लोक अदालत की पहल से टूटा मनमुटाव, पति-पत्नी का हुआ पुनर्मिलन

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मुंगेली । नेशनल लोक अदालत ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि आपसी संवाद और समझाइश से टूटते रिश्तों को फिर से जोड़ा जा सकता है। शनिवार, 13 दिसंबर 2025 को आयोजित नेशनल लोक अदालत में परिवार न्यायालय मुंगेली के समक्ष प्रस्तुत एक संवेदनशील पारिवारिक विवाद का सुखद समाधान सामने आया, जहां पति-पत्नी के बीच उत्पन्न मतभेदों को दूर कर री-यूनियन (पुनर्मिलन) कराया गया और प्रकरण का विधिवत निपटारा किया गया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्रकरण की आवेदिका एवं अनावेदक के बीच विवाह से पूर्व प्रेम संबंध था। दोनों ने आपसी सहमति से 23 जून 2025 को डोंगरगढ़ मंदिर में विवाह किया और पति-पत्नी के रूप में दांपत्य जीवन की शुरुआत की। विवाह उपरांत जब दंपती घर लौटे, तो पारिवारिक दबाव और गलतफहमियों के चलते पति ने पत्नी को साथ रखने से इंकार कर दिया। इससे मानसिक रूप से प्रताड़ित पत्नी को न्यायालय की शरण लेनी पड़ी और उसने परिवार न्यायालय मुंगेली में पति के विरुद्ध भरण-पोषण का प्रकरण प्रस्तुत किया।

प्रकरण की सुनवाई के दौरान परिवार न्यायालय मुंगेली के पीठासीन अधिकारी राजीव कुमार ने मामले की गंभीरता और पारिवारिक भविष्य को ध्यान में रखते हुए दोनों पक्षों की गहन काउंसलिंग की। उन्होंने पति-पत्नी को पुराने विवादों और गलतफहमियों को भुलाकर नए सिरे से जीवन शुरू करने, आपसी विश्वास बहाल करने तथा दांपत्य दायित्वों को समझने की समझाइश दी।

न्यायालय की इस सकारात्मक पहल का असर भी देखने को मिला। काउंसलिंग के दौरान दोनों पक्ष अपने मतभेद सुलझाने पर सहमत हुए और साथ रहने की इच्छा जताई। अंततः उभयपक्षों की सहमति से नेशनल लोक अदालत में 13 दिसंबर 2025 को प्रकरण का निराकरण करते हुए पति-पत्नी के बीच री-यूनियन स्थापित कर दिया गया।

नेशनल लोक अदालत में हुए इस सफल पुनर्मिलन को न्यायिक प्रक्रिया की मानवीय और संवेदनशील भूमिका के रूप में देखा जा रहा है। यह मामला न केवल न्यायालय की सकारात्मक सोच को दर्शाता है, बल्कि समाज को यह संदेश भी देता है कि संवाद और समझदारी से पारिवारिक विवादों का समाधान संभव है।

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