बिलासपुर में ‘वार्तालाप’ : जी-राम-जी अधिनियम 2025 से गांव बने विकास के केंद्रग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर बनाने की नई रूपरेखा पर मंथन“गांव सशक्त होंगे, तभी विकसित भारत का सपना होगा साकार”

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बिलासपुर। ग्रामीण विकास को नई दिशा देने वाले विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) यानी जी-राम-जी (VB-GRAM G) अधिनियम, 2025 पर गुरुवार को बिलासपुर में गहन चर्चा हुई। भारत सरकार के पत्र सूचना कार्यालय, रायपुर द्वारा आयोजित एक दिवसीय क्षेत्रीय मीडिया कार्यशाला ‘वार्तालाप’ में अधिनियम के प्रावधानों, उद्देश्य और भविष्य की रणनीति को विस्तार से रखा गया। कार्यक्रम में केंद्रीय आवासन एवं शहरी विकास राज्य मंत्री तोखन साहू मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

कार्यशाला को संबोधित करते हुए तोखन साहू ने कहा कि जी-राम-जी अधिनियम केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत को विकसित भारत के संकल्प से जोड़ने वाली एक दूरदर्शी व्यवस्था है। उन्होंने कहा कि अब विकास की धुरी गांव होंगे, जहां निर्णय, क्रियान्वयन और जवाबदेही तीनों का केंद्र ग्राम पंचायत बनेगी। इस अधिनियम का उद्देश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बिचौलियों से मुक्त करना, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण को प्रभावी बनाना और ग्राम सभाओं को वास्तविक अधिकार देना है।

125 दिन का रोजगार, साप्ताहिक भुगतान
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि नए अधिनियम के तहत रोजगार की गारंटी को 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है, जिससे ग्रामीण परिवारों को आर्थिक सुरक्षा मिलेगी। साथ ही मजदूरी भुगतान की प्रक्रिया को तेज करते हुए अब सात दिन के भीतर भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा। इससे श्रमिकों को समय पर मेहनताना मिलेगा और उनकी आय में स्थायित्व आएगा।

उन्होंने कहा कि यह मिशन केवल रोजगार उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि गांवों में टिकाऊ और उत्पादक परिसंपत्तियों के निर्माण पर भी केंद्रित है। जल संरक्षण, ग्रामीण बुनियादी ढांचा, आजीविका से जुड़े संसाधन और जलवायु परिवर्तन से निपटने वाले कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी।

ग्राम पंचायतों की A, B, C श्रेणी
जी-राम-जी अधिनियम की एक अहम विशेषता पर प्रकाश डालते हुए बताया गया कि अब ग्राम पंचायतों को उनके विकास मानकों के आधार पर A, B और C श्रेणियों में विभाजित किया जाएगा। इसके तहत योजनाओं का चयन और क्रियान्वयन पीएम गति शक्ति मिशन से जोड़कर किया जाएगा, जिससे विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो सके।

तकनीक से पारदर्शिता पर जोर
कार्यशाला में बताया गया कि योजना के क्रियान्वयन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित निगरानी प्रणाली, जियो-टैगिंग, डिजिटल अटेंडेंस और बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण का उपयोग किया जाएगा। इससे फर्जीवाड़े और धन के दुरुपयोग पर पूरी तरह रोक लगेगी। प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्रशासनिक मद की सीमा को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 9 प्रतिशत कर दिया गया है।

ग्रामीण आय और बुनियादी ढांचे पर फोकस
कार्यक्रम के दौरान बिलासपुर जिला पंचायत की सहायक परियोजना अधिकारी (मनरेगा) अनुराधा शुक्ला ने कहा कि जी-राम-जी मिशन ग्रामीण क्षेत्रों में आय की सुरक्षा और स्थिरता के लिए मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने बताया कि योजना का मुख्य उद्देश्य केवल रोजगार देना नहीं, बल्कि जल सुरक्षा और मजबूत ग्रामीण बुनियादी ढांचे का निर्माण करना है, जिससे गांवों में स्थायी विकास संभव हो सके।

प्रश्नोत्तर में उठे अहम मुद्दे
कार्यक्रम के अंतिम सत्र में आयोजित प्रश्नोत्तर में पत्रकारों ने अधिनियम के व्यावहारिक पहलुओं, छत्तीसगढ़ में इसके प्रभाव और क्षेत्रीय विकास को लेकर कई सवाल उठाए। जवाब में बताया गया कि यह अधिनियम वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है और इसके माध्यम से गांवों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे।

कार्यशाला ‘वार्तालाप’ ने न केवल केंद्र सरकार की दूरदर्शी नीतियों को सामने रखा, बल्कि ग्रामीण छत्तीसगढ़ के समग्र विकास के लिए प्रशासन और मीडिया के बीच संवाद को भी मजबूत किया।

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