स्कूलों के सतत निरीक्षण पर शिक्षा मंत्री सख्त: कहा—समर्पित शिक्षकों की जरूरत, संसाधनों की नहीं निरीक्षण ऐप लांच, तीन वर्षीय कार्ययोजना और बायोमेट्रिक उपस्थिति अनिवार्य शैक्षणिक गुणवत्ता सुधार हेतु 10वीं—85% और 12वीं—90% परिणाम का लक्ष्य निर्धारित

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रिपोर्टर ✒️ रूपचंद रॉय

बिलासपुर। स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने स्पष्ट कहा है कि राज्य में शिक्षकों और संसाधनों की कोई कमी नहीं है, बल्कि जरूरत अपने स्कूलों के प्रति प्रेम और जिम्मेदारी निभाने वाले समर्पित शिक्षकों की है। मंत्री यादव गुरुवार को जिला कार्यालय स्थित मंथन सभाकक्ष में बिलासपुर संभाग के अधिकारियों की समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने स्कूल निरीक्षण के लिए विकसित विशेष मोबाइल ऐप को भी लांच किया।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। अच्छे कार्य करने वाले शिक्षकों का सम्मान होगा, जबकि लापरवाही और उदासीनता को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बैठक में स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव सिद्धार्थ कोमल सिंह परेदशी, समग्र शिक्षा की एमडी डॉ. प्रियंका शुक्ला, डीपीआई ऋतुराज रघुवंशी सहित संभाग के आठों जिलों के डीईओ, डीएमसी, बीईओ और बीआरसी अधिकारी उपस्थित रहे।

तीन वर्षीय समग्र कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश
मंत्री यादव ने सभी जिलों को आगामी तीन वर्षों के लिए एक समग्र कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विद्यालय अधोसंरचना को मजबूत करना, शैक्षणिक वातावरण को प्रभावी बनाना और शिक्षण गुणवत्ता में ठोस सुधार सुनिश्चित करना आवश्यक है। बच्चों की शिक्षा में किसी भी प्रकार की लापरवाही को अस्वीकार्य बताया गया।

ऑनलाइन बायोमेट्रिक उपस्थिति अब अनिवार्य
मंत्री ने शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए ऑनलाइन बायोमेट्रिक उपस्थिति को अनिवार्य करने पर जोर दिया। उन्होंने डीईओ, बीईओ एवं बीआरसी अधिकारियों को नियमित विद्यालय निरीक्षण, दौरा-चार्ट तैयार कर उसका कड़ाई से पालन कराने के निर्देश दिए, ताकि स्कूलों में शैक्षणिक गतिविधियाँ नियमित और प्रभावी तरीके से संचालित हो सकें।

वार्षिक परीक्षा परिणामों में बड़ा लक्ष्य
बैठक में मंत्री यादव ने वार्षिक परीक्षा परिणामों की समीक्षा करते हुए 10वीं बोर्ड परीक्षा में 85 प्रतिशत तथा 12वीं बोर्ड में 90 प्रतिशत परिणाम प्राप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया। उन्होंने कहा कि केवल उत्तीर्ण प्रतिशत नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को उच्च श्रेणी में उत्तीर्ण कराना प्रमुख उद्देश्य है। इसके लिए मासिक परीक्षाओं की निगरानी, ब्लूप्रिंट आधारित अध्यापन, उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग और कमजोर विद्यार्थियों के लिए अतिरिक्त कक्षाएं आयोजित करने पर जोर दिया गया।

बेसिक लर्निंग पर विशेष ध्यान
कक्षा 3 से 5 तक के लिए हिन्दी धारा-प्रवाह पढ़ने को विशेष अभियान के रूप में विकसित करने और माध्यमिक स्तर पर गणित व अंग्रेजी की बुनियादी समझ मजबूत करने के निर्देश दिए गए। मंत्री ने अपार आईडी निर्माण में बिलासपुर और सक्ति जिले की धीमी प्रगति पर नाराजगी व्यक्त करते हुए एक सप्ताह में सुधार के निर्देश दिए। ड्रॉपआउट रोकथाम को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए अधिकारी जवाबदेही सुनिश्चित करने को कहा गया।

सेवानिवृत्त शिक्षकों के लंबित स्वत्वों का तत्काल निराकरण
मंत्री ने विकासखण्ड अधिकारियों को निर्देश दिए कि शिक्षक सेवानिवृत्ति के दिन ही सेवा पुस्तिका, पासबुक और स्वत्व भुगतान पूर्ण कर दिया जाए, ताकि सेवानिवृत्त कर्मचारियों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।

अधोसंरचना व मॉडल स्कूलों के विकास कार्यों में तेजी
भवनविहीन विद्यालयों में निर्माण कार्य शीघ्र पूर्ण करने, मॉडल स्कूल चयन की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ाने और पीएम श्री विद्यालयों के अधूरे कार्य निर्धारित समय में पूरा करने के निर्देश दिए गए। बीईओ के लिए लक्ष्य आधारित गोपनीय प्रतिवेदन प्रणाली लागू करने की भी घोषणा की गई।

पंचायतों को सौंपे जाएंगे स्कूल मरम्मत कार्य
शिक्षा मंत्री ने कहा कि स्कूलों में छोटे-छोटे मरम्मत कार्य ग्राम पंचायतों के माध्यम से कराए जाएँ। इससे न केवल कार्य की गति बढ़ेगी बल्कि समुदाय की सहभागिता भी मजबूत होगी। उन्होंने 31 जनवरी तक सभी शौचालय संबंधी कार्य पूर्ण कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।


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