डिवाइडर के पौधे सूखने की कगार पर 14 लाख खर्च के बावजूद नहीं मिल रहा पानी

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उद्यानिकी विभाग पर उठे सवाल, हरित योजना बनी कागजी खेल?

मुंगेली । गर्मी की दस्तक के साथ ही शहर की हरियाली पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। मुंगेली-बिलासपुर मुख्य मार्ग पर दाऊपारा से गीधा तक डिवाइडर में लगाए गए पौधे पानी के अभाव में सूखने की कगार पर पहुंच गए हैं। हैरानी की बात यह है कि इन पौधों की देखभाल और सिंचाई व्यवस्था के लिए करीब 14 लाख रुपए खर्च किए जा चुके हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।

कागजों में खर्च, जमीन पर सूखती हरियाली

प्राप्त जानकारी के अनुसार, 5 अप्रैल 2023 को उद्यानिकी विभाग द्वारा डिवाइडर के पौधों की सिंचाई व्यवस्था के लिए 13 लाख 82 हजार रुपए की राशि स्वीकृत की गई थी। इस राशि से बोरवेल, पाइपलाइन और अन्य आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था की जानी थी, ताकि पौधों को नियमित पानी मिल सके। लेकिन वर्तमान स्थिति यह है कि डिवाइडर में लगे पौधे तेज धूप में झुलस रहे हैं और अधिकांश पौधे सूखने की स्थिति में पहुंच चुके हैं।

4 किलोमीटर क्षेत्र में फैली लापरवाही

दाऊपारा से गीधा तक लगभग 4 किलोमीटर लंबे डिवाइडर में लगाए गए पौधों की हालत बेहद खराब हो चुकी है। शुरुआत में कुछ दिनों तक सिंचाई का कार्य जरूर हुआ, लेकिन बाद में रख-रखाव के अभाव में पूरी व्यवस्था ठप पड़ गई। बोरवेल और पाइपलाइन अब केवल दिखावे के साधन बनकर रह गए हैं।

स्थानीय नागरिकों और राहगीरों का कहना है कि यदि समय पर पौधों को पानी दिया जाता, तो यह क्षेत्र आज एक सुंदर हरित पट्टी के रूप में विकसित हो सकता था। लेकिन विभागीय लापरवाही के चलते यह योजना विफल होती नजर आ रही है।

पर्यावरण प्रेमियों में आक्रोश

डिवाइडर में लगे बड़े-बड़े पौधों को सूखते देख पर्यावरण प्रेमियों में भी गहरी नाराजगी है। उनका कहना है कि एक ओर सरकार हरियाली बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण के लिए योजनाएं चला रही है, वहीं दूसरी ओर इस तरह की लापरवाही से न केवल पौधों की बर्बादी हो रही है, बल्कि सरकारी धन का भी दुरुपयोग हो रहा है।

बोरवेल और पाइपलाइन बने शोपीस

जानकारी के मुताबिक, पौधों की सिंचाई के लिए 4 बोरवेल स्वीकृत किए गए थे, लेकिन इनका सही उपयोग नहीं हो पाया। पाइपलाइन का मेंटेनेंस न होने और नियमित निगरानी के अभाव में पानी पौधों तक पहुंच ही नहीं पा रहा है। नतीजतन, तेज गर्मी में पौधे सूखते जा रहे हैं।

खर्च पर उठे सवाल, जवाब देने से बच रहा विभाग

पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर 14 लाख रुपए खर्च होने के बावजूद पौधों को पानी क्यों नहीं मिल पा रहा है? क्या यह राशि वास्तव में काम में लगी या सिर्फ कागजों में ही खर्च दिखा दी गई?

इस संबंध में उद्यानिकी विभाग के उपसंचालक से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका। विभाग की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।

सुधार नहीं हुआ तो खत्म हो जाएगी हरियाली

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द ही सिंचाई व्यवस्था दुरुस्त नहीं की गई, तो डिवाइडर में लगे अधिकांश पौधे पूरी तरह नष्ट हो जाएंगे। इससे न केवल पर्यावरण को नुकसान होगा, बल्कि लाखों रुपए की लागत भी व्यर्थ हो जाएगी।

जनता की मांग—जवाबदेही तय हो

स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए और डिवाइडर के पौधों की देखभाल के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। उनका कहना है कि योजनाओं का सही क्रियान्वयन ही शहर की सुंदरता और पर्यावरण संरक्षण को सुनिश्चित कर सकता है।

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