लोकार्पण के इंतजार में धूल खा रही सीटी स्कैन मशीन, प्रशासनिक उदासीनता से जूझते मरीज
मुंगेली। जिला चिकित्सालय में स्थापित अत्याधुनिक सीटी स्कैन मशीन पिछले कई महीनों से लोकार्पण के इंतजार में बेकार पड़ी हुई है। लाखों रुपये की लागत से खरीदी गई यह मशीन, जो जिले के मरीजों को बेहतर और सुलभ जांच सुविधा देने के उद्देश्य से लाई गई थी, आज प्रशासनिक सुस्ती और उदासीनता का प्रतीक बन चुकी है। स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की बड़ी घोषणाओं के बीच जमीनी हकीकत यह है कि मरीज अब भी महंगे निजी अस्पतालों या दूसरे शहरों की ओर जाने को मजबूर हैं।
छह बार टली शुरुआत, हर बार अधूरा रह गया उद्घाटन
जानकारी के अनुसार, जिला अस्पताल में सीटी स्कैन मशीन का इंस्टॉलेशन कार्य काफी पहले ही पूरा कर लिया गया था। इसके संचालन के लिए आवश्यक टेक्नीशियन और स्टाफ की भी नियुक्ति कर दी गई है। बावजूद इसके, मशीन अब तक शुरू नहीं हो सकी है।
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि अस्पताल प्रबंधन और प्रशासन द्वारा मशीन के लोकार्पण के लिए अब तक छह बार तैयारियां की जा चुकी हैं। हर बार कार्यक्रम तय हुआ, लेकिन किसी न किसी कारण से उद्घाटन टलता रहा। जनवरी से शुरू हुई यह प्रक्रिया मार्च तक भी पूरी नहीं हो सकी, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
मरीजों को नहीं मिल रहा लाभ, बाहर जाने को मजबूर
सीटी स्कैन जैसी महत्वपूर्ण जांच सुविधा का जिला अस्पताल में उपलब्ध होना बेहद जरूरी है, खासकर उन मरीजों के लिए जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं। वर्तमान में जिले के मरीजों को इस जांच के लिए निजी डायग्नोस्टिक सेंटर या बड़े शहरों का रुख करना पड़ रहा है, जहां उन्हें भारी खर्च उठाना पड़ता है।
गरीब और ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले मरीजों के लिए यह स्थिति और भी मुश्किल भरी है। कई बार आर्थिक तंगी के कारण वे जरूरी जांच तक नहीं करा पाते, जिससे उनकी बीमारी का समय पर पता नहीं चल पाता और स्थिति गंभीर हो जाती है।
कैंसर और गंभीर बीमारियों की जांच में महत्वपूर्ण है मशीन
विशेषज्ञों के अनुसार, सीटी स्कैन मशीन आधुनिक चिकित्सा का एक महत्वपूर्ण उपकरण है, जिससे शरीर के अंदरूनी हिस्सों की सटीक जांच की जा सकती है। इसके माध्यम से हड्डियों, अंगों, ऊतकों और रक्त वाहिकाओं में होने वाली समस्याओं का जल्दी और सही पता लगाया जा सकता है।
कैंसर, आंतरिक चोट, ब्रेन हेमरेज, ट्यूमर और कई जटिल बीमारियों के निदान में यह मशीन बेहद उपयोगी साबित होती है। ऐसे में इसका लंबे समय तक बंद रहना न केवल संसाधनों की बर्बादी है, बल्कि मरीजों के स्वास्थ्य के साथ भी गंभीर खिलवाड़ है।
स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर बढ़ रही नाराजगी
जिले के नागरिकों में इस मामले को लेकर गहरी नाराजगी देखने को मिल रही है। लोगों का कहना है कि सरकार द्वारा स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के लिए बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर उनकी स्थिति कुछ और ही बयां करती है।
स्थानीय लोगों ने सवाल उठाया है कि जब मशीन पूरी तरह तैयार है और स्टाफ भी उपलब्ध है, तो आखिर इसे शुरू करने में इतनी देरी क्यों हो रही है। उनका कहना है कि प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की प्राथमिकताओं में आम जनता की बुनियादी जरूरतें शामिल नहीं हैं।
संसाधनों की बर्बादी, जवाबदेही तय नहीं
लाखों रुपये की लागत से लाई गई इस मशीन का उपयोग नहीं होना सीधे तौर पर संसाधनों की बर्बादी है। मशीन जितनी देर तक बंद रहती है, उसकी तकनीकी गुणवत्ता पर भी असर पड़ने की आशंका बनी रहती है।
इसके बावजूद अब तक किसी भी अधिकारी या जिम्मेदार व्यक्ति की जवाबदेही तय नहीं की गई है। यह स्थिति प्रशासनिक लापरवाही और जवाबदेही की कमी को उजागर करती है।
अधिकारियों का दावा – जल्द होगा शुभारंभ
इस पूरे मामले में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सीटी स्कैन मशीन पूरी तरह तैयार है और केवल औपचारिक लोकार्पण बाकी है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी और संबंधित अधिकारियों के अनुसार, जनप्रतिनिधियों से समय नहीं मिल पाने के कारण देरी हो रही है।
उन्होंने आश्वासन दिया है कि जल्द ही मशीन का विधिवत शुभारंभ कर दिया जाएगा, जिससे जिले के मरीजों को इसका लाभ मिल सकेगा। हालांकि, बार-बार दिए जा रहे इस तरह के आश्वासन अब लोगों के बीच भरोसा खोते नजर आ रहे हैं।
जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर उठे सवाल
इस मामले ने जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि यदि जनप्रतिनिधि चाहें तो इस सुविधा को तत्काल शुरू किया जा सकता है, लेकिन उनकी प्राथमिकता में यह विषय नजर नहीं आ रहा है।
लोकार्पण जैसे औपचारिक कार्यक्रम के इंतजार में महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सुविधा को रोके रखना आम जनता के हितों के साथ अन्याय है। लोगों ने मांग की है कि बिना किसी औपचारिकता के तुरंत मशीन चालू की जाए।
जल्द शुरुआत की उम्मीद, निगाहें प्रशासन पर
फिलहाल जिले के मरीजों और नागरिकों की निगाहें प्रशासन पर टिकी हुई हैं। सभी को उम्मीद है कि जल्द ही इस महत्वपूर्ण सुविधा का शुभारंभ होगा और लोगों को राहत मिलेगी।
लेकिन जब तक यह मशीन शुरू नहीं होती, तब तक यह मामला प्रशासनिक उदासीनता और लापरवाही का जीता-जागता उदाहरण बना रहेगा। अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी और जनप्रतिनिधि कब तक इस दिशा में ठोस कदम उठाते हैं और जनता को इस जरूरी सुविधा का लाभ दिलाते हैं।

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