गोंडवाना आदर्श सामूहिक विवाह में 10 जोड़े परिणय सूत्र में बंधे
डोंगरीगढ़ में भव्य आयोजन, हजारों लोगों की मौजूदगी में सामाजिक एकता का दिया संदेश
लोरमी क्षेत्र (डोंगरीगढ़) | सुचित कुमार मरावी, रिपोर्टर।
लोरमी क्षेत्र के ग्राम डोंगरीगढ़ में गोंडवाना आदर्श सामूहिक विवाह समारोह का भव्य आयोजन उत्साह और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न हुआ। इस गरिमामयी कार्यक्रम में 10 जोड़ों ने वैदिक मंत्रोच्चार और सामाजिक परंपराओं के बीच सात फेरे लेकर अपने वैवाहिक जीवन की नई शुरुआत की। समारोह में हजारों की संख्या में समाजजन उपस्थित होकर नवदंपतियों को आशीर्वाद देने पहुंचे और इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बने।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज, बिलासपुर के जिला अध्यक्ष श्री लव सिदार की विशेष उपस्थिति रही। उनके साथ संयुक्त सचिव नितिन प्रधान, शुभम मरावी, बंटी ध्रुव, हेमराज गुरु, बाबूलाल जगत, श्रवण गुरु एवं जिला कार्यकारिणी अध्यक्ष मुंगली मरकाम सहित कई गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने नवविवाहित जोड़ों को सुखद दांपत्य जीवन की शुभकामनाएं देते हुए आशीर्वाद प्रदान किया।

समारोह के दौरान सामाजिक एकता, परंपराओं के संरक्षण और सामूहिकता की भावना पर विशेष जोर दिया गया। वक्ताओं ने अपने संबोधन में कहा कि सामूहिक विवाह जैसे आयोजन न केवल आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए सहायक सिद्ध होते हैं, बल्कि समाज में भाईचारा और सहयोग की भावना को भी मजबूत करते हैं। इस तरह के आयोजनों से अनावश्यक खर्चों में कमी आती है और सामाजिक कुरीतियों पर भी नियंत्रण संभव हो पाता है।
पूरे आयोजन के दौरान डोंगरीगढ़ क्षेत्र में हर्षोल्लास का वातावरण बना रहा। पारंपरिक वेशभूषा में सजे लोग, लोकगीतों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ इस आयोजन को और भी आकर्षक बना रहे थे। विवाह स्थल को विशेष रूप से सजाया गया था, जहां प्रत्येक जोड़े के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई थीं। आयोजन समिति द्वारा भोजन, पेयजल और अन्य सुविधाओं का भी समुचित प्रबंध किया गया था, जिससे बाहर से आए लोगों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

इस अवसर पर समाज के वरिष्ठजनों ने कहा कि गोंडवाना आदर्श सामूहिक विवाह केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता और एकजुटता का प्रतीक है। यह आयोजन आने वाली पीढ़ियों को अपनी परंपराओं से जोड़ने और समाज को संगठित रखने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
कुल मिलाकर, यह भव्य आयोजन सामाजिक समरसता, संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर सामने आया। हजारों लोगों की सहभागिता ने यह सिद्ध कर दिया कि समाज आज भी अपनी जड़ों से जुड़ा हुआ है और सामूहिक प्रयासों के माध्यम से एक मजबूत और संगठित भविष्य की ओर अग्रसर है।

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