बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हिंसा के खिलाफ रायपुर में उठा इंसाफ़ और इंसानियत का स्वर शहर सीरत-उन-नबी कमेटी की बैठक में हिंदू अल्पसंख्यकों पर अत्याचार की कड़ी निंदा, भारत सरकार से कूटनीतिक हस्तक्षेप की मांग


रिपोर्टर ✒️ कमलेश सिंह
रायपुर। बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदाय, विशेष रूप से हिंदू समाज के खिलाफ हाल के दिनों में सामने आई हिंसक घटनाओं को लेकर रायपुर में गहरी चिंता और आक्रोश देखने को मिला। शहर सीरत-उन-नबी कमेटी, रायपुर की एक अहम बैठक शास्त्री बाजार स्थित हॉल में आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता कमेटी के अध्यक्ष मोहम्मद सोहेल सेठी ने की। बैठक में बांग्लादेश में हो रही मॉब लिंचिंग, धार्मिक स्थलों को नुकसान पहुंचाने, निर्दोष नागरिकों पर हमले और अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न जैसी घटनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई और इनकी कड़े शब्दों में निंदा की गई।
बैठक में मौजूद वक्ताओं ने एकमत से कहा कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रही हिंसा न केवल मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन है, बल्कि यह किसी भी लोकतांत्रिक और सभ्य समाज की बुनियादी सोच के भी खिलाफ है। वक्ताओं ने स्पष्ट कहा कि किसी भी धर्म में निर्दोषों पर अत्याचार, नफ़रत और हिंसा की कोई जगह नहीं हो सकती।
कमेटी के अध्यक्ष मोहम्मद सोहेल सेठी ने अपने संबोधन में कहा कि भारत का मुस्लिम समाज हमेशा इंसाफ़, अमन और भाईचारे के उसूलों पर कायम रहा है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के साथ जो अन्याय और ज़ुल्म हुआ है, उसकी वे पूरी मजबूती के साथ निंदा करते हैं। पीड़ित चाहे किसी भी धर्म या समुदाय से हों, उनके साथ खड़ा होना हर इंसान का नैतिक, धार्मिक और मानवीय कर्तव्य है।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत में हिंदू और मुस्लिम समाज सदियों से एक-दूसरे के साथ मिल-जुलकर शांति और सद्भाव के साथ रहते आए हैं। कुछ कट्टरपंथी और शरारती तत्व नफ़रत फैलाकर समाज को बांटने की कोशिश करते हैं, लेकिन अमन पसंद लोग ऐसी कोशिशों को कभी सफल नहीं होने देंगे।
बैठक में भारत सरकार से यह मांग की गई कि बांग्लादेश में बने हालात को गंभीरता से लेते हुए वहां की सरकार पर प्रभावी कूटनीतिक दबाव बनाया जाए, ताकि हिंसा में शामिल दोषियों और साज़िशकर्ताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो सके। साथ ही पीड़ित अल्पसंख्यक परिवारों की सुरक्षा, पुनर्वास और न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों से भी निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की गई।
कमेटी ने इस बात पर भी चिंता जताई कि कुछ असामाजिक तत्व बांग्लादेश की घटनाओं की आड़ में भारत में सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसे लोगों के लिए कमेटी का संदेश साफ है कि ज़ुल्म के खिलाफ आवाज़ उठाना ज़रूरी है, लेकिन नफ़रत फैलाकर या हिंसा को बढ़ावा देकर इंसाफ़ नहीं पाया जा सकता।
बैठक में मोहम्मद सोहेल सेठी, मोहम्मद सिराज, हाजी मोहम्मद अय्यूब पारेख, एजाज़ खान, यूनुस शेख़, फिरोज़ खान, नादिर खान, हाजी रिज़वान लतीफ़, शेख़ शकील, अयान सेठी, गुड्डा सेठी सहित मुस्लिम समाज के कई जिम्मेदार और गणमान्य लोग मौजूद रहे। सभी वक्ताओं ने शांति, संयम, आपसी भाईचारे और कानून के दायरे में रहकर इंसाफ़ की लड़ाई लड़ने पर ज़ोर दिया।
अंत में शहर सीरत-उन-नबी कमेटी ने देशवासियों से अपील की कि वे अफ़वाहों, भड़काऊ संदेशों और नफ़रत फैलाने वाले प्रचार से दूर रहें। संवेदनशील परिस्थितियों में शांति, समझदारी और इंसानियत को मजबूत करना ही समाज और देश के हित में है। कमेटी ने दोहराया कि वह हर स्तर पर न्याय, मानवाधिकार और सांप्रदायिक सौहार्द के पक्ष में मजबूती से खड़ी रहेगी।
यह जानकारी शहर सीरत-उन-नबी कमेटी, रायपुर के मीडिया प्रभारी शेख़ शकील एवं अब्दुल नादिर ख़ान द्वारा दी गई।

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