्चात प्रदेश सचिव योगेश तिवारी के सुमधुर वाणी द्वारा गीता के महत्व तथा वर्तमान समय में उनकी उपयोगिता पर विशेष आध्यात्मिक संदेश श्रवण का लाभ प्राप्त हुआ। उन्होंने बताया कि जब अर्जुन मोह ग्रस्त हो गया विषाद के स्थिति में पलायन वादी बनकर युद्ध के मैदान में गांडीव त्याग दिया , तब भगवान कृष्ण ने मोह विद्या कर्तृत्वा भिमान को मिटाने हेतु गीता के ज्ञानोंपदेश के माध्यम से सत्य , धर्म , न्याय , नीति की स्थापना के लिये धर्ममार्ग में चलकर संघर्ष करने की प्रेरणा दी और विजय श्री प्राप्त करने मे पांडव सफल हुये। प्रदेश सचिव ने कहा कि हर धर्म का एक ग्रंथ होता है उसी तरह से हिंदू सनातन धर्म में गीता को पवित्र धर्मग्रंथ का स्थान दिया गया है। गीता भगवान कृष्ण के द्वारा महाभारत के युद्ध के समय किसी धर्म विशेष के लिये नहीं अपितु मनुष्य मात्र के लिये दिया गया उपदेश है जो हमें धैर्य , दु:ख , लोभ , अज्ञानता से बाहर निकलने के लिये प्रेरित करता है। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता मानव जीवन की सबसे बड़ी पथ प्रदर्शिका है। गीता भड़काने वाला ग्रंथ नहीं अपितु भटके हुये मानव को उसके कर्त्तव्य पथ का बोध कराने वाला ग्रंथ है। जीवन का कोई ऐसा प्रश्न नहीं जिसका उत्तर श्रीमद्भगवद्गीता में निहित ना हो। विषाद से प्रसाद की यात्रा , भोग से योग की यात्रा एवं प्रमाद से अह्लाद की यात्रा कराने वाला ग्रंथ ही गीता है। गीता हमारे मंगलमय जीवन का पवित्र ग्रंथ और ज्ञान का अद्भुत भंडार है। गीता भगवान की श्वाँस और भक्तों का विश्वास है। यह केवल ग्रंथ नहीं बल्कि कलियुग के पापों का क्षय करने का अद्भुत और अनुपम माध्यम है। गीता भक्तों के प्रति भगवान द्वारा प्रेम में गाया हुआ गीत है। गीता एक ओर जहाँ मरना सिखाती है वहीं दूसरी ओर जीवन को धन्य भी बनाती है। जीवन में धैर्यता की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुये उन्होंने कहा गीता में वर्णित हर श्लोक में जीवन जीने की अद्भुत कला के साथ – साथ हर परिस्थिति से धैर्यपूर्वक निपटने की कला भी बतायी गयी है। आज हम सब हर काम में तुरंत नतीजा चाहते हैं लेकिन भगवान ने कहा है कि धैर्य के बिना अज्ञान , दुख , मोह , क्रोध , काम और लोभ से निवृत्ति नहीं मिलेगी। गो सेवा संगठन के छत्तीसगढ़ प्रदेश सचिव योगेश तिवारी ने अंत में गीता के पठन – पाठन और व्यापक प्रचार प्रसार पर जोर देते हुये कहा कि गीता एक दिव्य ग्रंथ है जो हमें पलायन से पुरुषार्थ की ओर अग्रसर होने की प्रेरणा देती है। भगवद्‍गीता के पठन-पाठन श्रवण एवं मनन-चिंतन से जीवन में श्रेष्ठता के भाव आते हैं। गीता केवल लाल कपड़े में बाँधकर घर में रखने के लिये नहीं , बल्कि उसे पढ़कर संदेशों को आत्मसात करने के लिये है। इसी ज्ञान के कारण ही भारत विश्व गुरु रहा है , जो अमूल्य निधि भारत ही नहीं पूरे विश्व के लिये परम धरोहर है। इसमें जीवन में आने वाली हर समस्या का हल दिया गया है यानि गीता का पाठ समस्त समस्याओं का समाधान भी कर देता है। गीता हम सभी को सही तरीके से जीवन जीने की कला सिखाती है। जीवन उत्थान के लिये हर व्यक्ति को इसका स्वाध्याय करना ही चाहिये। इसके अलावा इस अनुपम ज्ञान का अधिक से अधिक हम सब प्रचार प्रसार करें जिससे सनातन धर्म संस्कृति के प्रति आस्था निष्ठा प्रेम विश्वास बढ़े और जिससे समाज और राष्ट्र का सर्वविध उत्कर्ष हो सके। इस अवसर पर गो सेवा संगठन के देश भर के पदाधिकारी , सदस्यगण एवं श्रद्धालु भक्तजन सहित राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय पदाधिकारी गण विशेष रूप से उपस्थित थे।

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