सेवा तीर्थ राष्ट्र को समर्पित: ‘नागरिक देवो भव’ की भावना से प्रेरित ऐतिहासिक पहल


नई दिल्ली | प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज ‘सेवा तीर्थ’ को राष्ट्र को समर्पित किया। संध्या समय आयोजित सार्वजनिक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने ‘सेवा तीर्थ’ परिसर में पट्टिका का अनावरण कर कर्तव्य भवन 1 एवं 2 का औपचारिक उद्घाटन किया। इस अवसर पर एक स्मारक डाक टिकट और स्मारक सिक्का भी जारी किया गया।

यह कार्यक्रम देश की प्रशासनिक संरचना में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है, जो आधुनिक एवं नागरिक-केंद्रित शासन व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।


इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने देशवासियों की सेवा के अपने अटूट संकल्प को दोहराते हुए कहा कि यह परिसर ‘नागरिक देवो भव’ की पावन भावना से प्रेरित है। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि ‘सेवा तीर्थ’ केवल एक भवन नहीं, बल्कि कर्तव्य, करुणा और ‘राष्ट्र प्रथम’ के सिद्धांत के प्रति हमारी अटूट प्रतिबद्धता का सशक्त प्रतीक है। उन्होंने कहा कि देशवासियों की सेवा के संकल्प और ‘नागरिक देवो भव’ की भावना को साथ लेकर इस पहल को राष्ट्र को समर्पित किया गया है।

प्रधानमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि यह पहल आने वाली पीढ़ियों को निःस्वार्थ सेवा और जन-जन के कल्याण हेतु समर्पित होकर कार्य करने की प्रेरणा देती रहेगी। उन्होंने प्रशासनिक तंत्र से जुड़े सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों से आह्वान किया कि वे इस परिसर में प्रवेश करते समय ‘कर्तव्य’ की सर्वोच्च भावना को आत्मसात करें और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं।
कार्यक्रम में केन्द्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर,प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह तथा केन्द्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू विशेष रूप से उपस्थित थे।
तोखन साहू का वक्तव्य
इस अवसर पर श्री तोखन साहू ने मीडिया से बातचीत करते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी एवं प्रेरणादायी नेतृत्व की सराहना की। उन्होंने कहा कि ‘सेवा तीर्थ’ प्रधानमंत्री की जन-केंद्रित शासन व्यवस्था की सोच का मूर्त रूप है और यह भारत की प्रशासनिक कार्य-संस्कृति में एक सकारात्मक परिवर्तन का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने प्रशासन को संवेदनशील, उत्तरदायी और नागरिक-प्रथम बनाने की जो दिशा दी है, यह पहल उसी संकल्प की अभिव्यक्ति है।
श्री साहू ने कहा कि इस ऐतिहासिक अवसर का साक्षी बनना उनके लिए गर्व का विषय है और यह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा। उन्होंने अपने संसदीय क्षेत्र बिलासपुर की जनता के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि उनके विश्वास और आशीर्वाद के कारण ही उन्हें राष्ट्र निर्माण के इस गौरवपूर्ण क्षण में सहभागी बनने का अवसर मिला है।
उन्होंने अपने परिवारजनों के प्रति भी हृदय से आभार प्रकट करते हुए कहा कि उनके संस्कार, मार्गदर्शन और सतत सहयोग ने उन्हें सदैव जनसेवा के पथ पर अग्रसर रहने की प्रेरणा दी है।
उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा,
“यह केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनसेवा के संकल्प का सजीव प्रतीक है। मैं अपने संसदीय क्षेत्र की जनता और अपने परिवार का हृदय से आभारी हूँ। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘सेवा तीर्थ’ आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का केंद्र बनेगा और हम सभी को ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना के साथ निरंतर कार्य करने के लिए प्रेरित करेगा।”
‘सेवा तीर्थ’ को सुशासन, पारदर्शिता और नागरिक-केन्द्रित प्रशासन की दिशा में एक नई कार्य-संस्कृति का प्रतीक माना जा रहा है, जो राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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