श्री गोपाल कुटीर आश्रम अमरकंटक में नवदिवसीय श्रीमद् रामकथा का शुभारंभ,


ब्रम्हलीन संत श्री श्री 108 श्री गोपाल जी महाराज की 10वीं पुण्यतिथि पर,
पौष कृष्ण नवमी से पौष शुक्ल तृतीया तक होंगे धार्मिक अनुष्ठान,


संवाददाता – श्रवण कुमार उपाध्याय

अमरकंटक – मां नर्मदा जी की उद्गम स्थली एवं पवित्र नगरी अमरकंटक स्थित श्री गोपाल कुटीर आश्रम में शनिवार दिनांक 13 दिसंबर 2025 से नवदिवसीय श्रीमद् रामकथा का विधिवत शुभारंभ हुआ । यह धार्मिक आयोजन 13 दिसंबर से 21 दिसंबर 2025 तक चलेगा । वहीं 22 दिसंबर 2025 (सोमवार) को ब्रह्मलीन संत श्री श्री 108 श्री गोपाल दास जी महाराज की 10वीं पुण्यतिथि श्रद्धा एवं भक्ति भाव से मनाई जाएगी ।
पुण्यतिथि के अवसर पर गोपाल महाराज जी के विग्रह का स्नान , पूजन , हवन , ध्वजारोहण एवं सम्मान समारोह आयोजित किया जाएगा । कार्यक्रम के समापन के पश्चात उनकी स्मृति में 10 पौधों का रोपण किया जाएगा । इसके बाद कन्या भोज , संत प्रसादी एवं विशाल भंडारे का आयोजन होगा ।
कलश यात्रा के साथ कथा का शुभारंभ
श्रीमद् रामकथा के प्रथम दिवस आश्रम की बच्चियों एवं महिलाओं ने भक्तों और कथा वाचक के साथ कलश यात्रा निकाली । सभी श्रद्धालु पैदल नर्मदा मंदिर उद्गम स्थल पहुंचे , जहां विधिवत पूजन-अर्चन के पश्चात कलशों में नर्मदा जल भरकर आश्रम लौटे । कथा स्थल पर कलश स्थापना , नर्मदा पूजन एवं देव पूजन के साथ कथा का शुभारंभ किया गया।
दिव्य प्रसंगों का होगा श्रवण
रविवार से कथा के दौरान शिव विवाह , श्रीराम जन्म , राम विवाह , वनवास , भारत चरित्र , सुग्रीव मैत्री , सीता खोज एवं रामराज्याभिषेक जैसे पावन प्रसंगों का रसपूर्ण वर्णन किया जाएगा ।
कथा वाचक एवं यजमान
इस अवसर पर श्री 108 श्री रामानंद जी महाराज (अखंड परमधाम , रानी गली , सप्त सरोवर , हरिद्वार) के श्रीमुख से सात दिवस तक रामकथा का प्रवाह होगा ।
कथा के मुख्य यजमान – श्री सीताराम परिवार गाड़ासरई हैं ।
श्रद्धालुओं की सहभागिता
ब्रम्हलीन संत श्री श्री 108 श्री गोपाल महाराज जी की 10वीं पुण्यतिथि पर अमरकंटक , करंजिया , गाड़ासरई , डिंडोरी एवं मंडला सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में शिष्यगण , श्रद्धालु उपस्थित होकर आयोजन को भव्य रूप प्रदान कर रहे हैं ।
आश्रम के श्रीमहंत स्वामी कोमल दास जी महात्यागी महाराज ने बताया कि ब्रह्मलीन गोपाल दास जी महाराज की पुण्यतिथि प्रत्येक वर्ष श्रद्धा एवं भक्ति भाव से मनाई जाती है ।

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