शिक्षा मंत्री के कार्यक्रम में खाली कुर्सियां, अव्यवस्था पर उठे सवाल

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स्कूल उद्घाटन में नहीं जुट पाई भीड़, आरटीई के 80 बच्चों के भविष्य को लेकर पालकों ने सौंपा ज्ञापन

करगीरोड कोटा | सुचित कुमार मरावी, रिपोर्टर ।
राज्य के शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के करगीरोड कोटा स्थित रानीसागर में नए स्कूल के उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान अव्यवस्था और कम जनसमूह ने पूरे आयोजन की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए। सेंट जेवियर्स स्कूल बंद होने के बाद उसी स्थान पर नए स्कूल के उद्घाटन के लिए आयोजित इस कार्यक्रम में अपेक्षित भीड़ नहीं जुट पाई। पंडाल में बड़ी संख्या में कुर्सियां लगाई गई थीं, लेकिन उनमें बैठने वाले लोग नदारद रहे।

कार्यक्रम में हवन पूजन के साथ औपचारिक उद्घाटन किया गया और मंच से शिक्षा मंत्री ने संबोधन भी दिया। हालांकि आयोजन की स्थिति मंत्री के स्तर के अनुरूप नहीं दिखी। स्थानीय नागरिकों के अनुसार, पूरे कार्यक्रम में नगर के करीब 40 से 50 लोग ही मौजूद रहे, जिनमें स्कूल स्टाफ भी शामिल था। कुल मिलाकर 100 लोगों की संख्या भी पूरी नहीं हो सकी।

आमंत्रित अतिथियों और नागरिकों ने व्यवस्थाओं को लेकर नाराजगी जताई। लोगों का कहना था कि उन्हें कार्यक्रम में बुलाया तो गया, लेकिन वहां बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं कराई गईं। कई लोगों ने आरोप लगाया कि उन्हें पानी और चाय तक के लिए नहीं पूछा गया, जबकि मंच पर ही सीमित नाश्ते की व्यवस्था की गई थी। इस अव्यवस्था से नाराज कुछ गणमान्य नागरिक और जनप्रतिनिधि कार्यक्रम बीच में ही छोड़कर लौटते नजर आए।

कार्यक्रम के दौरान पंडाल में खाली पड़ी कुर्सियां पूरे आयोजन की वास्तविक स्थिति बयां कर रही थीं। आयोजन से जुड़े जिम्मेदार अधिकारियों पर भी सवाल उठे, जिन्होंने कार्यक्रम की पर्याप्त तैयारी नहीं की। बताया गया कि भिलाई क्षेत्र के अधिकारी प्रशांत द्वारा कार्यक्रम का आयोजन किया गया था, लेकिन व्यवस्थाएं अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतर सकीं।

इधर, कार्यक्रम के दौरान आरटीई (Right to Education) के तहत पढ़ रहे 80 बच्चों के भविष्य का मुद्दा भी उठाया गया। सेंट जेवियर्स स्कूल बंद होने से ये बच्चे निशुल्क शिक्षा से वंचित हो गए हैं। कुछ पालक कार्यक्रम में पहुंचे और शिक्षा मंत्री को ज्ञापन सौंपकर बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने की मांग की। इस पर मंत्री श्री यादव ने अपने संबोधन में आश्वासन दिया कि बच्चों के लिए उचित व्यवस्था की जाएगी।

अपने उद्बोधन में शिक्षा मंत्री ने डीएवी स्कूल की सराहना करते हुए वैदिक परंपरा आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने की बात कही। उन्होंने कहा कि बच्चों में वैदिक संस्कार विकसित करने के उद्देश्य से शिक्षा प्रणाली में सकारात्मक बदलाव किए जा रहे हैं।

हालांकि कार्यक्रम के दौरान एक पत्रकार द्वारा वैदिक परंपरा के पालन को लेकर सवाल उठाया गया। पत्रकार ने हवन के समय मंत्री द्वारा चमड़े का कमर बेल्ट पहनने को लेकर सवाल किया, जिस पर मंत्री ने जवाब देते हुए महर्षि दयानंद सरस्वती के विचारों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दयानंद सरस्वती पाखंड के विरोधी थे और आधुनिक समय में वैदिक परंपराओं को नए स्वरूप में अपनाया जा रहा है।

कुल मिलाकर, यह आयोजन व्यवस्थाओं की कमी और कम जनभागीदारी के कारण चर्चा का विषय बन गया। स्थानीय स्तर पर इस कार्यक्रम को लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं, वहीं आरटीई के बच्चों का मुद्दा अब भी समाधान की प्रतीक्षा में है।

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