निःशुल्क कृत्रिम अंग वितरण शिविर में उमड़ा जनसैलाब, तीन दिन में 78 दिव्यांगजनों को मिला सहारा

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बिलासपुर । अग्रसेन चौक के पास मगरपारा रोड स्थित स्थल पर धर्म जागरण समन्वय एवं वार्ड क्रमांक 32 शहीद विनोद चौबे नगर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 5 दिवसीय निःशुल्क कृत्रिम अंग वितरण शिविर जरूरतमंदों के लिए नई उम्मीद बनकर सामने आया है। शिविर के पहले तीन दिनों में ही 78 दिव्यांगजनों को कृत्रिम हाथ-पैर एवं कैलिपर्स वितरित किए जा चुके हैं, जबकि शुक्रवार को ही लगभग 25 लाभार्थियों को कृत्रिम अंग प्रदान किए गए।

शिविर में बिलासपुर के साथ-साथ रायगढ़, बाराद्वार, बेमेतरा, चिरमिरी सहित विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। दुर्घटनाओं या करंट की चपेट में आकर अंग गंवाने वाले लोगों को जब कृत्रिम अंग लगाए गए, तो उनके चेहरों पर खुशी और आत्मविश्वास साफ झलकता नजर आया। इस शिविर का लाभ बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक उठा रहे हैं।

आयोजन समिति के सदस्य डॉ. ललित माखीजा ने बताया कि स्वामी चिदानंद सरस्वती के मार्गदर्शन में आयोजित यह शिविर 5 अप्रैल तक चलेगा। अब तक 95 लोगों का पंजीयन हो चुका है, जबकि 125 जरूरतमंदों को लाभान्वित करने का लक्ष्य रखा गया है। समिति के सदस्य भूगु अवस्थी ने जानकारी दी कि पहले दिन लाभार्थियों का माप लिया गया, जिसके बाद गुरुवार और शुक्रवार को कृत्रिम अंगों का वितरण किया गया। शुक्रवार को ही 22 नए पंजीयन भी दर्ज किए गए।

दिव्यांगों की सेवा में जुटी प्रेरणादायी टीम

शिविर में महावीर सेवा सदन, कोलकाता से आए डॉ. एस.एस. प्रभाकर सहित 6 टेक्नीशियन सेवाएं दे रहे हैं। विशेष बात यह है कि इस टीम में शामिल 4 टेक्नीशियन स्वयं दिव्यांग हैं, जो अपने अनुभव के आधार पर अन्य दिव्यांगजनों की सेवा कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि अपने दर्द को समझते हुए उन्होंने इस सेवा कार्य से जुड़ने का निर्णय लिया।

लाभार्थियों ने साझा किए दर्द और उम्मीद के पल

शिविर में पहुंचे बेलगहना निवासी घासीराम ने बताया कि करीब 10 वर्ष पहले करंट लगने से उनका हाथ खराब हो गया था, जिसे बाद में काटना पड़ा। अब कृत्रिम हाथ मिलने से उन्हें नया सहारा मिला है। वहीं बेलतरा क्षेत्र के ग्राम टेकर के महेंद्र कश्यप ने बताया कि खेत में काम करते समय ट्रैक्टर की चपेट में आने से उनका पैर खराब हो गया था, जिसे काटना पड़ा। शिविर में कृत्रिम पैर मिलने से अब उन्हें चलने-फिरने में राहत मिलेगी। इसी तरह नेवसा निवासी रामनारायण कश्यप ने बताया कि सड़क दुर्घटना में पैर गंवाने के बाद उनका जीवन कठिन हो गया था, लेकिन अब कृत्रिम पैर मिलने से नई उम्मीद जगी है।

समाजसेवियों ने बढ़ाया हौसला

शुक्रवार को शहर की विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के पदाधिकारी भी शिविर में पहुंचे और सेवा कार्य में जुटी टीम का सम्मान किया। इनमें कान्यकुब्ज ब्राह्मण समाज के अरविंद दीक्षित, स्वयं सिद्धा फाउंडेशन के अध्यक्ष चंचल सलूजा, प्रभात मिश्रा एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी उत्कर्ष दुबे प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। इसके साथ ही मातृ शक्ति टोली की प्रमुख डॉ. सरिता भारद्वाज एवं शशि यादव सहित अन्य लोगों की भी सक्रिय भागीदारी रही।

दो दिन शेष, अधिक से अधिक लोगों से लाभ लेने की अपील

आयोजकों ने बताया कि शिविर अब केवल दो दिन शेष है। ऐसे में उन्होंने लोगों से अपील की है कि अपने आसपास के दिव्यांगजनों को इस शिविर की जानकारी दें, ताकि वे भी इस निःशुल्क सेवा का लाभ उठा सकें। यह शिविर न केवल दिव्यांगजनों को सहारा दे रहा है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनने की दिशा में भी प्रेरित कर रहा है।

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