एसईसीएल को देश की नंबर 1 कोल कंपनी बनाने के लिए रिफ़ोर्म को कार्यसंस्कृति का हिस्सा बनाना ज़रूरी : सीएमडी हरीश दुहन


• एसईसीएल में पहली बार ‘चिंतन शिविर’ का आयोजन, ऊर्जा के क्षेत्र आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य के अनुरूप कंपनी की भावी दिशा पर हुआ गहन मंथन
बिलासपुर । ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य के दृषिगत एसईसीएल में दिनांक 16 जनवरी 2026 को पहले चिंतन शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम एसईसीएल मुख्यालय, बिलासपुर के ऑडिटोरियम में संपन्न हुआ।


इस चिंतन शिविर का उद्देश्य कंपनी की उपलब्धियों की समीक्षा करना, कमियों की पहचान करना तथा उत्पादन, डिस्पैच, सेफ्टी, कॉस्ट एफिशिएंसी, सस्टेनेबिलिटी और डिजिटाइजेशन को सुदृढ़ करने के लिए स्पष्ट एवं समयबद्ध एक्शन प्लान पर मंथन करना था।


इस अनूठी और दूरदर्शी पहल का नेतृत्व एसईसीएल सीएमडी हरीश दुहन ने किया। उनके साथ निदेशक (तकनीकी–संचालन) एन फ्रैंकलिन जयकुमार, निदेशक (मानव संसाधन) बिरंची दास, निदेशक (वित्त) डी सुनील कुमार, मुख्य सतर्कता अधिकारी हिमांशु जैन, निदेशक (तकनीकी) यो./परि. रमेश चन्द्र महापात्र की भी उपस्थिति रही।
शिविर में मुख्यालय एवं सभी संचालन क्षेत्रों से लगभग 200 अधिकारियों ने भाग लिया, जिनमें क्षेत्रीय महाप्रबंधक, विभागाध्यक्ष एवं ई-5 स्तर तक के युवा अधिकारी बड़ी संख्या में शामिल रहे।
इस अवसर पर सीएमडी हरीश दुहन ने कहा कि एसईसीएल को हमें एक बार फिर देश की नंबर 1 कंपनी बनाना है और इसके लिए रिफॉर्म को एक नारे तक सीमित ना रखते हुए हमें इसे अपनी कार्य-संस्कृति का हिस्सा बनाना होगा। हमें स्पीड, टेक्नोलॉजी और डिजिटल इंटरवेंशन के माध्यम से तेज़ निष्पादन और स्पष्ट एवं पारदर्शी निर्णय-प्रक्रिया पर फोकस करना होगा। उत्पादन की साथ-साथ हमें गुणवत्ता पर भी पूरा ध्यान देना होगा ताकि हम एक बेहतर कस्टमर-एक्सपिरियन्स दे सकें। कॉस्ट एफिशिएंसी के साथ रेवेन्यू जनरेशन पर लगातार काम करना भी आज की आवश्यकता है। विज़न 2030 और विज़न 2047 को ध्यान में रखते हुए डायवर्सिफिकेशन, नेट-ज़ीरो रोडमैप और इंडस्ट्री लिंकेज में हमें हमेशा एक कदम आगे रहना होगा। कंपनी के युवा अधिकारी कंपनी का भविष्य हैं और आप सभी को कंपनी के विज़न को साकार करने में तथा एसईसीएल को फ्यूचर-रेडी संस्था बनाने में अग्रणी भूमिका निभानी है।
15 प्रस्तुतियाँ, खुला संवाद और सहभागी मंथन
चिंतन शिविर के दौरान विभिन्न विभागाध्यक्षों द्वारा कुल 15 पीपीटी प्रस्तुतियाँ दी गईं जिसमें वर्ष 2047 के लिए कंपनी की योजना, अंडरग्राउंड प्रोडक्शन प्लान, क्वालिटी कंट्रोल, डिस्पैच, एफ़एमसी, सेफ़्टी, भू-अधिग्रहण एवं पुनर्स्थापन, पर्यावरण एवं वन स्वीकृति, डिजिटाइजेशन/एआई का प्रयोग, मानव संसाधन, फाइनेंस, कांट्रैक्ट मैनेजमेंट जैसे विषय शामिल रहे।

प्रत्येक सत्र के पश्चात प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया, जिसमें सीएमडी, सभी निदेशक एवं मुख्य सतर्कता अधिकारी ने सक्रिय रूप से भाग लिया।
खुले मंच पर विचार, सुझाव एवं नवाचारात्मक आइडियाज़ पर विस्तार से चर्चा की गई, जिससे टॉप-डाउन के साथ-साथ बॉटम-अप इनपुट्स को भी प्रोत्साहन मिला।
गौरतलब है कि हाल ही में कोयला मंत्रालय द्वारा 5–6 जनवरी को नई दिल्ली में कोल इंडिया एवं सभी अनुषंगी कंपनियों के प्रबंधन के साथ आयोजित चिंतन शिविर में सामने आए प्रमुख बिंदुओं और दिशा-निर्देशों के आधार पर एसईसीएल में यह आयोजन किया गया। इसके अंतर्गत पहले सभी संचालन क्षेत्रों में आंतरिक स्तर पर शिविर का आयोजन किया गया, जिसके उपरांत मुख्यालय स्तर पर समेकित चिंतन शिविर का आयोजन किया गया।
नई पहल, नया दृष्टिकोण
चिंतन शिविर एसईसीएल की एक नई, संरचित और सहभागी पहल है, जिसका उद्देश्य संगठन में सहयोग, नवाचार, पारदर्शिता और परिणामोन्मुख सोच को मजबूत करना है। यह मंच न केवल भविष्य की चुनौतियों के लिए संगठन को तैयार करने में सहायक सिद्ध हुआ, बल्कि युवा अधिकारियों को नीति-निर्माण और निर्णय प्रक्रिया से जोड़ने का भी सशक्त माध्यम बना।

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