रेरा पर सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी, कहा– बंद कर देना ही बेहतर

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नई दिल्ली । देश में रियल एस्टेट सेक्टर की निगरानी के लिए गठित ने रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (RERA) के कामकाज पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के एक फैसले के खिलाफ सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश और न्यायमूर्ति की पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि रेरा अपने मूल उद्देश्य से भटक चुकी है और इसे बंद कर देना ही बेहतर विकल्प हो सकता है।

पीठ ने कहा कि रेरा का गठन होमबायर्स की सुरक्षा और उन्हें त्वरित न्याय दिलाने के लिए किया गया था, लेकिन आज स्थिति यह है कि यह संस्था खरीदारों की मदद करने के बजाय डिफॉल्टर बिल्डरों को संरक्षण देती नजर आ रही है। कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अब समय आ गया है जब राज्य सरकारों को रेरा के गठन और उसकी कार्यप्रणाली पर पुनर्विचार करना चाहिए।

रिटायर्ड नौकरशाहों का “रिहैबिलिटेशन सेंटर”

सुनवाई के दौरान जब बेंच को बताया गया कि रेरा में एक सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी की नियुक्ति की गई है, तो मुख्य न्यायाधीश ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि लगभग हर राज्य में रेरा रिटायर्ड नौकरशाहों का “रिहैबिलिटेशन सेंटर” बन गया है। उन्होंने कहा कि जिन आम लोगों और होमबायर्स के हितों की रक्षा के लिए यह संस्था बनाई गई थी, वे आज सबसे अधिक निराश और परेशान हैं।

शिमला से धर्मशाला शिफ्ट होगा रेरा कार्यालय

यह मामला हिमाचल प्रदेश सरकार के उस नोटिफिकेशन से जुड़ा था, जिसमें रेरा कार्यालय को शिमला से धर्मशाला स्थानांतरित करने का निर्णय लिया गया था। हाई कोर्ट ने इस पर रोक लगा दी थी। अब सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को कार्यालय शिफ्ट करने की अनुमति दे दी है। साथ ही निर्देश दिया कि होमबायर्स की सुविधा को ध्यान में रखते हुए अपीलीय ट्रिब्यूनल को भी धर्मशाला स्थानांतरित किया जाए।

पहले भी उठ चुके हैं सवाल

यह पहली बार नहीं है जब सुप्रीम कोर्ट ने रेरा पर नाराजगी जताई हो। सितंबर 2024 में भी जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा था कि पूर्व नौकरशाहों ने इस कानून की मूल भावना को कमजोर कर दिया है।

होमबायर्स की चिंता

होमबायर्स संगठन ने कहा कि रेरा कानून लागू हुए 9 साल हो चुके हैं, लेकिन आज भी समय पर पजेशन की कोई गारंटी नहीं है। संगठन ने या तो बड़े सुधार की मांग की है या फिर रेरा के अस्तित्व पर ही पुनर्विचार की बात कही है।

नॉलेज बॉक्स
रेरा की स्थापना वर्ष 2016 में रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता, जवाबदेही और होमबायर्स के हितों की रक्षा के उद्देश्य से की गई थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट की हालिया टिप्पणियों ने इसकी कार्यप्रणाली पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

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